कोरोना काल में शादी में भीड़ जुटने पर SDM ने ठोका था जुर्माना, हाई कोर्ट ने आदेश को रद्द कर जुर्माने की राशि लौटाने जारी किया आदेश

कोरोना काल में शादी में भीड़ जुटने पर SDM ने ठोका था जुर्माना, हाई कोर्ट ने आदेश को रद्द कर जुर्माने की राशि लौटाने जारी किया आदेश

बिलासपुर। 24 अक्टूबर 2026| कोरोना संक्रमण के दौरान शादी समारोह में निर्धारित संख्या से अधिक लोगों के शामिल होने के मामले में अंबिकापुर के तीन लोगों पर लगाए गए जुर्माने को छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच ने अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है।

कोर्ट ने कहा, आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत संबंधित अनुविभागीय दंडाधिकारी को जुर्माना लगाने का अधिकार नहीं था। अदालत ने मैरिज गार्डन संचालक वीरेंद्र चौरसिया को जमा किए गए 4.75 लाख रुपये तीन महीने के भीतर लौटाने का निर्देश दिया है।

पढ़िए क्या है मामला?

दो जुलाई 2021 को अंबिकापुर के चौरसिया मैरिज गार्डन में हुई शादी से जुड़ा मामला है। सरोज साहू के बेटे हर्ष साहू और प्रकाश साहू की बेटी का विवाह समारोह मैरिज गार्डन में आयोजित किया गया था। सरोज साहू और प्रकाश साहू के अलावा मैरिज गार्डन संचालक वीरेंद्र चौरसिया पर आरोप था कि समारोह में कोरोना संबंधी नियमों का उल्लंघन करते हुए करीब एक हजार लोग जुटे, जबकि अधिकतम 50 लोगों को शामिल होने की अनुमति थी।

नायब तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर अंबिकापुर थाने में तीनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188, 269 और महामारी अधिनियम की धारा 3 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। अनुविभागीय दंडाधिकारी ने सरोज साहू और प्रकाश साहू पर 2.37, 2.37 लाख रुपये तथा मैरिज गार्डन संचालक पर 4.75 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। संचालक ने राशि जमा कर दी थी, जबकि अन्य दो के मामले में वसूली पर अंतरिम रोक थी।

सीनियर एडवोकेट प्रफुल्ल भारत ने नियमों का दिया हवाला

याचिका की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रफुल्ल एन. भारत ने कहा कि कानून में निर्धारित प्रक्रिया अपनाए बिना अनुविभागीय दंडाधिकारी सीधे जुर्माना नहीं लगा सकते। संबंधित प्राथमिकी को भी हाई कोर्ट 21 अगस्त 2023 को निरस्त कर चुकी है, इसलिए उसी आरोप के आधार पर जुर्माना वसूली उचित नहीं है। राज्य सरकार ने कहा, शादी में करीब एक हजार लोग जुटे थे, जो निर्धारित सीमा का स्पष्ट उल्लंघन था। नगर निगम की ओर से भी जुर्माने को सही ठहराया।

पढ़िए हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा है?

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जुर्माना लगाने से पहले विधि के अनुसार शिकायत और न्यायिक प्रक्रिया जरूरी थी। महामारी अधिनियम की धारा 3 भी अधिकारियों को सीधे आर्थिक दंड लगाने का अधिकार नहीं देती। अदालत ने यह भी माना कि समान तथ्यों पर दर्ज प्राथमिकी पहले ही निरस्त हो चुकी है। कोर्ट ने जुर्माना लगाने के आदेश को रद्द कर दिया है।

नगर निगम, अंबिकापुर को मैरिज गार्डन संचालक वीरेंद्र चौरसिया वीरेंद्र चौरसिया से जमा कराई गई राशि प्रमाणित आदेश मिलने के तीन महीने के भीतर लौटाने का निर्देश कोर्ट ने दिया है।

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