1998 में रेप किया, 28 साल बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, पीड़िता ने कहा…

1998 में रेप किया, 28 साल बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, पीड़िता ने कहा…

बिलासपुर। 19 सितंबर 2026| छत्तीसगढ़ बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के चांदी-बेलसर निवासी 75 वर्षीय ललन प्रसाद जायसवाल को 1998 के दुष्कर्म मामले में हाई कोर्ट से जमानत नहीं मिली। जस्टिस संजय कुमार जायसवाल के सिंगल बेंच ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान पीड़िता स्वयं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से कोर्ट में उपस्थित हुई और जमानत देने पर अपनी तरफ से काई आपत्ति दर्ज नहीं कराई।

याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना कि अभियोजन के अनुसार आरोपी तकरीबन 28 वर्षों तक फरार रहा। कोर्ट ने इसी आधार पर फिलहाल जमानत देने से इनकार कर दिया।

पढ़िए क्या है मामला?

छत्तीसगढ़ सरगुजा जिले के अजाक थाने में दर्ज दुष्कर्म के अपराध से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार 3 सितंबर 1998 को पीड़िता घर पर थी। इसी दौरान ललन जायसवाल और सह-आरोपी लालजी अहिर उसके घर पहुंचे और उसके पिता के संबंध में पूछताछ की।

इसके बाद ललन जायसवाल ने पीड़िता को कमरे में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद सह-आरोपित लालजी यादव ने दुष्कर्म किया। मामले में आईपीसी की धारा 376(2)(जी), 450 तथा एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1)(12) के तहत अपराध दर्ज किया गया था।

27 साल बाद हुई गिरफ्तारी

ललन प्रसाद की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अभिनव दुबे ने कहा, एफआईआर वर्ष 1998 में दर्ज हुई थी, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी 1 जुलाई 2026 को हुई। बचाव पक्ष ने कहा कि ललन 1998 से उसी गांव में रह रहा था और इसलिए उसके 2004 से फरार रहने का अभियोजन का दावा सही नहीं है।

बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि आरोपी की उम्र 75 वर्ष है, वह 1 जुलाई 2026 से जेल में है और मुकदमे के निपटारे में समय लग सकता है। सह-आरोपी लालजी को मामले में दोषी ठहराए जाने की जानकारी भी कोर्ट को दी।

राज्य सरकार ने जमानत का इसलिए किया विरोध

राज्य सरकार की ओर से पैरवी करती हुई अधिवक्ता दीपा सिंह ने कहा कि ललन प्रसाद घटना का मुख्य आरोपी है और सह-आरोपी लालजी के साथ मिलकर अपराध करने का आरोप है। आरोपी करीब 28 वर्षों से फरार था। राज्य सरकार ने आशंका जताई कि जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी दोबारा फरार होकर न्यायिक प्रक्रिया से बच सकता है।

पीड़िता ने जमानत पर नहीं दर्ज कराई आपत्ति

सुनवाई के दौरान पीड़िता संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुई। उसने ललन प्रसाद को जमानत दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं होने की बात कही। कोर्ट ने मामले के तथ्यों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।

admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *