CGPSC Scam: CGPSC भर्ती घोटाला: छत्तीसगढ़ में छापे का दिन: रिटायर्ड आईएएस, राज्यपाल के पूर्व सचिव, पूर्व परीक्षा नियंत्रक के घर पर ED का ताबड़तोड़ छापा

रायपुर। 3 जून 2026| सीजीपीएससी भर्ती परीक्षा घोटाले में रायपुर, दुर्ग-भिलाई में ईडी ने छापेमारी की। पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के रायपुर स्थित घर में कार्रवाई चल रही है। रिटायर्ड आईएएस जेके ध्रुव के भिलाई सेक्टर-10 स्थित घर पर सुबह 6 बजे से जांच जारी है। बता दें कि जेके ध्रुव सीजी-पीएससी भर्ती घोटाले में आरोपी हैं और वर्तमान में जेल में हैं। राज्यपाल के पूर्व सचिव अमृत खलखो के भिलाई तालपुरी स्थित निवास पर भी जांच चल रही है। उनकी बेटी नेहा का 13वीं रैंक और बेटे निखिल का 17वीं रैंक के साथ डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ था।
पढ़िए क्या है CGPSC घोटाला
यह मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित करने का आरोप है।
इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का खेल हुआ। राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए हैं। सीबीआई के बाद अब इस मामले में ईडी की इंट्री हो गई है।
सीबीआई ने दलील दी कि, साल 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षा में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्तेदारों और करीबी लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया। जांच में सामने आया, एक निजी कंपनी से सीएसआर मद के तहत 45 लाख रुपए एक एनजीओ को दिए गए। जिसकी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की पत्नी थीं। इसके बदले प्रश्नपत्र लीक किए गए।
एग्जाम कंट्रोलर और डिप्टी कंट्रोलर ने प्रश्न पत्र किया लीक
सीबीआई का यह भी आरोप है , परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर ने अध्यक्ष के निर्देश पर उद्योगपति श्रवण गोयल को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए। जिन्होंने आगे यह प्रश्नपत्र अपने बेटे और बहू को दिए। दोनों का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ। सोनवानी के भतीजों का चयन डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी पद पर हुआ।
अब तक इनकी हो चुकी है गिरफ्तारी
CGPSC घोटाला (2020-21) में सीबीआई ने बीते साल सितंबर में आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों और उनके रिश्तेदारों सहित 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, सचिव के बेटे व डिप्टी कलेक्टर सुमित ध्रुव, पूर्व अध्यक्ष की रिश्तेदार व डिप्टी कलेक्टर मिशा कोसले और जिला आबकारी अधिकारी दीपा आदिल शामिल हैं। बता दें, राज्य सरकार की अधिसूचनाओं के बाद सीबीआई ने 9 जुलाई 2024 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी।
आरोप है कि तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और अन्य अधिकारियों ने 2020 से 2022 के बीच भर्ती प्रक्रियाओं की निगरानी के दौरान नियमों को ताक पर रखकर परीक्षाओं और इंटरव्यू को प्रभावित किया, ताकि अपने बच्चों और करीबी रिश्तेदारों का चयन करा सकें।
पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर ने उठाया था मामला
सीजीपीएससी में फर्जीवाड़ा को सबसे पहले भाजपा नेता व पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने उठाया। कंवर ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई काेर्ट में जनहित याचिका दायर कर चयन सूची को रद्द करने और पूरे मामले की सीबीआई से जांच की मांग की थी। याचिकाकर्ता कंवर ने फर्जीवाड़ा के संबंध में हाई कोर्ट को सूची भी सौंपी थी।

