धर्मांतरण पर अंकुश लगाने छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा कदम, मील का पत्थर साबित होगा धर्म स्वातंत्र्य कानून

धर्मांतरण पर अंकुश लगाने छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा कदम, मील का पत्थर साबित होगा धर्म स्वातंत्र्य कानून

इमेज सोर्स- NPG News

रायपुर।25 अप्रैल 2026| एक अहम सवाल ये, छत्तीसगढ़ सरकार को राज्य में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 को सख्ती के साथ क्यों लाना पड़ा। अतीत के पन्नों को पलटते ही टिस और कड़वाहट नजर आती है। ईसाई मिशनरीज, आदिवासियों के अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के बीच सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य के बहाने घुसपैठ बनाते गए और अपने मकसद में कामयाब भी होते गए। बस्तर में हाल के दिनों में जो भयावह दृश्य नजर आया, यह मिशनरीज के इसी तरह के कामकाज का दुष्परिणाम है। बस्तर के दूरस्थ वनांचलों में आदिवासियों और ईसाई धर्म अपना चुके आदिवासियों के बीच छिड़ी संघर्ष इसका नतीजा है। इन्हीं सब कारणों के चलते राज्य सरकार को धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 को धरातल पर उतारना पड़ा। कड़े नियम और पाबंदी लगानी पड़ी।

बस्तर में हालात बेहद बिगड़े, सामाजिक ताना-बना छिन्न-भिन्न हो गया

बस्तर शुरू से ही ईसाई मिशनरियों के टारगेट पर रहा। अशिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और नक्सल दखल ने मिशनरियों ने सकारात्मक माहौल बनाया। इन्हीं सब बातों और परिस्थितियों का लाभ उठाते हुए मिशनरियों ने धर्मांतरण का ऐसा जाल और कुचक्र फैलाया कि बस्तर में सामाजिक सौहार्द्र तार-तार होने लगा। धर्मांतरित आदिवासी और आदिवासियों के बीच खूनी संघर्ष भी छत्तीसगढ़ ने करीब से देखा है। बस्तर में हालात ऐसे बिगड़े, पुलिस के अधिकारी व जवानों के लहू भी बहे। एसपी पर जानलेवा हमला हुआ। श्मशान घाट को लेकर विवाद की स्थिति बनी। बात सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा। बस्तर के आदिवासियों के बीच संघर्ष क्यों छिड़ा, पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही सामाजिक सौहार्द्र और सामंजस्य क्यों बिखर गया। इन सबके पीछे ईसाई मिशनरियों की घुसपैठ और धर्मांतरण का कुचक्र को माना जा रहा है। सामाजिक ताना-बाना को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार को विवश होकर कड़े कदम उठाने पड़े। विवशता ने धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 को सामने लाया। कड़े कानून और नियमों के बल पर सामाजिक ताना-बाना काे बनाए रखने सरकार को कड़े निर्णय लेने पड़े।

वनांचल से अब मैदानी इलाके में धर्मांतरण का कुचक्र

एक दौर था मिशनरीज वनांचल में जोर लगा रहे थे, जोर ऐसा, डेमोग्रॉफी बदलने की साजिक और कुचक्र चलाया जा रहा था। बस्तर से लेकर सरगुजा तक जाल फैला लिया था। वनांचल से ये अब मैदानी इलाकों में पैर पसरना शुरू कर दिया है। दुसाहस ऐसा शहरी इलाकों में घनी बस्ती के बीच प्रार्थना सभा की आड़ में काम को अंजाम दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ के मैदानी इलाकों में जिस तरह ये पांव पसार रहे हैं, इस पर सख्ती के साथ रोक लगाने के लिए कानून अब जरुरी हो गया है।

आपरेशन घर वापसी

ईसाई मिशनरियों के कुचक्र को रोकने के लिए भाजपा नेता स्व दिलीप सिंह जूदेव ने आपरेश घर वापसी अभियान चलाया। उनके अभियान का ही प्रतिफल कहें, प्रलोभन और दबाव में जिन लोगों ने धर्म परिवर्तन कर लिया था, उन्होंनेे अपने मूल धर्म में वापसी की। स्व जूदेव का प्रभाव ही कहेंगे, वापस मूल धर्म में वापस आने वालों को समाज के लोगों ने सहजता के साथ स्वीकार किया। स्व जूदेव मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बराबर रूप से सक्रिय रहे।

विधानसभा में बिल पारित होने के बाद सीएम विष्णुदेव साय ने कहा, समाज में संतुलन बनाए रखना जरुरी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित किए जाने को राज्य की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संतुलन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा, पिछले कुछ समय से समाज के कमजोर वर्गों को निशाना बनाकर प्रलोभन, दबाव अथवा भ्रम फैलाकर धर्मांतरण कराने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि नए विधेयक के लागू होने से ऐसी प्रवृत्तियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा और समाज में संतुलन तथा विश्वास कायम रहेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब धर्म परिवर्तन से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया को विधिसम्मत और पारदर्शी बनाना अनिवार्य होगा। इसके तहत संबंधित पक्षों को पूर्व में ही प्राधिकृत अधिकारी को सूचित करना होगा, जिसके बाद आवेदन की सार्वजनिक सूचना जारी कर निर्धारित समयसीमा में उसका परीक्षण किया जाएगा। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि धर्मांतरण किसी भी प्रकार के प्रलोभन, दबाव या अनुचित प्रभाव के बिना ही किया जाए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पूर्व में लागू कानून अपेक्षाकृत कम प्रभावी था, जिसके कारण अवैध गतिविधियों को रोकने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। नए प्रावधानों में कठोर दंडात्मक व्यवस्थाएं जोड़ी गई हैं, जिससे ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई संभव होगी।

