CG Bilaspur High court: CSMCL मैनपावर आपूर्ति ठेका घोटाला: हाई कोर्ट ने खारिज की दो कर्मचारियों की जमानत याचिका

बिलासपुर। 02 अगस्त 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच ने छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड CSMCL से जुड़े रिश्वत और फर्जी बिलिंग मामले में गिरफ्तार दो कर्मचारियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
अभिषेक कुमार सिंह और तिजाऊ राम निर्मलकर की नियमित जमानत याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा, जांच में दोनों को अपराध से जोड़ने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री मौजूद है। EOW आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और ACB भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 28 लाख 80 हजार रुपये नकद जब्ती बनाई थी। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की भूमिका प्रथम दृष्टया केवल औपचारिक या सामान्य कर्मचारी के तौर पर नहीं दिखती।
पढ़िए क्या है मामला?
छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड में मैनपावर आपूर्ति के ठेकों को हासिल करने और उनके क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर साजिश की गई। आरोप है कि कुछ कंपनियों ने निगम के अधिकारियों के साथ मिलकर बढ़े हुए और फर्जी बिल तैयार किए। भुगतान मिलने के बाद उसका एक निश्चित प्रतिशत संबंधित लोक सेवकों को अवैध पारिश्रमिक के रूप में दिया जाता था।
जांच के दौरान सामने आया कि 29 नवंबर 2023 को ईगल हंटर सॉल्यूशंस लिमिटेड के दिल्ली कार्यालय से 29 लाख 40 हजार रुपये का चेक मिला था। आईसीआईसीआई बैंक की शंकर नगर शाखा, रायपुर से राशि निकालने के बाद 60 हजार रुपये कार्यालय खर्च के लिए रखे गए और शेष 28 लाख 80 हजार रुपये कथित तौर पर संबंधित लोगों तक अवैध पारिश्रमिक के रूप में पहुंचाने के लिए ले जाए जा रहे थे। रकम पहुंचने से पहले ही दोनों को रोक लिया गया और नकदी जब्त कर ली गई।
अभिषेक कुमार सिंह ईगल हंटर सॉल्यूशंस लिमिटेड में फील्ड अधिकारी के रूप में काम कर रहा था। उसने चेक प्राप्त करने, बैंक से नकदी निकलवाने और 28 लाख 80 हजार रुपये ले जाने में सक्रिय भूमिका निभाई। तिजाऊ राम निर्मलकर कंपनी में अकाउंटेंट और शाखा समन्वयक था। छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम के बिल तैयार करने, ईआरपी में प्रविष्टियां करने, कमीशन की गणना और कंपनी के वित्तीय मामलों के समन्वय की भूमिका होने का आरोप है।
कंपनी के वेतनभोगी कर्मचारी हैं, इससे ज्यादा कोई भूमिका नहीं
याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट किशोर भादुड़ी ने कहा, याचिकाकर्ता, कंपनी के केवल वेतनभोगी कर्मचारी हैं। उनका कंपनी की नीतिगत, वित्तीय या निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई नियंत्रण नहीं था। वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर काम कर रहे थे और कथित साजिश या लेन-देन की जानकारी उन्हें नहीं थी। अधिवक्ता ने कहा, जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। पूरा मामला दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है, जो जांच एजेंसी के पास है। दोनों 19 अप्रैल 2026 से न्यायिक हिरासत में हैं। उनके खिलाफ कोई आपराधिक पूर्ववृत्त भी नहीं बताया गया है।
राज्य सरकार ने कहा, गड़बड़ी में दोनों की भूमिका
राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने कहा कि मामला मैनपावर आपूर्ति एजेंसियों और छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम के कुछ अधिकारियों के बीच कथित संगठित साजिश से जुड़ा है। जांच में बैंक रिकॉर्ड, बिलिंग दस्तावेज, स्वतंत्र गवाहों के बयान, सह-आरोपितों के बयान और अन्य दस्तावेजी सामग्री मिली है। इनसे दोनों की भूमिका सामने आती है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।

