RTE को लेकर हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा- एडमिशन प्रक्रिया में अगस्त बीत जाएगा तो गरीब बच्चे पढ़ाई कब करेंगे?

RTE को लेकर हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा- एडमिशन प्रक्रिया में अगस्त बीत जाएगा तो गरीब बच्चे पढ़ाई कब करेंगे?

इमेज सोर्स- NPG News

बिलासपुर।20 अप्रैल 2026| शिक्षा के अधिकार के तहत गरीब बच्चों के एडमिशन में हो रही देरी को छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने मामले को संज्ञान लिया है। राज्य शासन की ओर से कहा गया, पहले चरण की लाटरी निकाल ली गई हैं। इसमें 15 हजार छात्रों को सीटे आवंटित हुईं हैं। इन्हें एक मई से 30 मई तक एडमिशन लेना होगा।

इसके बाद दूसरे चरण की प्रक्रिया पूरी होगी। हाई कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा है, ऐसे में तो अगस्त तक सिर्फ एडमिशन होगा तो बच्चे पढ़ाई कब करेंगे। कोर्ट ने शिक्षा विभाग से 7 मई से पहले पूरी प्रक्रिया और एडमिशन जल्द हो इसकी कार्ययोजना मांगी है।

दरअसल प्रदेश में नया शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो गया, लेकिन आरटीई के तहत पहली कक्षा में प्रवेश प्रक्रिया धीमी है। 38,438 आवेदनों में से अब तक केवल 23,766 (62%) की ही जांच पूरी हुई है, जबकि 14 हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं। कई जिलों में 10% से भी कम जांच हो पाई है। डीपीआई ने पंजीयन और नोडल वेरीफिकेशन के लिए 16 फरवरी से 31 मार्च तक समय तय किया था, लेकिन डेडलाइन के बाद भी प्रक्रिया अधूरी है।

पूरी एडमिशन प्रक्रिया में अगस्त बीत जाएगा

ध्यान रहे, एडमिशन प्रक्रिया पर नजर डालें तो आरटीई के तहत छात्र पंजीयन की अंतिम तिथि 31 मार्च रखी गई थी। काउसंलिंग प्रक्रिया में 13 से 17 अप्रैल तक लाॅटरी एवं आवंटन किया गया। इसके बाद छात्रों को 1 से 30 मई तक प्रवेश लेने होंगे। द्वितीय चरण की प्रक्रिया 8 जून से शुरू हो जाएगी। जिसमें नए स्कूलों का रजिस्ट्रेशन होगा। उसके बाद 1 से 11 जुलाई तक छात्र पंजीयन होंगे। फिर 27 से 31 जुलाई तक लाॅटरी एवं आवंटन होगा। जिसके बाद छात्रों को स्कूल में दाखिला 3 से 17 अगस्त तक लेना होगी।

बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग में सीटों के लिए होड़

राज्य के 6861 स्कूलों में कुल 21,698 सीटों के मुकाबले 38,438 आवेदन प्राप्त हुए हैं। यानी औसतन हर सीट पर तकरीबन 1.77 आवेदन आए हैं, लेकिन यह औसत तस्वीर वास्तविक असंतुलन को छुपा देती है, कई जिलों में सीटों से कई गुना ज्यादा आवेदन हैं, जबकि कुछ जिलों में सीटें खाली रहने की नौबत है। राज्य के 33 जिलों में से 11 जिले ऐसे हैं जहां सीटों से कम आवेदन प्राप्त हुए हैं। सभी जिलों के डेटा को देखा जाए तो रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में सीट के लिए होड़ है तो बस्तर क्षेत्र में सीटें खाली रहने की संभावना है।

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