उन्होंने कहा, अनियंत्रित धर्मांतरण से कई बार सामाजिक असंतुलन और अशांति की स्थिति उत्पन्न होती है। इस विधेयक के माध्यम से राज्य में शांति, सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा को और सुदृढ़ किया जाएगा।

सीएम ने स्व जूदेव को किया याद

मुख्यमंत्री साय ने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, उन्होंने धर्मांतरण के विरुद्ध जनजागरण का जो अभियान चलाया, वह आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा, समाज की जागरूकता और सहभागिता से ही इस दिशा में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन संभव है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया, यह विधेयक प्रदेश में पारदर्शिता, न्याय और सामाजिक एकता को मजबूती देगा तथा छत्तीसगढ़ को एक सशक्त, संतुलित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य के रूप में स्थापित करेगा।

विधेयक, छत्तीसगढ़ में लागू 1968 के क़ानून की जगह लेगा

सरकार के मुताबिक, “यह विधेयक छत्तीसगढ़ में लागू 1968 के क़ानून की जगह लेगा, जिसे राज्य गठन के बाद मध्य प्रदेश से अपनाया गया था। नए क़ानून में धर्मांतरण के दायरे को विस्तार देते हुए डिजिटल माध्यम और आर्थिक प्रलोभनों को भी शामिल किया गया है।

विधेयक के मुताबिक़ छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026 का उद्देश्य बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी के जरिए कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकना है। प्रस्तावित प्रावधानों के मुताबिक़, धर्म परिवर्तन से पहले संबंधित व्यक्ति और प्रक्रिया से जुड़े धार्मिक प्रतिनिधि को प्रशासन को पूर्व सूचना देनी होगी, जिसके बाद इसे सार्वजनिक किया जाएगा और 30 दिन की अवधि में आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी।

नए क़ानून के तहत ना सिर्फ़ धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को बल्कि धर्म परिवर्तन कराने वाले पुजारी, मौलवी या अन्य धार्मिक व्यक्ति को भी प्रशासनिक अधिकारी को इसकी सूचना देनी होगी।

इस क़ानून के तहत दर्ज़ किए जाने वाले सभी अपराध ग़ैर-जमानती होंगे. साथ ही, एक अहम प्रावधान यह है कि धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति पर यह साबित करने की ज़िम्मेदारी होगी कि धर्म परिवर्तन में किसी तरह का दबाव, प्रलोभन या धोखाधड़ी शामिल नहीं थी।

विधेयक में सज़ा के प्रावधान भी कड़े किए गए हैं. अवैध धर्मांतरण के मामलों में सात से 10 साल तक की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है। महिलाओं, नाबालिगों और अनुसूचित जाति, जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों से जुड़े मामलों में सज़ा 10 से 20 साल तक हो सकती है।

भुगतनी पड़ेगी आजीवन कारावास की सजा

सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सज़ा और भी सख़्त है, जिसमें आजीवन कारावास तक का प्रावधान किया गया है.

सरकार का कहना है कि यह क़ानून जबरन या धोखे से होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया गया है. वहीं, विपक्ष का तर्क है कि ऐसे क़ानून व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धर्म चुनने के अधिकार को प्रभावित कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ में लगभग 900 चर्च

छत्तीसगढ़ में तकरीबन 727 चर्च हैं। हालांकि ग्रामीण अंचलों में छोटे-छोटे चर्चों को मिलाकर इनकी संख्या 900 के पार है। इनमें सबसे पहला चर्च विश्रामपुर में है, जो सिटी ऑफ रेस्ट के नाम से जाना जाता है, जिसे 1868 में बनाया गया था।

वहीं जशपुर के कुनकुरी में एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रोमन कैथोलिक कैथेड्रल चर्च है, जिसे 1979 में स्थापित किया गया था। यहां प्रार्थना के लिए कई राज्यों से मसीह समाज के लोग आते हैं। साथ ही अलग-अलग समय धर्म प्रचार के लिए कई कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

जानिए क्या है छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026

  • इस कानून के अनुसार बल, प्रलोभन, दबाव, झूठी जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना प्रतिबंधित होगा।
  • कोई व्यक्ति यदि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले से सूचना देनी होगी।
  • प्रस्तावित धर्म परिवर्तन की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा।
  • विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
  • पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा, यह भी विधेयक में स्पष्ट किया गया है।
  • अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है।
  • यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए जुर्माना हो सकती है।
  • सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
  • विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे तथा मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी।

2021 से अब तक जिलों में हिंदू संगठन-मसीही समाज के बीच टकराव

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