CG NEWS: झारखंड से छत्तीसगढ़ तक फैला था नेटवर्क, प्रदेश के इस जिले में हाथी के अंगों के साथ पकड़े गए तीन तस्कर
CG NEWS:बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में वन विभाग की संयुक्त टीम ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। टीम ने रामानुजगंज के एक निजी धर्मशाला के कमरा नंबर 205 में छापेमारी कर आरोपियों के कब्जे से हाथी के तीन जबड़े बरामद किए हैं। दरअसल, वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि रामानुजगंज स्थित एक धर्मशाला में कुछ लोग वन्यजीवों के अंगों की तस्करी के उद्देश्य से रुके हुए हैं। सूचना की पुष्टि के बाद वन विभाग की संयुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए धर्मशाला के कमरे में दबिश दी। इस दौरान कमरे में मौजूद तीन लोगों से पूछताछ की गई, तलाशी लेने पर उनके पास से हाथी के तीन जबड़े मिले। वन विभाग की टीम ने मौके से वन्यजीव अंगों को जब्त कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
झारखंड से लाया गया था हाथी का जबड़ा, बेचने के फ़िराक में थे आरोपी
मिली जानकारी के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक व्यक्ति झारखंड से हाथी के जबड़े को लेकर रामानुजगंज पहुंचा था। यहां वह अन्य दो स्थानीय आरोपियों के साथ मिलकर इनकी बिक्री करने की फिराक में था। वहीं गिरफ्तार आरोपियों की पहचान झारखंड के पलामू जिले के नवाबाजार थाना क्षेत्र के ग्राम कंडा तुकबेरा निवासी संतोष कुमार विश्वकर्मा (34 वर्ष), रामानुजगंज निवासी अजय कुमार गुप्ता (49 वर्ष) और संतोष कुमार रजक (50 वर्ष) के रूप में हुई है। वन विभाग की टीम अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रहा है। अधिकारियों को आशंका है कि इस तस्करी गिरोह से जुड़े अन्य लोग भी हो सकते हैं, जिनकी पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज, आरोपियों को भेजा गया जेल
वन विभाग ने गिरफ्तार तीनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपियों पर अधिनियम की धारा 9, 39, 48(क), 50, 51 और 52 के तहत कार्रवाई की गई है। गिरफ्तारी के बाद वन विभाग की टीम ने तीनों आरोपियों को रामानुजगंज के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। वहीं वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों की तस्करी करने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। विभाग की प्राथमिकता वन्यजीव अपराधों में शामिल नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना है।
सप्ताहभर में दूसरी बड़ी कार्रवाई, पहले सूरजपुर में पकड़ी गई थी बाघ की खाल
बलरामपुर में हुई यह कार्रवाई वन विभाग की पिछले एक सप्ताह के भीतर दूसरी बड़ी सफलता मानी जा रही है। इससे पहले सूरजपुर जिले में वन विभाग और वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की संयुक्त टीम ने बाघ की खाल और पैंगोलिन के शल्क के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि वन विभाग वन्यजीव अपराधों पर निगरानी बढ़ा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सूचना तंत्र को मजबूत किया गया है और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। ज्ञात हो कि हाथी जैसे संरक्षित वन्यजीवों के अंगों की तस्करी गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है। वन विभाग का कहना है कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तस्करी नेटवर्क पर शिकंजा, जांच में जुटी वन विभाग की टीम
वन विभाग की जांच अब केवल गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों तक सीमित नहीं है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध कारोबार में और कितने लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि हाथी के जबड़े किस स्थान से प्राप्त किए गए और इनके खरीदार कौन थे। अधिकारियों के अनुसार, वन्यजीवों के अंगों की मांग के कारण तस्कर ऐसे अपराधों को अंजाम देते हैं। इसे रोकने के लिए वन विभाग स्थानीय स्तर पर मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर रहा है।

