DEO ट्रांसफर ब्रेकिंग: CG के इस DEO की छुट्टी…4.50 करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोप में हटाए गए, इनको बनाया डीईओ, देखें आदेश

रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग ने बलरामपुर-रामानुजगंज के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव को उनके पद से हटा दिया है। यादव पर 4.51 करोड़ की खरीदी में गड़बड़ी की पुष्टि के बाद राज्य सरकार ने यह कार्रवाई की है। प्राचार्य नरेंद्र कुमार निरापुरे को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर पदस्थ किया गया है। मनीराम यादव को शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल परसा विकासखंड अंबिकापुर के प्रिंसिपल के पद पर पदस्थ कर दिया है।
NPG.NEWS किया था भ्रष्टाचार का भांडाफोड़
2.42 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी और अलग-अलग जिलों में पदस्थाना के दौरान चार बार निलंबित होने वाले बलरामपुर जिला शिक्षा अधिकारी DEO मनीराम का नाम नए घोटाले में सामने आया है। फर्नीचर, खेल व व्यायाम के साथ स्टेशनरी की खरीदी में 4.51 करोड़ रुपए के घोटाले को अंजाम दिया है।
पढ़िए क्या है मामला?
कलेक्टर की जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की पुष्टि हो चुकी है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में बलरामपुर शिक्षा विभाग को छह योजनाओं के लिए कुल 4.57 करोड़ रुपए का बजट मिला था। इसमें स्कूल की छात्राओं के लिए साइकिल, विज्ञान व प्रौद्योगिकी सामग्री, फर्नीचर व दूसरे जरूरी सामान खरीदने थे। डीईओ ने जेम GEM पोर्टल के नियमों को ताक पर रख कर बिना क्रय समिति बनाए और भौतिक सत्यापन किए करोड़ों रुपए के फर्जी बिल पास कर दिए। खरीदी किया गया सामान आया नहीं, आया तो कितना आया, किन स्कूलों को कितना सामान मिला, किसी को कुछ नहीं पता। भंडार गृह में स्टॉक रजिस्ट्री पर एंट्री तक नहीं कराई गई।
जांच में मिली यह सब गड़बड़ी
जांच के दौरान कार्यालय के लिपिकों ने कई सामग्रियों की प्राप्ति और खरीदी की जानकारी से इंकार कर दिया है। कैशबुक में भारी कटिंग, ओवरराइटिंग और अप्रमाणित सुधार भी मिले हैं। टेंडर से बचने के लिए 50-50 हजार के बिल, एक ही फर्म को भुगतान, विज्ञान किट 42 लाख रुपए के विज्ञान किट, जिसका न तो सत्यापन हुआ न स्टॉक दर्ज कराया गया। इसमें 4025 साइकिलों का 1.62 करोड़ रुपए का भुगतान भी शामिल है, जिसकी न तो स्टॉक एंट्री मिली, न ही चालान मिला है।
नाश्ते में उड़ाए चार लाख रुपये
गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर कलेक्टर ने अपर कलेक्टर प्रमोद गुप्ता और जिला कोषालय अधिकारी दशरथ सोनी से जांच कराई। जांच में सामने आया कि स्टेशनरी के नाम पर 11.20 लाख रुपए बिना कोटेशन और स्टॉक एंट्री के निकाल लिए गए।
परीक्षा की मुद्रण सामग्री के लिए रांची की एक फर्म को 17.96 लाख रुपए दिए गए। वहीं, शिक्षा विभाग की बैठकों में अफसरों के नाश्ते पर ही करीब 4 लाख रुपए खर्च कर दिए गए। जांच में कई भुगतान ऐसे भी मिले हैं, जिनसे संबंधित सामग्री कार्यालय या भंडार में ही नहीं थी। कुछ मामलों में डिलीवरी के चालान नहीं मिले, जबकि कई बिलों को कई टुकड़ों में बांटकर भुगतान कर दिया गया।

