CG News: चौंकाने वाला फैसला! सड़कों पर सायरन बजाती दौड़ेंगी 'बाइक्स', बस्तर के बीहड़ों व सरगुजा के पहाड़ों को सौगात

CG News: चौंकाने वाला फैसला! सड़कों पर सायरन बजाती दौड़ेंगी 'बाइक्स', बस्तर के बीहड़ों व सरगुजा के पहाड़ों को सौगात

CG News: रायपुर। अगर आने वाले दिनों में आपको छत्तीसगढ़ के घने जंगलों, उबड़-खाबड़ पहाड़ी पगडंडियों या रायपुर-बिलासपुर की संकरी गलियों में सायरन बजाती और मरीजों को ले जाती, तेज रफ्तार ‘बाइक एम्बुलेंस’ दिखाई दें, तो हैरान मत होइए! केंद्र सरकार देश की आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं में एक युगांतकारी बदलाव करने जा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ‘केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989’ में बड़ा संशोधन प्रस्तावित करते हुए दोपहिया सड़क एम्बुलेंस के निर्माण और संचालन को कानूनी दर्जा देने के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। छत्तीसगढ़ जैसे विशाल जनजातीय और कठिन भौगोलिक परिवेश वाले राज्य के लिए यह फैसला किसी वरदान से कम नहीं माना जा रहा है।

गेम-चेंजर साबित होंगी दोपहिया एम्बुलेंस

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के अबुझमाड़, बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे बीहड़ इलाकों के साथ-साथ उत्तर में सरगुजा, बलरामपुर, कोरिया और जशपुर के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में जहां चार पहिया एम्बुलेंस का पहुंचना लगभग असंभव होता है, वहां यह दोपहिया एम्बुलेंस गेम-चेंजर साबित होंगी। अक्सर देखा गया है कि इन क्षेत्रों में सड़कें न होने या बेहद संकरी होने के कारण चार पहिया वाहन समय पर नहीं पहुंच पाते और मरीज को खाट या कांवड़ पर लादकर किलोमीटरों पैदल चलना पड़ता है। कई बार ‘गोल्डन ऑवर’ (आपातकाल के शुरुआती अनमोल घंटे) में इलाज न मिलने से मरीजों की सांसें टूट जाती हैं। नई व्यवस्था लागू होने से एम्बुलेंस सीधे मरीज के दरवाजे या जंगल के मुहाने तक पहुंचेगी, जिससे समय पर प्राथमिक उपचार देकर अनगिनत जानें बचाई जा सकेंगी।

वर्तमान स्थिति यह है कि देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी दोपहिया एम्बुलेंस को लेकर कोई अलग और वैधानिक श्रेणी तय नहीं थी। इसके चलते इनके निर्माण, सुरक्षा मापदंडों, मरीज परिवहन प्रणाली, पंजीकरण, प्रकार अनुमोदन और नियमित फिटनेस निरीक्षण का कोई राष्ट्रीय मानक मौजूद नहीं था। अब केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नए संशोधन इन सभी कमियों को पूरी तरह दूर कर देंगे।

नया नियामक ढांचा: जानें क्या-क्या बदला है नए नियमों में?

सड़क परिवहन मंत्रालय के नए नियमों के अनुसार दोपहिया सड़क एम्बुलेंस को ‘एल 2 श्रेणी’ के वाहन के रूप में पंजीकृत किया जाएगा और इनके लिए राष्ट्रीय मानक अकर-209 (भाग 1):2026 को अनिवार्य बनाया जाएगा। 1 अक्टूबर 2027 को या उसके बाद बनने वाली सभी दोपहिया एम्बुलेंस और उन पर लगने वाली आपातकालीन टॉप लाइट्स के लिए इस मानक का अनुपालन आवश्यक होगा।

इन वाहनों को राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित विशिष्ट क्षेत्रों में संचालन के लिए पंजीकृत किया जाएगा। चूंकि ये व्यावसायिक परिवहन वाहन माने जाएंगे, इसलिए इन्हें कड़े फिटनेस जांच से गुजरना होगा और हर दो साल में फिटनेस प्रमाण पत्र का नवीनीकरण कराना होगा। निरीक्षण के दौरान मरीज स्ट्रेचर व लॉकिंग मैकेनिज्म, लोडिंग-अनलोडिंग सिस्टम, सेफ्टी बेल्ट, अग्निशामक यंत्र, टायर-रिम्ब, पार्किंग ब्रेक, ब्रेकिंग पावर, ढलान पर चढ़ने की क्षमता (ग्रेडिबिलिटी), आपातकालीन लाइटें और पर्यावरणीय सुरक्षा उपकरणों की बारीकी से जांच की जाएगी ताकि विषम परिस्थितियों में भी मरीज और चालक पूरी तरह सुरक्षित रहें।

जानें छत्तीसगढ़ को क्या होगा सीधा फायदा

छत्तीसगढ़ में इस व्यवस्था के लागू होने से स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा अभूतपूर्व रूप से विस्तृत होगा। बस्तर के अंदरूनी इलाकों में जहां नक्सलियों द्वारा खोदी गई सड़कों या संकीर्ण पगडंडियों के कारण चार पहिया गाडि़यां ठप हो जाती हैं, वहां दोपहिया एम्बुलेंस आसानी से रास्ता निकाल लेंगी। वहीं दूसरी ओर, रायपुर, दुर्ग-भिलाई, कोरबा और बिलासपुर जैसे तेजी से बढ़ते महानगरीय इलाकों में भीषण ट्रैफिक जाम और तंग गलियों में फंसे गंभीर मरीजों को तुरंत निकाल कर बड़े अस्पतालों तक पहुंचाना बेहद आसान हो जाएगा।

दोपहिया एम्बुलेंस में आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं, ऑक्सीजन सिलेंडर, प्राथमिक चिकित्सा किट और पोर्टेबल ईसीजी व वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं फिट की जा सकेंगी। इससे प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ मौके पर ही मरीज को स्टैबलाइज कर सकेगा। नतीजतन, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने, सर्पदंश, हृदयघात और सड़क दुर्घटना के शिकार मरीजों को तत्काल सहायता देने में यह व्यवस्था संजीवनी का काम करेगी। कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के लागू होने से अब दोपहिया वाहनों पर मरीज को ले जाना सुरक्षित, तकनीकी रूप से मजबूत और पूरी तरह जवाबदेह बनेगा।

30 दिनों में आम जनता से मांगे गए सुझाव

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस मसौदा अधिसूचना को सार्वजनिक कर दिया है। अधिसूचना जारी होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर आम नागरिकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वाहन निर्माताओं से सुझाव व आपत्तियां मांगी गई हैं। प्राप्त सुझावों की गहन समीक्षा के बाद केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत अंतिम नियमों को अधिसूचित कर पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा।

admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *