सिंहदेव के गढ़ में बघेल की 'गर्जना': अंबिकापुर एंट्री से पहले ही गर्माई छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्या बदलने वाला है सत्ता का समीकरण?

रायपुर। हाल ही में बिलासपुर में संगठन के भीतर नई ऊर्जा फूंकने का संकल्प दोहराने वाले पूर्व सीएम भूपेश बघेल की यह यात्रा महज एक औपचारिक प्रवास नहीं मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम को ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों में जोश भरने की उस व्यापक योजना का हिस्सा मान रहे हैं, जिसकी नींव कुछ दिन पहले ही रखी गई थी। माना जा रहा है कि भूपेश इसी बहाने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच सक्रिय होने जा रहे हैं।
सरगुजा प्रवास के रास्ते में पड़े बिलासपुर के पेण्ड्री डीह बाईपास पर बिलासपुर के कद्दावर कांग्रेसियों का उत्साह देखने लायक था। विधायक दिलीप लहरिया, पूर्व विधायक सियाराम कौशिक, राजेंद्र शुक्ल, प्रमोद नायक और वरिष्ठ प्रवक्ता अभय नारायण राय समेत दर्जनों दिग्गजों की मौजूदगी ने इस स्वागत समारोह को एक बड़े राजनीतिक संदेश में तब्दील कर दिया।
डिप्टी सीएम से बहस का उठा मुद्दा, कार्यकर्ताओं में दिखा नया जोश
मुलाकात के दौरान स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भूपेश बघेल द्वारा रायपुर में एक राष्ट्रीय बहस के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ डिबेट की जमकर तारीफ की। कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना था कि बघेल के तीखे तेवरों ने सत्ता पक्ष को कटघरे में खड़ा किया है, जिससे जमीनी स्तर पर पार्टी कैडर का मनोबल तेजी से बढ़ा है।
अंबिकापुर प्रशिक्षण शिविर पर टिकीं प्रदेश की निगाहें
लंबे समय तक केवल सूरजपुर के दौरों तक सीमित रहने वाले बघेल का अब सीधे सिंहदेव के राजनीतिक मुख्यालय अंबिकापुर की ओर रुख करना बेहद अहम है। तीन दिवसीय ब्लॉक अध्यक्षीय प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन उनका शामिल होना और दो दिनों तक सरगुजा में डेरा डालना यह दर्शाता है कि वे क्षेत्र में पार्टी की पकड़ को नए सिरे से मजबूत करने के मूड में हैं।
आगामी दिनों में बदलेंगे अंदरूनी समीकरण?
सरगुजा संभाग में ब्लॉक स्तर के नेताओं को प्रशिक्षित करने का यह मंच आने वाले समय में छत्तीसगढ़ कांग्रेस की भावी दिशा तय कर सकता है। जिस तरह से इस दौरे की शुरुआत में ही गुटबाजी से परे हटकर कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ा है, उसने पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

