56 सरपंचों के इस्तीफे के बाद अंतागढ़ में उठते सवाल, रावघाट माइंस का डीएमएफ का पैसा आखिर कहां हो रहा है खर्च?…

कांकेर। अंतागढ़ क्षेत्र की जनता और आक्रोशित सरपंचों ने अब सीधे तौर पर जिला प्रशासन और नेताओं को कटघरे में खड़ा करते हुए कई तीखे सवाल दागे हैं।
लाम कन्हार ग्राम पंचायत सरपंच मंजू गावड़े ने कहा कि-सरपंचों और स्थानीय जनता का सबसे बड़ा और बुनियादी सवाल यह है कि आखिर अंतागढ़ को विकास के लिए पैसों की कमी क्यों हो रही है?
यदि राज्य सरकार के पास पैसों की कमी है, तो अंतागढ़ के रावघाट माइंस से मिलने वाला डीएफएफ का करोड़ों रुपए का राजस्व कहां खर्च किया जा रहा है? नियमतः जिस क्षेत्र से खनिज निकाला जाता है, वहां के विकास के लिए डीएफएफ का एक बड़ा हिस्सा खर्च होना चाहिए। अगर रावघाट से मिलने वाले राजस्व का सही इस्तेमाल अंतागढ़ की ग्राम पंचायतों में किया जाता, तो आज विकास कार्य ठप नहीं होते और न ही सरपंचों को यह कड़ा कदम उठाना पड़ता।
कांकेर जिले में कुल 7 विकासखंड और 3 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। आरोप है कि जिला प्रशासन पूरे जिले के विकास को दरकिनार कर, युद्ध स्तर पर केवल कांग्रेस विधायक सावित्री मंडावी के विधानसभा क्षेत्र भानुप्रतापपुर में ही डीएमएफ का पैसा पानी की तरह बहा रहा है।
कलगांव सरपंच प्रमिला नाग ने कहा कि-अंतागढ़ की उपेक्षा और भानुप्रतापपुर पर मेहरबानी को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है, जहां डीएमएफ फंड से लगातार निर्माण कार्य हो रहे हैं।
दुर्गुकोंदल भव्य एजुकेशन हब का निर्माण। भानुप्रतापपुररू 5 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से अत्याधुनिक हॉस्पिटल। कोचिंग व शिक्षा भानुप्रतापपुर में श्मावा मोदेलश् कोचिंग सेंटर, हाईटेक लाइब्रेरी सेंटर। खेल और पुनर्वासरू स्पोर्ट्स एकेडमी और नक्सल पुनर्वास केंद्र की स्थापना। पर्यटन विकास पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पिच्छेकट्टा नवका विहार का निर्माण। अन्य क्षेत्रों में लाइब्रेरी कोरर और चारामा में चमचमाती लाइब्रेरी। भवन निर्माण भानुप्रतापपुर में 1 करोड़ रुपए की लागत से नया कॉलेज भवन और 20 लाख रुपए की लागत से भवन।
अंतागढ़ में बड़ी लाइब्रेरी पिछले कई महीनों से शुभारम्भ के इंतजार में ,जिला प्रशासन इस और ध्यान नहीं दे रहा है। जनता का आरोप है, इन तमाम विकास कार्यों को देखकर ऐसा लगता है जैसे जिला प्रशासन का पूरा ध्यान सिर्फ सावित्री मंडावी के क्षेत्र को चमकाने में है, जबकि बाकी क्षेत्र अंधेरे में है।
गुप्तेश उसेंडी,जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि-बीजेपी के दिग्गज मौनरू श्रायपुरिया विधायकश् और श्दौरेबाज सांसदश् पर उठे सवाल
इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा किरकिरी अंतागढ़ के स्थानीय भाजपा दिग्गजों की हो रही है। अंतागढ़ खुद कांकेर सांसद भोजराज नाग और स्थानीय विधायक विक्रम उसेंडी का गृह निवास स्थान है। इसके बावजूद पूरे क्षेत्र में एक भी छोटी सी उपलब्धि गिनाने लायक नहीं है। जनता अब अपने ही नेताओं को लेकर सोशल मीडिया और चौपालों पर घेर रही है।
सांसद भोजराज नाग रोजाना लोकसभा के 8 विधानसभा क्षेत्रों के दौरे पर रहते हैं। आए दिन वे किसी न किसी अधिकारी पर गरजते-बरसते और क्लास लेते नजर आते हैं। लेकिन अंतागढ़ की जनता पूछ रही है… सांसद जी, अंतागढ़ के विकास और यहां के फंड के लिए आप कब आक्रामक होंगे? जिले के लापरवाह अधिकारियों पर आपकी गाज कब गिरेगी?
स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब यही विक्रम उसेंडी और भोजराज नाग जहां भी भीड़ देखते थे, वहां आंदोलन में शामिल हो जाते थे और अंतागढ़ के विकास को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करते थे। लेकिन आज जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार है और दोनों नेता सत्ता के शीर्ष पर आसीन हैं, तब वे अंतागढ़ के हक की लड़ाई में भीगी बिल्ली बने बैठे हैं।
जनता के निशाने पर सिर्फ भाजपा नहीं, बल्कि पूर्व कांग्रेस विधायक अनूप नाग भी हैं। लोगों का कहना है कि जब अनूप नाग खुद सत्ता में थे और लोग अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते थे, तब वे मुंह मोड़कर निकल जाते थे। लेकिन आज जब वे सत्ता से बाहर हैं, तो राजनीति चमकाने के लिए भीड़ देखकर खुद-ब-खुद सरपंचों के आंदोलन में शामिल होने पहुंच जा रहे हैं।

