Purv Mhapaur Ramsharan Yadav: डेढ़ करोड़ का लेन-देन! वायरल वीडियो में पूर्व महापौर पर आरोप, संपदा अधिकारी सस्पेंड, पूर्व मेयर बोले…

Purv Mhapaur Ramsharan Yadav: डेढ़ करोड़ का लेन-देन! वायरल वीडियो में पूर्व महापौर पर आरोप, संपदा अधिकारी सस्पेंड, पूर्व मेयर बोले…

Purv Mhapaur Ramsharan Yadav: रायपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी से एक विवादित वीडियो वायरल हो गया है। इसमें वीडियो देख कर लग रहा है कि कोई व्यक्ति बातचीत को रिकॉर्ड कर रहा है। एनपीजी वीडियो के सत्य होने की पुष्टि नहीं करता है, मगर इसमें हो रही बातचीत से अनुमान लगाया जा रहा है कि जमीन आवंटन के लिए डेढ़ करोड़ रुपये देने की बातचीत हो रही है। वीडियो के बाद कांग्रेस में हड़कंप मच गया है, क्योंकि आरोपों से घिरने वाले और कोई नहीं, बल्कि बिलासपुर नगर निगम के पूर्व महापौर रामशरण यादव हैं। रामशरण लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी टिकट के दावेदार रहे हैं।

वीडियो में दिख रहे लोग और बातचीत सहज रूप से होती नजर आ रही है। इसके बाद जवाब में अब रामशरण यादव भी उठ खड़े हो गए हैं। बिलासपुर नगर निगम की व्यापार विहार स्थित बेशकीमती जमीन के कथित आवंटन मामले में लगाए गए रिश्वत और अनियमितता के आरोपों को पूर्व महापौर रामशरण यादव ने पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से झूठी शिकायत की गई है और वे आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि का दावा करेंगे।

रामशरण यादव ने कहा कि नगर निगम में किसी भी जमीन के आवंटन का निर्णय अकेले महापौर नहीं करता। सबसे पहले नगर निगम आयुक्त टेंडर जारी करते हैं, जिसके बाद मामला महापौर परिषद (एमआईसी) और फिर सामान्य सभा के समक्ष रखा जाता है। सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही किसी निर्णय पर अमल किया जाता है। उन्होंने बार- बार दोहराया है कि जिस जमीन को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसका आवंटन कभी पूरा ही नहीं हुआ।

उन्होंने बताया कि जिस टेंडर की बात की जा रही है, वह टेंडर 4 तारीख को मंगाया गया था, नियम के अनुसार टेंडर 20वें दिन खोला जाना है, इस हिसाब से टेंडर 24 तारीख को ओपन किया गया, लेकिन दिन की गिनती 5 तारीख से की गई, जिसके चलते टेंडर एक दिन पहले खुल गया। समय से टेंडर खुलने पर तत्कालीन कलेक्टर ने पूरी प्रक्रिया निरस्त कर दी थी। निगम आयुक्त ने संबंधित ठेकेदारों को अमानत राशि वापस करने पत्र जारी कर दिया था। यही वजह है कि संबंधित जमीन आज भी नगर निगम के नाम पर दर्ज है। जब जमीन का हस्तांतरण ही नहीं हुआ, तब किसी प्रकार की रिश्वत लेने या किसी को लाभ पहुंचाने का आरोप तथ्यहीन है।

ब्लैक मेलिंग के आरोप

पूर्व महापौर ने शिकायतकर्ता पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संबंधित व्यक्ति शहर के कई लोगों के खिलाफ लगातार शिकायतें करता है और ब्लैकमेलिंग के जरिए वसूली का प्रयास करता है। यह शिकायत भी उसी क्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य केवल उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाना है। उन्होंने दावा किया कि इस मामले की जांच वर्ष 2023 में पहले ही हो चुकी है। ऐसे में पुराने मामले को दोबारा उठाकर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने सम्मान की रक्षा के लिए कानूनी कार्रवाई करेंगे और झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।

तत्कालीन संपदा अधिकारी पर कार्रवाई

नगर निगम में व्यापार विहार की दुकानों के साथ ही 10 से अधिक खाली प्लाटों के आवंटन को लेकर लेन-देन का आरोप वीडियो में लगाया गया है। अब नगर निगम ने वीडियो में नजर आने वाले तात्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन को सस्पेंड कर दिया है। उन पर निगम की छवि खराब करने का आरोप है। दूसरी ओर कोर्ट में दायर परिवाद के आधार पर सिविल लाइन पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। इसमें शिकायत की गई है कि प्लाटों की खरीदी बिक्री को लेकर जमीन के खरीददारों निखिल अग्रवाल के अलावा रीता अग्रवाल, रितु अग्रवाल, अमृति अग्रवाल तथा चित्रांगदा अग्रवाल द्वारा रिश्वत दी गई। दिलचस्प बात यह है कि तत्कालीन कलेक्टर ने गड़बड़ी को देखते हुए प्लॉट आवंटन को लेकर जारी टैंडर को ही निरस्त कर दिया था। इसमें वसूली के आरोप से घिरे राजेश ने पुलिस अधीक्षक से बचाने की गुहार लगाई है। इसमें कहा गया है कि गणेश ट्रेडर्स के मोनू अग्रवाल के अलावा राजा, शरद और अखिलेश द्वारा अपने ऑफिस में कई बार बुलाकर धमकी दी जा रही है और दबाव बनाया जा रहा है। अब जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

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