CG की सरकारी नौकरियों में दिव्यांग आरक्षण की व्यवस्था को लेकर हाई कोर्ट में याचिका, राज्य सरकार व CGPSC से मांगा जवाब

बिलासपुर। 12 अगस्त 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट की जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच ने एक याचिका की सुनवाई के बाद राज्य शासन और छत्तीसगढ राज्य लोक सेवा आयोग CGPSC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके लिए चार सपताह की मोहलत दी है।
भिलाई निवासी विवेक सिंह ने शासकीय नियुक्तियों में अंधत्व और कम दृष्टि वाले व्यक्तियों को पृथक से आरक्षण नहीं दिए जाने को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। दायर याचिका में आरक्षण की मांग की है।
पढ़िए प्रावधान में क्या है व्यवस्था?
दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम 2016″ की धारा 33 और 34 के तहत कुल शासकीय नियुक्तियों में 4 प्रतिशत हर कैडर में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए पद आरक्षित करने का प्रावधान है। अधिनियम के अनुसार आरक्षित 4 प्रतिशत नियुक्तियों को प्रत्येक तरह के दिव्यांग व्यक्तियों में बांटा जाना है। प्रावधान के धारा 34 के तहत एक प्रतिशत पद अंधत्व या कम दृष्टि वाले दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुरक्षित है।
पढ़िए क्या है मामला?
याचिकाकर्ता भिलाई निवासी विवेक सिंह “स्टारगार्डट” नामक बीमारी से ग्रसित हैं और जिसके कारण उन्हें 90% तक कम दृष्टि दिव्यांगता का शिकार होना पड़ा है। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में छत्तीसगढ़ पीएससी के कई विज्ञापनों को बतौर सबूत शामिल किया है, जिसमें दिव्यांग आरक्षित पदों की अलग-अलग श्रेणी के बजाय एक ही श्रेणी में रख दिया गया है। उदाहरण के रूप में किसी पद के लिए अगर दो पद दिव्यांग आरक्षित हैं तो उसे हाथ से दिव्यांग, पैर से दिव्यांग, अंधत्व या कम दृष्टि दिव्यांग और श्रवण दिव्यांग सभी को एक साथ रखा गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि अगर किसी नौकरी के लिए हाथ से दिव्यांग या पैर से दिव्यांग व्यक्ति के साथ अंधत्व वाले या कम दृष्टि वाले दिव्यांग को मुकाबला करना होगा तो नि:संदेह हाथ से दिव्यांग या पैर से दिव्यांग व्यक्ति उससे बेहतर परफॉर्म करेगा और वह नौकरी उसे मिल जाएगी। याचिकाकर्ता ने कहा कि ऐसा किया जाना “दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम” की धारा 34 का खुला उल्लंघन है जो 1 प्रतिशत पद विशेष रूप से अंधत्व या कम दृष्टि दिव्यांग के लिए आरक्षित करने का प्रावधान करती है।
अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने ये कहा
याचिका की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कहा, केवल छत्तीसगढ़ पीएससी CGPSC या छत्तीसगढ़ सरकार में ऐसा हो रहा है। मध्य प्रदेश, उड़ीसा यहां तक की केंद्र सरकार की यूपीएससी की परीक्षाओं में अंधत्व और कम दृष्टि वाले दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अलग से पदों का आरक्षण किया जा रहा है।
राज्य सरकार, CGPSC के अधिवक्ताओं ने जताई आपत्ति, अधिवक्ता श्रीवास्तव ने ये दिया जवाब
राज्य शासन की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद ददरिया और छत्तीसगढ़ पीएससी की ओर से अधिवक्ता सुदीप अग्रवाल ने याचिका की ग्राह्यता पर आपत्ति उठाई। दोनों अधिवक्ताओं ने कहा कि याचिकाकर्ता किसी परीक्षा में नहीं बैठ रहा है और उसके द्वारा मांगा गया आदेश जनहित याचिका के जैसा है, इसलिए यह याचिका चलने योग्य नहीं है। जवाब में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कहा, पूर्व में जिन परीक्षाओं में छत्तीसगढ़ में ऐसा नहीं हुआ है और जिन पदों की हानि हो चुकी है, उस हानि से याचिकाकर्ता भी पीड़ित है इसलिए याचिका चलने योग्य है। सुनवाई के बाद जस्टिस एके प्रसाद ने ग्राहता के प्रश्न को खुला रखते हुए राज्य शासन और सीजी पीएससी को याचिका का जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने चार सप्ताह बाद की तिथि तय कर दी है।

