Bilaspur High Court News: संविदा कर्मचारियों का स्थानांतरण आदेश, हाई कोर्ट ने दखल से किया इंकार, पढ़िए क्या है मामला?

बिलासपुर। 13 जून 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने संविदा आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के स्थानांतरण में हस्तक्षेप करने के राज्य सरकार के फैसले में हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने ने अपने फैसले में कहा है, किसी कर्मचारी का तबादला किस स्थान पर किया जाना चाहिए, यह पूरी तरह से संबंधित सक्षम प्राधिकारी का विशेषाधिकार है। जब तक आदेश में कोई दुर्भावना या वैधानिक नियमों का उल्लंघन न दिखे, तब तक अदालतें इसमें दखल नहीं दे सकती। संविदा स्वास्थ्य कर्मी अखिलेश कौशिक की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल ने जरुरी टिप्पणी के साथ यचिका को खारिज कर दिया है।
पढ़िए क्या है मामला?
छत्तीसगढ़ मुंगेली निवासी याचिकाकर्ता अखिलेश कौशिक, स्वास्थ्य विभाग में संविदा आधार पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विभाग द्वारा 6 मई 2026 को एक आदेश जारी कर अखिलेख का स्थानांतरण एक जिले से दूसरे जिले में कर दिया गया। राज्य शासन के आदेश को चुनौती देते हुए संविदा कर्मचारी अखिलेश कौशिक ने अधिवक्ता ईश्वर प्रसाद राठौर के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता वायएस ठाकुर व पैनल लॉयर साक्षी वाजपेयी ने पैरवी करते हुए स्वास्थ्य विभाग के स्थानांतरण आदेश को सही ठहराया।
हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका और ये कहा
याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई। काेर्ट मे इसी तरह की एक याचिका में छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट व अन्य मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा है, शासकीय सेवाओं में ट्रांसफर और पोस्टिंग नौकरी का एक स्वाभाविक हिस्सा है। कोर्ट ने कहा, संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट को स्थानांतरण के मामलों में हस्तक्षेप करने का बहुत ही सीमित अधिकार है, खासकर तब जब निर्णय किसी विशेषज्ञ वैधानिक संस्था द्वारा लिया गया हो। कोर्ट ने राज्य शासन के स्थानांतरण आदेश में किसी प्रकार की अवैधता या विधिक त्रुटि ना होने की बात कहते हुए रिट याचिका को खारिज कर दिया है।

