SECR News: भनवारटंक के पास बनेगी नई ट्विन टनल: खोंगसरा-भनवारटंक के बीच 130 किमी की स्पीड से दौड़ेंगी ट्रेनें…

बिलासपुर। 12 सितंबर 2026| बिलासपुर-पेंड्रारोड रेल सेक्शन में उसलापुर से पेंड्रा तक 87 किमी लंबी तीसरी रेल लाइन का काम प्रस्तावित है। इस रूट के सबसे मुश्किल 20 किमी घाट सेक्शन में भनवारटंक के पास नई ट्विन टनल बनेगी। घोड़े की नाल के आकार की यह सुरंग 11 मीटर चौड़ी और 8-9 मीटर ऊंची होगी। इसमें तीसरी लाइन के साथ मौजूदा अप लाइन भी गुजरेगी। इससे भनवारटंक के घुमावदार और धीमे रूट की जगह सीधा रास्ता मिलेगा।
केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। प्रोजेक्ट पर 1279 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस प्रोजेक्ट का सबसे मुश्किल हिस्सा खोंगसरा से भनवारटंक के बीच का 20 किलोमीटर लंबा घाट सेक्शन है। इसी चुनौती से निपटने के लिए यहां एक नई और आधुनिक रेलवे टनल बनाई जाएगी। रेलवे ने इस पूरे प्रोजेक्ट को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
वर्तमान में भनवारटंक घाट में दो सिंगल लाइन सुरंगें हैं। इनमें से एक 1907 में बनी थी, जो लगभग 119 साल पुरानी है। इस पुरानी सुरंग पर ट्रेनों का बहुत ज्यादा दबाव रहता है। तीखे मोड़ और पहाड़ी ढलान के कारण यहां सुरक्षा के लिहाज से ट्रेनों की स्पीड महज 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा रह जाती है।
खास डिजाइन से बनेगी टनल
टनल का ढांचा घोड़े की नाल के आकार का होगा। इसकी ऊंचाई 8 से 9 मीटर रखी जाएगी, ताकि हाई-स्पीड ट्रेनें सुरक्षित गुजर सकें। पटरियों को सुरक्षित बिछाने के लिए टनल 10.5 से 11 मीटर चौड़ी होगी। इससे आधुनिक एलएचबी कोच आसानी से गुजरेंगे और आपस में नहीं टकराएंगे। नया रूट पहले से काफी सीधा होगा। इससे 2 से 5 डिग्री के पुराने और खतरनाक मोड़ खत्म हो जाएंगे।
टनल में बिछाएंगे ऑप्टिकल फाइबर केबल
नई टनल में सुरक्षा और नई तकनीक का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। टनल के अंदर पटरियों पर पत्थरों की जगह कंक्रीट बेड बिछाया जाएगा। इससे गुजरते समय कंपन कम होगा। पहाड़ी इलाका होने के कारण पानी निकासी के लिए मजबूत साइड ड्रेनेज बनाए जाएंगे। साथ ही, बेहतर संचार के लिए टनल में ऑप्टिकल फाइबर केबल भी बिछाए जाएंगे।

