CG High Court News: हाई कोर्ट बोला: पति के अवैध संबंधों और लगातार दी जा रही प्रताड़ना के कारण पत्नी के पास मौत के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था…

बिलासपुर। 27 सितंबर 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस एनके व्यास की सिंगल बेंच ने डॉक्टर पति को, पत्नी को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने कहा, आरोपी पति के अवैध संबंधों और लगातार दी जा रही शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना के कारण पत्नी के पास मौत के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। कोर्ट ने सजा सुनाने के लिए 26 अक्टूबर की तिथि तय कर दी है।
हाई कोर्ट ने सजा तय करने के लिए आरोपी डॉक्टर और उसके अधिवक्ता को 26 अक्टूबर को तलब किया है। बता दें कि बिलासपुर की निचली अदालत ने आईपीसी की धारा 498-ए के तहत आरोपी डॉक्टर को 3 साल की सजा सुनाई थी, कोर्ट ने आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के आरोप से बरी कर दिया था।
मृतका के भाई ने हाई कोर्ट में दायर की थी अपील
निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए मृतका के भाई ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। आरोपी डॉक्टर ने भी निचली अदालत द्वारा दी गई सजा के खिलाफ छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में अपील पेश की थी।
जानिए क्या है मामला?
छत्तीसगढ़ बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में रहने वाली रश्मि प्रकाश ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतका के भाई आशीष नाथ ने सिविल लाइन थाने में शिकायत की थी, आरोप लगाया गया था, पति डॉ. संजय प्रकाश के हिंसा और उकसाने से उनकी बहन ने खुदकुशी की। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर की अदालत ने 28 जून 2016 को दिए गए फैसले में आरोपी डॉक्टर को धारा 498-ए (पति या रिश्तेदार द्वारा क्रूरता) के तहत 3 साल की सजा और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी थी। आत्महत्या के आरोप से बरी कर दिया था।
बच्चों ने बताया-पिता की करतूत, तलाक देने की दी थी धमकी
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मृतका के बेटे रोहित और बेटी तनिष्का समेत माता-पिता के बयान को बारीकी से परखा। बच्चों ने बताया कि उनके पिता डॉ. संजय प्रकाश का, क्लीनिक में काम करने वाली एक नर्स के साथ अवैध संबंध थे। मां ने इसका विरोध किया, तो पिता ने उन्हें पहले चाबी फेंककर मारा, इसके बाद बेरहमी से पिटाई की। यह भी खुलासा किया कि मां को पानी में घोलकर भारी मात्रा में नींद की गोलियां दे दी थीं, जिससे उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई थी। घटना के ठीक एक दिन पहले भी मां के साथ मारपीट की थी। धमकी दी थी कि वह मां को तलाक देकर नर्स से शादी करेगा।
पढ़िए हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा है?
याचिका की सुनवाई जस्टिस एनके व्यास के सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने फैसले में कहा है, ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयानों और सबूतों को टुकड़ों में बांटकर गलती की, जबकि सभी सबूत सामूहिक रूप से साबित करते हैं कि पति के कृत्यों ने ही पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर किया। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति लगातार ऐसा माहौल बना दे कि पत्नी के पास आत्मघाती कदम उठाने के अलावा कोई रास्ता न बचे, तो वह धारा 306 यानी आत्महत्या के लिए उकसाने के दायरे में आता है। हाई कोर्ट ने सबूतों के आधार पर आरोपी डॉक्टर को, पत्नी को खुदकुशी के लिए उकसाने का दोषी माना है।

