Bilaspur High Court: फर्जी पुलिस, अपहरण और वसूली, हाई कोर्ट ने एसएसपी से शपथ पत्र के साथ मांगा जवाब, आरोपी की जमानत याचिका किया खारिज

Bilaspur High Court: फर्जी पुलिस, अपहरण और वसूली, हाई कोर्ट ने एसएसपी से शपथ पत्र के साथ मांगा जवाब, आरोपी की जमानत याचिका किया खारिज

बिलासपुर। 10 जून 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर के सकरी थाना क्षेत्र में फर्जी पुलिसकर्मी बनकर दो युवकों को बंधक बनाने, धमकाने और पैसे वसूलने के आरोपी की एफआईआर FI रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है, जिसमें प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध नजर आता है, इसलिए इस शुरुआती स्तर पर जांच को रोकना उचित नहीं होगा। आसमा सिटी (सकरी) निवासी सतीश मिश्रा की याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने यह फैसला दिया है।

पढ़िए क्या है पूरा मामला?

छत्तीसगढ़ बिलासपुर जिले की सकरी थाना क्षेत्र की रहने वाली साक्षी जोशी ने 28 अप्रैल 2026 को सतीश मिश्रा व अन्य के खिलाफ एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, आरोपी सतीश मिश्रा ने 20 से 24 फरवरी 2026 के बीच अलग-अलग तारीखों पर शिकायतकर्ता के बेटे मयंक जोशी और उसके दोस्त उज्ज्वल राणा को अपने घर बुलाया। सतीश ने आरोप लगाया कि उसके बेटे प्रणय मिश्रा के साथ मिलकर इन लोगों ने कोई चोरी की है। .आरोप है कि सतीश मिश्रा ने अपने घर पर कुछ अज्ञात लोगों को मौजूद रखा था, जिन्हें उसने ‘पुलिस अधिकारी’ के रूप में मिलवाया. इन सभी ने मिलकर दोनों युवकों को घर में बंधक बना लिया, गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और फिर पुलिस लिखी गाड़ियों में बैठाकर उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले गए। वहां दोनों लड़कों को डरा-धमकाकर मोटी रकम वसूलने का प्रयास किया। शिकायत पर पुलिस ने आरोपी सतीश मिश्रा के खिलाफ नए कानून के तहत भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 140(3), 308(5) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया था।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा, एफआईआर झूठी ओर दुर्भावनापूर्ण है

याचिकाकर्ता सतीश मिश्रा के अधिवक्ता राजीव कुमार दुबे ने हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच के समक्ष पैरवी करते हुए कहा, एफआईआर पूरी तरह झूठी, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि मयंक जोशी और उज्ज्वल राणा ने याचिकाकर्ता के घर से 75 से 80 लाख रुपये के गहनों की चोरी की थी और उसके बेटे को प्रताड़ित किया था। याचिकाकर्ता ने इस चोरी के संबंध में मार्च और अप्रैल 2026 में सकरी थाने, एसपी और आईजी से शिकायत की थी, लेकिन जब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो उन्होंने 11 अप्रैल 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी. वकील का तर्क था कि इसी कार्रवाई का बदला लेने के लिए दो महीने विलंब से यह झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई है। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया, याचिकाकर्ता की पत्नी को ब्रेस्ट कैंसर है और उनका इलाज एम्स AIIMS रायपुर में चल रहा है, इसलिए उन्हें राहत दी जाए।

राज्य शासन ने बताया, बिलासपुर एसएसपी से शपथ पत्र के साथ कोर्ट ने मांगा है जवाब

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से डिप्टी गर्वनमेंट एडवोकेट वैशाली महिलांग ने कोर्ट को बताया, इस मामले में आरोपी ने पहले एक नियमित जमानत याचिका भी दाखिल की थी. उस जमानत याचिका पर 12 मई 2026 को सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बिलासपुर पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने एसपी से कहा है कि वे अब तक की जांच में आरोपी के खिलाफ मिले सभी सबूतों का ब्योरा कोर्ट के सामने रखें और मामले को गर्मी की छुट्टियों के बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

डिवीजन बेंच ने खारिज की जमानत याचिका, हस्तक्षेप से किया इंकार

मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है, जब मामले की जांच चल रही है और खुद एसपी को कोर्ट में सबूतों के साथ हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया गया है, तो इस प्रारंभिक चरण में एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता के दावों की सत्यता की जांच पुलिस की

तफ्तीश और निचली अदालत के ट्रायल के दौरान ही हो सकती है। कोर्ट ने कहा है, एफआईआर में दर्ज विवरण से स्पष्ट रूप से एक गंभीर संज्ञेय अपराध का होना पाया जाता है, जिसकी विस्तृत विवेचना जरूरी है।

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