युक्तियुक्तकरण में डीईओ का बड़ा खेला, जिस अभ्यावेदन को कमिश्नर-जेडी की समिति ने कर दिया था खारिज, डीईओ ने उस आदेश को ही पलट दिया, सवाल ये जेडी बड़े या डीईओ?

युक्तियुक्तकरण में डीईओ का बड़ा खेला, जिस अभ्यावेदन को कमिश्नर-जेडी की समिति ने कर दिया था खारिज, डीईओ ने उस आदेश को ही पलट दिया, सवाल ये जेडी बड़े या डीईओ?

बिलासपुर।1 मई 2026| राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ” युक्तियुक्तकरण ” में हुए संशोधन को लेकर बवाल मचा हुआ है, गड़बड़ी की शिकायत पर शुरू हुई जांच की मंथर गति को लेकर कलेक्टर बिलासपुर संजय अग्रवाल ने जेडी बिलासपुर को तीन दिन के भीतर जांच प्रतिवेदन की रिपोर्ट सौंपने को निर्देशित किया है। NPG.NEWS ने पूरे मामले की तह तक जाने का फैसला किया। जो रिपोर्ट निकाल कर सामने आई है वह सरकार और न्यायालय के निर्णयों पर गंभीर चोट है। सीधेतौर पर बिलासपुर में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को ही डिरेल कर दिया है।

बड़ा सवाल: कमिश्नर , कलेक्टर और जेडी के आदेश को डीईओ ने क्यों की नाफरमानी?

मामला है व्याख्याता राम प्रताप यादव का , जिन्होंने युक्तियुक्तकरण के जरिए हुए स्थानांतरण को चुनौती दी थी और इसके लिए न्यायालय की शरण ली थी। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता शिक्षक राम प्रताप यादव को जिला स्तरीय समिति के समक्ष अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता शिक्षक के अभ्यावेदन पर विचार करते हुए कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी की समिति ने अमान्य कर दिया था। इसके बाद तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी अनिल तिवारी ने 26 जून 2025 विस्तृत आदेश भी जारी कर दिया था। तत्कालीन डीईओ तिवारी के आदेश के बाद राम प्रताप यादव ने दोबारा हाई कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट को बताया, 7 जुलाई को शासन द्वारा दो और समिति का निर्माण कर दिया गया है, जिनका अभ्यावेदन जिला में अमान्य हुआ है वह संभाग में आवेदन कर सकते है । कोर्ट ने याचिकाकर्ता शिक्षक राम प्रताप यादव को संभागीय समिति के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया। रामप्रताप यादव के मामले में निर्णय लेते हुए 8 अगस्त 2025 को कमिश्नर और जेडी की समिति ने अभ्यावेदन को अमान्य कर दिया। कमिश्नर, कलेक्टर, जेडी और तत्कालीन डीईओ अनिल तिवारी ने बकायदा विभागीय आदेश जारी कर अगस्त माह में ही राम प्रताप यादव के युक्तियुक्तकरण को सही ठहराते हुए उनके अभ्यावेदन को खारिज कर दिया था।

नए डीईओ विजय टांडे और विधि खंड प्रभारी ने बदल दिया पूरा खेल

इस बीच जिला शिक्षा अधिकारी अनिल तिवारी को हटाकर विजय टांडे को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बना दिया गया। यहीं से पूरा खेल शुरू हुआ। अक्टूबर महीने में जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने रामप्रताप यादव के अभ्यावेदन पर पुनः विचार करते हुए उनके अभ्यावेदन को मान्य करते हुए पदस्थापना उनके पूर्व स्कूल में ही कर दी। जिसे चार बड़े अधिकारियों ने गलत पाया था उसे डीईओ तांडे ने सही ठहरा दिया ।

पढ़िए क्या है नियम?

जिला और संभाग से खारिज हो चुके मसले पर डीइओ को दोबारा आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है। डीईओ ने अपने आदेश में बड़ी चालाकी से न्यायालय के जिस आदेशों का उल्लेख किया है उसमें रामप्रताप यादव को जेडी की समिति के पास जाने को निर्देशित किया गया था और जिस पर जेडी नियमानुसार निर्णय कर चुके थे, ऐसे में इस पर सुनवाई का अधिकार जिला शिक्षा अधिकारी को था ही नहीं । अचरज की बात ये, कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति में इस प्रक्ररण को नहीं भेजा गया है।

यह प्रकरण तो केवल एक बानगी मात्र है, ऐसे दर्जनों प्रकरण है जिसमें इसी प्रकार का खेल खेला गया है। जिसकी जानकारी न तो कलेक्टर को हुई न जेडी को और न ही कमिश्नर को।

अंकित गौराहा की शिकायत पर मंथर गति से हो रही जांच

कांग्रेस नेता अंकित गौराहा ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिलासपुर में हो रहे घपले और गड़बड़ी को लेकर मुख्य सचिव से लेकर जेडी व कलेक्टर से दस्तावेजी शिकायत दर्ज कराई है। जांच तो चल रही है, गति बेहद धीमी है। इसे लेकर भी आशंका जाहिर की जा रही है, घोटालेबाज डीईओ को सिस्टम में बैठे आला अधिकारियों का संरक्षण तो नहीं?

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