CG: सियासी विश्लेषण: कांग्रेस के गढ़ में भाजपा का आदिवासी कार्ड: नितिन नबीन के धर्मजयगढ़ आने के क्या राजनीतिक मायने?

रायपुर। 07 नवंबर 2026| रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र और विशेष रूप से धर्मजयगढ़ को इस पूरे अंचल की राजनीतिक धुरी माना जाता है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष का सीधे कांग्रेस के अभेद्य माने जाने वाले गढ़ में कदम रखना राज्य के सियासी समीकरणों को नया मोड़ दे रहा है।
कांग्रेस के अभेद्य दुर्ग में पैठ की आक्रामक रणनीति
छत्तीसगढ़ की विधानसभा राजनीति के संदर्भ में धर्मजयगढ़ (अजजा आरक्षित) सीट लंबे समय से कांग्रेस का मजबूत किला रही है। साल 2023 के विधानसभा चुनावों में जब पूरे प्रदेश में भाजपा की बयार बह रही थी, तब भी इस सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता लालजीत सिंह राठिया ने अपने गढ़ को बचाते हुए शानदार जीत दर्ज की थी। लगातार तीन चुनावों से मिल रही हार के बावजूद भाजपा ने इस क्षेत्र से अपनी नजरें नहीं हटाई हैं। नितिन नबीन का स्वयं यहां पहुंचकर हुंकार भरना यह साफ संदेश देता है कि भाजपा अब उन सीटों पर सीधे प्रहार करने की नीति पर काम कर रही है, जहां विपक्ष पारंपरिक रूप से हावी रहा है। पार्टी इस आक्रामक रुख के जरिए कांग्रेस के सबसे मजबूत आधार को हिलाने की तैयारी में है।
‘जनजातीय गौरव’ के बहाने मुख्यमंत्री के होम ग्राउंड पर मुहर
15 नवंबर का दिन देश भर में ‘भगवान बिरसा मुंडा की जयंती’ यानी ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर धर्मजयगढ़ जैसे घने आदिवासी बाहुल्य अंचल को चुनकर भाजपा मध्य और उत्तरी छत्तीसगढ़ के विशाल आदिवासी वोट बैंक को अपने पक्ष में स्थायी रूप से लामबंद रखना चाहती है। इसके साथ ही, रायगढ़ जिला और उससे सटा सरगुजा संभाग स्वयं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का गृह क्षेत्र और राजनीतिक कर्मभूमि रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का मुख्यमंत्री के इस प्रभाव वाले क्षेत्र में आना साय सरकार के कामकाज, ‘मोदी की गारंटी’ के क्रियान्वयन और उनके प्रशासनिक नेतृत्व पर केंद्रीय संगठन की मजबूत मुहर लगाने जैसा है।
निकाय व पंचायत चुनाव से पहले कैडर में नए उत्साह का संचार
राज्य में जल्द ही कुछ नगरीय निकायों के चुनाव होने वाले हैं। ऐसे नाजुक वक्त में पार्टी के शीर्ष राष्ट्रीय नेता का सीधे ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के बीच पहुंचना स्थानीय कार्यकर्ताओं के लिए टॉनिक का काम करेगा। यह दौरा कार्यकर्ताओं तक यह कड़ा संदेश पहुँचाएगा कि राष्ट्रीय नेतृत्व केवल बड़े शहरों या चुनावी सभाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर पसीना बहाने वाले अंतिम कार्यकर्ता पर भी उसकी पूरी नज़र है।
रायगढ़ लोकसभा व विधानसभा सीटों का सियासी गणित
यदि रायगढ़ संसदीय क्षेत्र (एसटी आरक्षित) के चुनावी समीकरणों पर नज़र डालें तो यहाँ कुल 8 विधानसभा सीटें आती हैं, जो रायगढ़, जशपुर और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों में फैली हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के राधेश्याम राठिया ने यहां से ऐतिहासिक जीत दर्ज कर इस सीट पर पार्टी के दबदबे को कायम रखा था। स्वयं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इस लोकसभा सीट से चार बार सांसद रह चुके हैं।
हालांकि, विधानसभा वार स्थिति में मिला-जुला समीकरण देखने को मिलता है-
धर्मजयगढ़ (एसटी): कांग्रेस के लालजीत सिंह राठिया का कब्ज़ा। भाजपा यहाँ जमीनी कैडर को मजबूत कर आगामी चुनावों में वापसी की पटकथा लिख रही है।
खरसिया (जनरल): कांग्रेस के उमेश पटेल का गढ़। पटेल परिवार के पारंपरिक प्रभाव वाली इस सीट पर भी भाजपा अपनी विशेष रणनीति केंद्रित कर रही है। अभी यहां से उमेश पटेल विधायक हैं।
रायगढ़ (जनरल): प्रदेश के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी का क्षेत्र। यह शहरी सीट भाजपा का अभेद्य दुर्ग बन चुकी है।
लैलूंगा (एसटी): 2023 में कांग्रेस की विद्यावती सिदार ने यहां से चुनाव जीतकर भाजपा की सुनीति राठिया को हरा दिया था। वर्ष 2018 में भी इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा था।
इसके अलावा, इसी संसदीय क्षेत्र में आने वाली जशपुर जिले की तीनों विधानसभा सीटों जशपुर, कुनकुरी (जहां से स्वयं सीएम साय विधायक हैं) और पत्थलगांव पर भाजपा का एकतरफा कब्जा है।
इसके अलावा, इसी संसदीय क्षेत्र में आने वाली जशपुर जिले की तीनों विधानसभा सीटों जशपुर, कुनकुरी (जहां से स्वयं सीएम साय विधायक हैं) और पत्थलगांव पर भाजपा का एकतरफा कब्जा है।
कमजोर कडि़यों को कसने का राष्ट्रीय संदेश
नितिन नबीन का यह प्रवास कुल मिलाकर भाजपा की ‘कमजोर कडि़यों को दुरुस्त करने’ की सुविचारित कार्ययोजना का अहम हिस्सा है। जहां एक तरफ पार्टी रायगढ़, कुनकुरी और लैलूंगा जैसी अपनी जीती हुई सीटों पर अपनी पकड़ को और पुख्ता रखना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ धर्मजयगढ़ और खरसिया जैसी कठिन चुनौतियों वाले इलाकों में अपनी सीधी मौजूदगी दर्ज करा रही है। शीर्ष नेतृत्व का यह रुख यह साफ करता है कि आने वाले नगरीय निकाय और स्थानीय चुनावों में भाजपा कांग्रेस को उसके अपने घर में घेरकर पूरी ताकत से चुनाव लड़ने के मूड में है।

