गजब का फर्जीवाड़ा: भूमाफियाओं ने सरकारी मुलाजिमों से मिलकर करोड़ाें की जमीन कर दिया वारा-न्यारा, मिसल में ओवर राइटिंग का आया सनसनीखेज मामला…

सरगुजा। 07 अक्टूबर 2026| भूमाफियाओं ने सरकारी महकमे के साथ ऐसा खेला किया है जिसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। मिसल दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर सरकारी और निजी जमीनों को अपने नाम करा लिया। अचरज की बात ये कि जमीन की रजिस्ट्री भी हो गई।
अब यह कहना बेमानी होगी, यह सब करने के दौरान किसी को कानोकान भनक तक नहीं लग पाई। यह सब करने वाले सरकारी महकमे के मुलाजिम ही है, जिसने चंद रुपयों की खातिर माफियाओं से मिलकर अपना ईमान बेच दिया। गरीब आदिवासियों की जमीनें छीन ली और सरकारी जमीन का वारा-न्यारा कर दिया।
अधिकार अभिलेख में गड़बड़ी, सरकारी दस्तावेजों में कूटरचना के इस खेल का भांडाफोड भाजपा नेता व पार्षद आलोक दुबे ने दसतोवजी सबूत के साथ किया। दस्तावेजों के साथ पार्षद आलोक दुबे ने कलेक्टर सहित आला अफसरों से शिकायत कर पूरे मामले की जांच करने और सिंडीकेट को सलाखों के पीछे कराने की मांग की थी।
दस्तावेजी सबूतों के साथ जब जांच पड़ताल की गई तब सामने चौंकाने वाली बातें सामने आई है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला मैनपाट के केसरा गांव का सामने आया है। 2022 में सरकारी जमीन खसरा नंबर-1378 (3.46 हेक्टेयर) में छेड़छाड़ की गई है। 1954-55 के मूल दस्तावेज में कूट रचना कर विजय सिंह के नाम पर चढ़वा दिया है, जबकि उस समय इस खसरा नंबर का अस्तित्व ही नहीं था। आगे पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर नामांतरण कराने की कोशिश की।
09 साल के उम्र में जमीन हो गई नाम पर, ओवर राइटिंग का सामने आया मामला
2024 के रजिस्ट्री पेपर में विजय सिंह, उम्र 79 दर्ज है, इसका मतलब कि 1954 में इनकी उम्र 9 साल थी। यदि ऐसा है, तो विजय सिंह के नाबालिग होते हुए अधिकार अभिलेख में नाम दर्ज हुआ है। वहीं मूल दस्तावेज के ऊपर और नीचे – हैंडराइटिंग भी मेल नहीं खा रही है।
इसलिए कलेक्टर रिकॉर्ड रूम सील कर अपने पास रखते थे चाबी
जनवरी 2024 से सरगुजा जिले में पदस्थ कलेक्टर संदीपन भोस्कर ने फर्जीवाड़े को रोकने के लिए जरुरी रद्दोबदल किया था। मूल अधिकार अभिलेख के रिकॉर्ड रूम को सील कर चाबी अपने पास रखने लगे थे। सुबह 10 बजे कलेक्टर, दफ्तर आते तब चाबी कर्मियों को सौंपते थे। ऐसे में 2024 से 2026 तक अधिकार अभिलेख में छेड़छाड़ का मामला सामने नहीं आया।
सिंडिकेट का पर्दाफाश करना जरुरी
फर्जीवाड़ों का खुलासा करने वाले भाजपा नेता व पार्षद आलोक दुबे का कहना है, जमीनों के मूल दस्तावेज में 2016 से ही छेड़छाड़ और गड़बड़ी की जा रही है। 2022-23 तक सैकड़ों दस्तावेजों में इस तरह का फर्जीवाड़ा हुआ है। हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से पूरे दस्तावेजों की जांच कराई जानी चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो भूमाफियाओं के एक बड़े रैकेट का खुलासा होगा।
दस्तावेजों में कूटरचना की शिकायत मिली तो करेंगे कार्रवाई
अजीत वसंत, कलेक्टर, सरगुजा का कहना है, जमीन संबंधित दस्तावेजों का डिजिटलीकरण करना है। गणना पूरी होने पर दस्तावेजों को डिजिटल कन्वर्ट करेंगे। पुराने दस्तावेजों में कूटरचना की शिकायत मिली, तो जांच कराकर कार्रवाई करेंगे।
भूलन उरांव को दस्तावेजों में बना दिया भूलन मियां
दर्रीडीह, लुंड्रा: 2018 में अंबिकापुर-सीतापुर मेन रोड पर चेंद्रा के पास अनुसूचित जनजाति वर्ग के भूलन उरांव की 9 एकड़ के अधिकार अभिलेख में छेड़छाड़ कर अब्दुल सत्तर पिता भूलन मियां ने अपने नाम पर करा लिया। नियमों पर गौर करें और 170 ख की बाध्यता पर नजर डालें तो अनुसूचित जनजाति वर्ग का भूमि स्वामी, सामान्य वर्ग के व्यक्ति को जमीन बेच ही नहीं सकता। मिलते-जुलते नाम का फायदा उठाकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए। 2024 में शिकायत के बाद जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया और जमीन को शासकीय मद में दर्ज कराया गया।
गजब का फर्जीवाड़ा, अधिकार अभिलेख में कर दी ओवर राइटिंग
ग्राम पंचायत दरिमा में खसरा नंबर-1322/2 (रकबा 2.20 हेक्टेयर) हल्का पटवारी नंबर-14 के 1954-55 के अधिकार अभिलेख में छेड़छाड़ कर आजाद इराकी ने गिल्ली पिता धनसाय चिकवा की 5.50 एकड़ जमीन अपने नाम करा ली। जमीन सिंहदेव योजना के तहत गिल्ली को 1968 में शासकीय पट्टे के तौर पर मिली थी। कलेक्टर से अनुमति न लेना पड़े, इसीलिए इसे 1954-55 के अधिकार अभिलेख में चढ़वा दिया। फिर रमाशंकर सिंह के नाम से रजिस्ट्री करा ली।

