Bilaspur High Court News: हाई कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा: 3 नाबालिग बच्चों की मां को 250 किमी सफर के लिए मजबूर करना गलत, मामले को किया ट्रांसफर

बिलासपुर। 28 जून 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई काेर्ट के जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने वैवाहिक मुकदमों के ट्रांसफर को लेकर कहा है, बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रही महिला की शारीरिक और आर्थिक सहूलियत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हाई कोर्ट ने कवर्धा (कबीरधाम) में रह रही एक महिला की याचिका को स्वीकार करते हुए दुर्ग के फैमिली कोर्ट में लंबित तलाक के मामले को कवर्धा स्थानांतरित करने का आदेश दिया है।
पढ़िए क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता रेखा उर्फ सीमा पात्रे का विवाह 20 जून 2008 को दुर्ग निवासी रामचंद पात्रे वाहन ,चालक के साथ हुआ था। वैवाहिक जीवन के दौरान उनके चार बच्चे हुए। हालांकि, कुछ समय बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया और पति ने पत्नी को घर से निकाल दिया। तब से महिला कवर्धा जिले के पंडरिया तहसील स्थित अपने मायके में रह रही है। इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट, दुर्ग में तलाक के लिए एक सिविल सूट दायर किया था, जिसे पत्नी ने कवर्धा ट्रांसफर कराने के लिएछत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में स्थानांतरण याचिका दायर की थी।
स्थानांतरण याचिका की सुनवाई जस्टिस एनके चंद्रवंशी के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शिवम अग्रवाल ने तर्क पेश करते हुए कहा, कवर्धा से दुर्ग आकर केस की पैरवी करने के लिए महिला को आने-जाने में तकरीबन 250 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। महिला के चार बच्चे हैं, जिनमें से तीन नाबालिग हैं। बच्चों को अकेले छोड़कर या साथ लेकर इतनी लंबी दूरी बार-बार तय करना और साथ में किसी मददगार का न होना उसके लिए बेहद मुश्किल है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता पत्नी ने कवर्धा कोर्ट में पहले से ही गुजारा भत्ता का केस दायर कर रखा है।
पति की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता धीरेन्द्र पांडेय ने ट्रांसफर का विरोध करते हुए कहा कि दोनों शहरों के बीच सीधी बस और ट्रेन कनेक्टिविटी है। उन्होंने दलील दी कि पत्नी खुद घर छोड़कर गई है और उसने झूठे आरोप लगाए हैं। साथ ही पति एक गरीब कंडक्टर है, इसलिए याचिका खारिज की जाए।
कवर्धा फैमिली कोर्ट ट्रांसफर होगा रिकॉर्ड
याचिका की सुनवाई जस्टिस एनके चंद्रवंशी के सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया, याचिकाकर्ता महिला के सिर पर तीन नाबालिग बच्चों के परवरिश की जिम्मेदारी है। बिना किसी साथी के उसे दुर्ग आने-जाने के लिए मजबूर करना भारी शारीरिक और आर्थिक उत्पीड़न होगा, विशेषकर तब जब कवर्धा कोर्ट में भरण-पोषण का मामला पहले से चल रहा है। कोर्ट ने पत्नी की याचिका मंजूर करते हुए, दुर्ग फैमिली कोर्ट को 15 दिनों के भीतर इस केस का रिकॉर्ड फैमिली कोर्ट, कवर्धा भेजने का निर्देश दिया।
फैमिली कोर्ट को 4 महीने में पूरा करना होगा ट्रायल, पति को VC के जरिए उपस्थिति की मिली छूट
हाई कोर्ट ने कवर्धा फैमिली कोर्ट को रिकॉर्ड प्राप्त होने के 4 महीने के भीतर इस केस की सुनवाई तेजी से पूरी करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, वाहन चालक पति को राहत देते हुए कोर्ट ने यह छूट भी दी है कि जिन तिथियों में उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति बहुत जरूरी न हो, उन तारीखों पर वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग VC के जरिए भी कोर्ट की कार्यवाही में शामिल हो सकता है।

