CG Weather Update: चक्रवाती तूफान के असर से भारी बारिश का अलर्ट, दंतेवाड़ा में स्कूल बंद, जानिए मौसम विभाग की नई गाइडलाइन

CG Weather Update (27 October 2026): छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदल रहा है और चक्रवाती तूफान के असर से कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए राज्य के प्रभावित इलाकों में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। सुरक्षा और एहतियात के तौर पर कई कड़े कदम उठाए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से आसानी से निपटा जा सके।
दंतेवाड़ा में रेड अलर्ट और स्कूलों में अवकाश
दंतेवाड़ा जिले में भारी बारिश की गंभीर चेतावनी को ध्यान में रखते हुए मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। इसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने मंगलवार को जिले के सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों को बंद रखने का बड़ा फैसला लिया है। मौसम की इस स्थिति को भांपते हुए प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे बेहद सतर्क रहें और केवल बेहद जरूरी काम होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें।
चक्रवाती तूफान के प्रभाव से बदल रहा मौसम का मिजाज
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में मौसम में आया यह अचानक बदलाव एक सक्रिय चक्रवाती तूफान के असर के कारण हो रहा है। इस चक्रवाती प्रभाव से दंतेवाड़ा समेत दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। संभावित आपदा या जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन ने पहले ही सभी जरूरी प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं। वहीं, मौसम विभाग ने प्रदेश के उत्तर और मध्य हिस्से के जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई है।
बालोद जिले में 27 से 30 अक्टूबर तक भारी बारिश की संभावना
दक्षिण छत्तीसगढ़ के साथ-साथ बालोद जिले में भी मौसम का मिजाज बिगड़ने का अनुमान जताया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, बालोद में 27 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक लगातार भारी बारिश हो सकती है जिसके साथ तेज हवाएं चलने की भी आशंका है। इसे लेकर जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों और अमले को विशेष सतर्कता बरतने के सख्त निर्देश जारी किए हैं ताकि किसी भी नुकसान से बचा जा सके।
अधिकारियों की छुट्टियों पर प्रतिबंध
बालोद जिले में खराब मौसम की आशंका के मद्देनजर प्रशासन ने किसी भी लापरवाही से बचने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। सभी जिम्मेदारों को अगले चार दिनों तक अपना मुख्यालय न छोड़ने और हर वक्त क्षेत्र में मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य किसी भी आपात या दुर्घटना की स्थिति में प्रशासनिक अधिकारियों की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
किसानों के लिए जरूरी गाइडलाइन
• कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थान पर रखें: खेत में काटकर रखी गई फसल को तुरंत किसी सुरक्षित स्थान, शेड या पक्के गोदाम में शिफ्ट करें ताकि अचानक होने वाली बारिश से अनाज को बचाया जा सके।
• टरपोलिन (तिरपाल) से ढकें: यदि फसल को सुरक्षित स्थान पर ले जाना संभव न हो, तो उसे मजबूत और वाटरप्रूफ प्लास्टिक शीट या तिरपाल से अच्छी तरह ढकें ताकि नमी और पानी अंदर न जा सके।
• उचित जल निकासी की व्यवस्था करें: खेतों और भंडारण क्षेत्रों के आसपास पानी जमा न होने दें, इसके लिए समय रहते पानी की निकासी के लिए नालियां बना लें।
• अनाज को जमीन से ऊपर रखें: कटी हुई फसल या बोरियों को सीधे नमी वाली जमीन पर रखने से बचें और उन्हें लकड़ी के पाटे (पैलेट) या ईंटों के ऊपर रखें ताकि नीचे से सीलन न आए।
• मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखें: स्थानीय मौसम केंद्र या प्रशासन द्वारा जारी की जाने वाली चेतावनियों और सलाह का लगातार पालन करें ताकि समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें।

