Supreme Court: नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगा ले गया था, हाई कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में दायर की SLP, सरकार को नोटिस

बिलासपुर। 10 जून 2026|जयकांत उर्फ लल्ला उर्फ लल्लन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा व जसअिस अतुल एस चंदूरकर की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जवाब पेश करने के लिए राज्य सरकार को छह सप्ताह का समय दिया है।
पढ़िए क्या है मामला?
जयकांत पर आरोप हैख् 19 जुलाई 2025 को उसने नाबालिग पीड़िता को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। जांच के दौरान पीड़िता को आवेदक के कब्जे से बरामद किया गया। इसी आधार पर आवेदक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष पैरवी करते हुए बताया था, यह प्रेम प्रसंग का मामला है और याचिकाकर्ता तथा पीड़िता ने आपस में शादी कर ली थी और पति-पत्नी के रूप में रह रहे थे। आवेदक 20. सितंबर 2025 से जेल में है और निकट भविष्य में उसके मामले का फैसला होने की कोई संभावना नहीं है; अतः आवेदक को जमानत पर रिहा किया जाए।
राज्य सरकार के अधिवक्ता ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पीड़िता एक नाबालिग लड़की है और आवेदक के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। इस मामले में कुल 17 गवाह सूचीबद्ध हैं और अभी तक मुकदमा शुरू नहीं हुआ है; इसलिए, इस स्तर पर उन्हें जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता है।
पीड़िता और पिता ने जमानत का किया था विरोध, सुनवाई के दौरान कोर्ट में थे उपस्थित
शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया, पीड़िता और उसके पिता आज स्वयं इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित हैं और उन्होंने आवेदक को जमानत दिए जाने पर आपत्ति जताई है। याचिका की सुनवाई जस्टिस संजय कुमार जायसवाल के सिंगल बेंच में हुई।
जमानत याचिका को हाई कोर्ट ने कर दिया है खारिज
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए, विशेष रूप से रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री, अभियोजन पक्ष द्वारा आवेदक के विरुद्ध एकत्र किए गए साक्ष्य, अपराध की गंभीरता और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि अभी तक मुकदमा शुरू नहीं हुआ है, इस स्तर पर, जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।
अभियुक्त है जेल में
अभियुक्त जयकांत उर्फ लल्ला उर्फ लल्लन के खिलाफ कोरबा जिले की दीपिका पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 137(2), 87, 65(1) और POSC0 अधिनियम की धारा 4 और 6 के तहत एफआईआर दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया था। कोर्ट के आदेश पर ज्यूडिशियल रिमांड पर जेल भेज दिया है।

