CG Bilaspur High Court News: हाई कोर्ट की सख्ती: स्वास्थ्य सचिव और PSC सचिव को अवमानना नोटिस, हाई कोर्ट के आदेश का तीन साल बाद भी नहीं हो पाया अमल

CG Bilaspur High Court News: बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 100% महिला आरक्षण को असंवैधानिक करार देकर निरस्त कर दिया था और भर्ती प्रक्रिया में पुरुष अभ्यर्थियों को भी शामिल करने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने यह आदेश तीन साल पहले दिया था। इस पर अब तक अमल नहीं हो पाया है। डिवीजन बेंच ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया और पीएससी के सचिव डी. राहुल वेंकट को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
बता दें, इन दोनों अफसरों के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने न्यायालयीन आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की है। याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने पांच सप्ताह बाद की तिथि तय कर दी है।
पढ़िए क्या है मामला?
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने 8 दिसंबर 2021 को सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में डिमांस्ट्रेटर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। विज्ञापन में नियम- 5 और भर्ती नियम 2013 के शेड्यूल-3 के नोट-2 में यह शर्त रखी गई थी कि इन पदों पर केवल महिला अभ्यर्थी ही आवेदन करने के लिए पात्र होंगी।
महिला आरक्षण को लेकर हाई कोर्ट में याचिका
सीजीपीएससी के इन नियमों को चुनौती देते हुए अभय कुमार किस्पोट्ता, डॉ. अजय त्रिपाठी, एलयुस एक्का और आदित्य सिंह ने वर्ष 2021 में ही हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कहा, राज्य में बीएससी. नर्सिंग व एमएससी. नर्सिंग कोर्स में पढ़ाई के दौरान पुरुष और महिला दोनों को समान रूप से प्रवेश दिया जाता है। पढ़ाई पूरी होने के बाद अध्यापन के पदों से पुरुषों को बाहर रखना असंवैधानिक है।
राज्य सरकार ने ये दिया था तर्क
राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के अधिवक्ता ने कहा था, अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और नर्सिंग का अधिकांश कार्य महिलाओं द्वारा किया जाता है। संविधान के अनुच्छेद 15(3) का हवाला देते हुए यह कहा, राज्य को महिलाओं और बच्चों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार है, इसलिए शत-प्रतिशत पदों को महिलाओं के लिए सुरक्षित रखना उचित है।
हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था 100 फीसदी आरक्षण का नियम
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 100% महिला आरक्षण को असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया था । कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में पुरुष अभ्यर्थियों को शामिल करने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के फैसले के करीब तीन साल बाद भी स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय द्वारा आदेश का पालन नहीं किया गया और न ही पुरुषों के लिए संशोधित विज्ञापन जारी किया गया।
PSC ने लिखी थी चिट्ठी, कोर्ट के फैसले का दिया था हवाला
हाई कोर्ट के फैसले के ठीक 6 दिन बाद 15 मार्च 2023 को सीजी पीएससी के उप सचिव ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर संशोधित मांग पत्र और संशोधित नियम भेजने को कहा था, ताकि नियमित भर्ती पूरी की जा सके। इसके अलावा अभ्यर्थियों ने भी 1 जून 2023 को आवेदन दिया, लेकिन अधिकारियों ने नियम संशोधित करने की जगह मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
नियमित भर्ती पर रोक, संविदा का निकाला विज्ञापन
22 जून 2026 को आयुक्त चिकित्सा शिक्षा ने गवर्नमेंट नर्सिंग कॉलेज में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और डिमांस्ट्रेटर के पदों के लिए संविदा भर्ती का नया विज्ञापन जारी कर दिया। इसी विज्ञापन को आधार बनाकर याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

