Bilaspur High Court: बेदखली नोटिस पर अंतरिम राहत देने से हाई काेर्ट का इंकार, राज्य शासन को नोटिस जारी कर मांगे दस्तावेज

Bilaspur High Court: बेदखली नोटिस पर अंतरिम राहत देने से हाई काेर्ट का इंकार, राज्य शासन को नोटिस जारी कर मांगे दस्तावेज

बिलासपुर। 08 जून 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस एके व्यास ने एक मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है,राजस्व अभिलेख को पहले ही सही कर दिया गया है और प्राधिकरण द्वारा विध्वंस की कार्यवाही पहले ही निष्पादित की जा चुकी है, इसलिए इस समय अंतरिम राहत की प्रार्थना अस्वीकृत की जाती है। हालांकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि मूल भूमि मालिक द्वारा शुरू की गई कार्यवाही याचिकाकर्ता के पक्ष में तय होती है, तो प्राधिकरण याचिकाकर्ता को भूमि की प्रतिपूर्ति और उचित मुआवजा प्रदान करेगा।

याचिकाकर्ता धनेश कुमार अधिवक्ता प्रतीक सिंह ठाकुर के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने देवा दास से पंजीकृत विक्रय विलेख के माध्यम से खसरा संख्या 109 वाली संपत्ति खरीदी है, जो कुल 0.12 हेक्टेयर भूमि में से 0.02 हेक्टेयर है और ग्राम छुटापार, तहसील और ब्लॉक नवागढ़, जिला बेमेतरा में स्थित है। उन्होंने आगे बताया कि प्रतिवादियों ने याचिकाकर्ता को 05 जून 2026 को बेदखली वारंट जारी किया है, जिसमें याचिकाकर्ता को 08.जून.2026 से पहले परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा वे मामले में आगे की कार्यवाही करेंगे। ऐसे मामले जिनमें इस न्यायालय ने मामले को एसडीएम (राजस्व) नवागढ़ को पुनर्विचार कार्यवाही पर नए सिरे से विचार करने के लिए वापस भेज दिया था, लेकिन प्रतिवादियों ने मामले पर पुनर्विचार नहीं किया है, जो इस न्यायालय द्वारा पारित आदेश का घोर उल्लंघन है।

पढ़िए राज्य शासन ने अपने जवाब में क्या कहा

राज्य शासन की ओर से गर्वनमेंट एडवोकेट प्रियांक राठी ने पैरवी करते हुए कहा, इस मामले में निष्पादन कार्यवाही पहले ही ढांचे को ध्वस्त करके पूरी की जा चुकी है। उन्होंने आगे कहा कि संपत्ति को श्मशान भूमि के लिए वाजिब-उल-अर्ज़ के रूप में दर्ज किया गया था और उसके बाद 23.जनवरी .2018 को एसडीएम (राजस्व) के समक्ष अपील दायर की गई थी, जिसमें अभिलेखों में सुधार का निर्देश दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उक्त संपत्ति को वाजिब-उल-अर्ज़ के रूप में दर्ज करने वाले मूल आदेश को मूल स्वामी देवा दास द्वारा राजस्व बोर्ड के समक्ष चुनौती दी गई है, लेकिन कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई है।

कोर्ट ने कहा: प्राधिकरण ने पहले ही विध्वंस की कार्रवाई कर दी है, नहीं दी जा सकती अंतरिम राहत याचिका की सुनवाई जस्टिस एनके व्यास के सिंगल बेंच में हुई। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, मैंने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बात सुनी और रिकॉर्ड का अध्ययन किया। चूंकि राजस्व अभिलेख को पहले ही सही कर दिया गया है और प्राधिकरण द्वारा विध्वंस की कार्यवाही पहले ही निष्पादित की जा चुकी है, इसलिए इस समय अंतरिम राहत की प्रार्थना अस्वीकृत की जाती है। हालांकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि मूल भूमि मालिक द्वारा शुरू की गई कार्यवाही याचिकाकर्ता के पक्ष में तय होती है, तो प्राधिकरण याचिकाकर्ता को भूमि की प्रतिपूर्ति और उचित मुआवजा प्रदान करेगा।

राज्य शासन को नोटिस जारी कर दस्तावेज पेश करने कहा

हाई कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर विचाराधीन संपत्ति से संबंधित सभी दस्तावेजों को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 18 जून, 2026 की तिथि तय कर दी है।

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