CG Cabinet Reshuffle: बंद कमरे में CM विष्णुदेव और पवन साय की बैठक, फिर मंत्रियों को तलब और वार्निंग…मंत्रिमंडल सर्जरी का स्क्रिप्ट तैयार!

रायपुर। 19 जून 2026| मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंत्रिमंडल के सारे मंत्री गुरुवार रात सीएम हाउस में तलब कर लिए गए। मंत्रियों के पहुंचने को सीधे मंत्रिमंडल में फेरबदल से जोड़ लिया गया है, अब मंत्री बदलेंगे या नहीं, इस पर अब तक सस्पेंस कायम है। इसके विपरीत आपात मीटिंग के पीछे एक बड़ी कहानी उभर कर सामने आ रही है। मंत्रियों की मीटिंग की पृष्ठभूमि दो दिन पहले सीएम हाउस में बन चुकी थी और उसी के अनुसार मंत्रियों को सीएम हाउस पहुंचने का एक लाइन का संदेश भेज दिया गया।
उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दिल्ली से लौटने के बाद थोड़ी व्यस्तता चल रही थी। इसके बाद दो- तीन दिनों से सरकार और भाजपा संगठन में शीर्ष स्तर पर हलचल तेज हो गई थी। इस हलचल की किसी को कानों-कान खबर तक नहीं लगी। सीएम हाउस में मंत्रियों की मीटिंग से पहले ही एक हाई लेबल की मीटिंग हो चुकी थी, जिसमें मंत्रियों को बुलाने की पटकथा लिखी जा चुकी थी। बताया गया है कि दिल्ली से आने के बाद मुख्यमंत्री श्री साय की प्रदेश भाजपा के संगठन मंत्री पवन साय से चर्चा हुई थी। इसके बाद श्री साय एकाएक सीएम हाउस पहुंचे। इसके बाद घंटेभर से ज्यादा समय तक सीएम और संगठन मंत्री की उच्च स्तरीय बैठक चलती रही। खास बात यह है कि इस बैठक के दौरान और कोई मौजूद नहीं था। मतलब बंद कमरे में चली इस बैठक में क्या चर्चा की गई और क्या फैसला लिया गया है, इसकी अब तक किसी को जानकारी नहीं है। सूत्रों का दावा है कि इसी बैठक में इस बात पर सहमति बन चुकी थी कि मंत्रियों की बैठक ली जाए। इस चर्चा के बाद गुरुवार को सीएम श्री साय शाम को ज्यादा व्यस्त नहीं थे और न ही कोई कार्यक्रम था। चूंकि शुक्रवार को जशपुर प्रवास पर जा रहे थे, इस कारण गुरुवार को ही बैठक बुलाने का फैसला किया गया और एकाएक सारे मंत्रियों को सीएम हाउस पहुंचने का संदेश भेज दिया गया।
संगठन ने की सर्जरी
उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि सीएम हाउस में हुई बैठक मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नहीं बुलाई थी। यह संगठन की ओर से बुलाई गई बैठक थी, जिसमें प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय की अहम भूमिका थी। बताया जाता है कि मीटिंग में सीएम श्री साय ज्यादातर बातों को सुनते रहे, जबकि संगठन महामंत्री श्री साय की ओर से बहुत सारी बातें रखी गई हैं। इसमें सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में मंत्रियों का कामकाज कैसा रहा, इस पर बातचीत सिमटी रही। जनहित के कामों के अलावा सरकार और संगठन के बीच समन्वय बढ़ाने पर विशेष रूप से जोर दिया गया। मंत्रियों को इशारे में नसीहत भी दे दी गई है और अप्रत्यक्ष रूप से चेताया भी गया है। इसका मतलब यह भी निकाला जा रहा है कि यदि मंत्रिमंडल में फेरबदल होता है तो मंत्रियों को यह स्वीकारना होगा कि उनके कामकाज के आधार पर ही परिवर्तन किया गया है। जैसा कि पहले से चर्चा है कि चार या पांच मंत्रियों को बदला जा सकता है, इसलिए इस मीटिंग के जरिए हो सकता है कि मंत्रिमंडल में परिवर्तन की पृष्ठभूमि तैयार कर ली गई हो। संगठन महामंत्री छह माह से पश्चिम बंगाल चुनाव में व्यस्त थे और इसके बाद अब जाकर छत्तीसगढ़ में वापस सक्रिय हुए हैं। इसके भी मायने निकाले जा रहे हैं।
इस मंत्री को मिला सबसे कम नंबर
सूत्रों ने बताया कि मीटिंग में भले ही मंत्रियों की रैंकिंग तय नहीं की गई हो, मगर बातचीत के दौरान ही मंत्रियों को उनका पोजीशन बता दिया गया है। जिन मंत्रियों को ज्यादा सुधारने की नसीहत दी गई है, माना जा रहा है कि उनका नंबर सबसे कम है। बताया गया है कि परफारमेंर्स के आधार पर संगठन भी मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रहा है और जरुरत पड़ने पर इसके आधार पर समीक्षा कर मंत्रिमंडल में फेरबदल पर विचार किया जा सकता है। सूत्रों का दावा है कि महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विभाग में सुधार की आवश्यकता ज्यादा महसूस की गई है। इनके अलावा तीन- चार मंत्रियों में टंकराम वर्मा, श्यामबिहारी जायसवाल भी शामिल हैं। अब देखना यही है कि इन मंत्रियों को सुधार का मौका दिया जाता है अथवा मंत्रिमंडल में फेरबदल की पटकथा भी लिखी जा चुकी है। क्योंकि, सियासी पंडितों का इस बात से भी इंकार नहीं कि हटाए जाने वाले मंत्रियों को एकदम से झटका न लगे, इसलिए इस मीटिंग के जरिये उन्हें संकेत दे दिया गया कि कामकाज के आधार पर उनकी विदाई की जा रही है।

