अंतागढ़ को नया जिला बनाने के लिए युवाओं का हल्लाबोल: हस्ताक्षर अभियान से उठी मांग, अंगूठा लगाकर भी बुजुर्ग दे रहे समर्थन

अंतागढ़ को नया जिला बनाने के लिए युवाओं का हल्लाबोल: हस्ताक्षर अभियान से उठी मांग, अंगूठा लगाकर भी बुजुर्ग दे रहे समर्थन

कांकेर। उत्तर बस्तर (कांकेर) जिले के अंतागढ़ को पृथक छत्तीसगढ़ का नया जिला बनाने की बरसों पुरानी मांग एक बार फिर गरमा गई है। मंगलवार को क्षेत्र के युवाओं ने एकजुट होकर अंतागढ़ को जिला बनाने की मांग को लेकर एक व्यापक आंदोलन का बिगुल फूंक दिया। इस आंदोलन की शुरुआत युवाओं द्वारा आयोजित एक विशाल हस्ताक्षर अभियान से हुई, जिसे क्षेत्रवासियों का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है।

​अभियान के दौरान अंतागढ़ को जिला बनाने के समर्थन में हजारों की संख्या में स्थानीय नागरिक, युवा और बुजुर्ग स्वतःस्फूर्त होकर आगे आ रहे हैं। इस जन-आंदोलन की खास बात यह रही कि जहाँ शिक्षित वर्ग हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दे रहा है, वहीं निरक्षर नागरिक भी उत्साहपूर्वक अंगूठा लगाकर अपनी सहमति दर्ज करा रहे हैं।

​15 वर्षों का संघर्ष, हाथ सिर्फ आश्वासन और धोखा

​स्थानीय लोगों और आंदोलनकारी युवाओं का कहना है कि वे बीते 15 से अधिक वर्षों से अंतागढ़ को जिला का दर्जा दिलाने के लिए संघर्षरत हैं। इतिहास का हवाला देते हुए बुजुर्गों ने बताया कि अंतागढ़ ब्रिटिश काल से ही एक प्रमुख तहसील रहा है, जिसका जिला मुख्यालय उस दौर में रायपुर हुआ करता था। तात्कालिक समय की अन्य तमाम तहसीलें आज पूर्ण जिले का आकार ले चुकी हैं, लेकिन ऐतिहासिक महत्ता रखने वाला अंतागढ़ आज भी उपेक्षा का शिकार होकर अपनी पहचान के लिए मोहताज है।

​क्षेत्रवासियों का आरोप है कि हर चुनाव या सरकारी घोषणा के समय उन्हें केवल आश्वासन की घुट्टी पिलाई जाती है। ‘अगली बार अंतागढ़ जिला बनेगा’ का दिलासा देकर हर बार उनके साथ वादाखिलाफी और छल किया गया है।

​जनप्रतिनिधियों के दोहरे रवैये से फूटा जनता का गुस्सा

आंदोलन में शामिल युवाओं ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सत्ता की राजनीति में अंतागढ़ की बलि चढ़ रही है। जब जनप्रतिनिधि विपक्ष में रहते हैं, तो अंतागढ़ को जिला बनाने का मुद्दा बढ़-चढ़कर उठाते हैं और आंदोलन का हिस्सा बनते हैं, लेकिन जैसे ही वे सत्ता की कुर्सी पर बैठते हैं, अंतागढ़ की जनता और उनके हक की मांग को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।

​उग्र आंदोलन की चेतावनी

​युवाओं और क्षेत्रवासियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि इस बार वे केवल खोखले आश्वासनों से मानने वाले नहीं हैं। यह हस्ताक्षर अभियान तो महज एक शुरुआत है। यदि शासन-प्रशासन ने अंतागढ़ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए जल्द ही इसे जिला घोषित नहीं किया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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