Bilaspur High Court News: हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: वक्फ प्रापर्टी से जुड़े विवादों का निपटारा 'वक्फ ट्रिब्यूनल' करेगा

Bilaspur High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने वक्फ संपत्ति के प्रबंधन और उस पर अवैध निर्माण से संबंधित एक याचिका को वक्फ ट्रिब्यूनल के क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए निस्तारित कर दिया है। जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच ने कहा है, वक्फ अधिनियम के तहत गठित ट्रिब्यूनल ही ऐसे मामलों के लिए सक्षम और विशेष मंच है।
पढ़िए क्या है मामला?
याचिकाकर्ता मोहम्मद अजमल खान ने कवर्धा स्थित ‘जामा मस्जिद मुस्लिम ट्रस्ट’ की वक्फ संपत्ति पर मुतवल्ली (प्रबंधक) द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है, वक्फ बोर्ड के सीईओ द्वारा निर्माण रोकने के आदेश के बावजूद कलेक्टर ने कोई कार्रवाई नहीं की। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि उन्होंने पहले ही वक्फ ट्रिब्यूनल में धारा 83(2) के तहत आवेदन दायर किया है, लेकिन वहां कोरम न होने के कारण सुनवाई नहीं हो पा रही थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और वक्फ बोर्ड के वकीलों ने तर्क दिया कि वक्फ अधिनियम के तहत ऐसे विवादों के लिए ‘वक्फ ट्रिब्यूनल’ एक प्रभावी और वैधानिक विकल्प है। ट्रिब्यूनल वर्तमान में पूरी तरह कार्यशील है और वहां मामला पहले से ही लंबित है, इसलिए हाईकोर्ट को समानांतर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।
हाई कोर्ट ने दो महीने के भीतर निर्णय लेने ट्रिब्यूनल को दिया आदेश
याचिका की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने अपने फैसले में याचिकाकर्ता को निर्देशित करते हुए कहा है, वे अपने लंबित मामले को ट्रिब्यूनल के समक्ष ही मजबूती से रखें। कोर्ट ने संबंधित वक्फ ट्रिब्यूनल को आदेश दिया है, यदि आवेदन अभी तक अनिर्णित है, तो उसे दो महीने के भीतर कानून के अनुसार सुना जाए और निर्णय लिया जाए। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि इस आदेश का अर्थ मेरिट पर कोई राय देना नहीं है, सभी प्रश्न ट्रिब्यूनल के समक्ष खुले रहेंगे।

