CG Court News: चाकू और तलवार के हमले से जिसकी जान बाल-बाल बची, अदालत में हमलावारों को पहचानने से ही मुकर गया…

बिलासपुर। 03 अक्टूबर 2026| पुरानी रंजिश और वर्चस्व को लेकर खूनी संघर्ष करने वाले चार आरोपियों को विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी) लवकेश प्रताप सिंह बघेल की अदालत ने 7-7 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर एक-एक हजार रुपए जुर्माना ठोका है।
जानिए क्या है मामला?
घटना 14 मार्च 2025 को शाम करीब 4:30 से 6:00 बजे के बीच की है। अरुण दास मानिकपुरी और उसके साथी खेत्रो महानंद पानी टंकी के पास चबूतरे पर बैठे थे, तभी आरोपी विशाल डे, सोम चौहान, करण बनर्जी, मनीष श्रीवास और कुछ अन्य नाबालिग बालक वहां पहुंचे। आरोपियों ने आते ही अरुण दास के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
मनीष श्रीवास, करण बनर्जी और सोम चौहान ने अरुण दास के पेट और पीठ पर चाकू से कई गंभीर वार किए, जिससे उसकी आंत फट गई। बीच-बचाव करने आए खेत्रो महानंद को आरोपी विशाल डे ने तलवार अड़ाकर रोक दिया और धमकी दी। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए थे। गंभीर हालत में घायल अरुण को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की लंबी सर्जरी के बाद उसकी जान बचाई जा सकी।
गवाहों के पलटने के बावजूद दी सजा
ट्रायल के दौरान मुख्य गवाह और खुद घायल अरुण दास और अन्य प्रार्थी अपने बयानों से मुकर गए थे और आरोपियों को न पहचानने की बात कही थी। हालांकि, अदालत ने चिकित्सा विशेषज्ञों डॉ. शुभम बंजारे और डॉ. संजना तिवारी की रिपोर्ट, बेड हेड टिकट और शुरुआती बयानों की समीक्षा की। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपियों द्वारा गैर-कानूनी जमावड़ा बनाकर बलवा करने और हत्या के प्रयास का जुर्म साबित कर दिया है।

