CG: न कलेक्टर, SP को पता चला, न एयरपोर्ट वालों को, PM मोदी रायपुर कब आए, कब बस्तर रवाना… सभी भौंचक रह गए

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स हैंडल पर सुबह बताया कि वे दीपावली मनाने बस्तर जा रहे हैं। इस ट्वीट को अफसर समझ पाते इससे पहले ही मोदी का विशेष विमान रायपुर पहुंच गया और वे बस्तर रवाना हो गए। प्रधानमंत्री के इस अंदाज से अफसर तक चकित हैं।
प्रधानमंत्री के आगमन पर प्रोटोकाल के तहत अफसरों में कम से कम पुलिस कमिश्नर और कलेक्टर को एयरपोर्ट पहुंचना होता है, उन्हें कहीं से कोई जानकारी नहीं दी गई। अफसर घर में फोन घुमाते रह गए और मोदी रायपुर आकर बस्तर चले गए। अब हड़बड़ाए अफसर प्रधानमंत्री की बस्तर से रायपुर वापसी की सूचना की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
माना जा रहा है किे प्रधानमंत्री ने संभवत: रायपुर या बस्तर पहुंच कर एक्स हैंडल पर अपने प्रवास की जानकारी दी। यह पहली मतर्बा है जब प्रधानमंत्री के आगमन पर उनके स्वागत के प्रोटोकाल का पालन नहीं किया जा सका। यह भी तर्क दिया जा रहा है कि संभवत: दीपावली त्यौहार को ध्यान में रख कर प्रवास को गोपनीय रखा गया, जिससे रायपुर के अफसर और निचले स्तर के कर्मचारी परेशान न हों।
बस्तर की दीपावली भी खास
राष्ट्रपति के बाद पीएम मोदी के आने के मायने, लाल आतंक से विकास पर मुहर महज दो हफ्ते के अंतराल में बस्तर में देश की दो सबसे बड़ी राजनीतिक हस्तियों के आने के मायने बहुत महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बस्तर दशहरा में शामिल होने 25 अक्टूबर को जगदलपुर पहुंचीं थीं। अब आज एकाएक बस्तर आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दीपावली को भी खास बना दिया है। दशकों तक हिंसा और खौफ के साये में जीने वाला बस्तर अब सुरक्षा और बदलाव के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। कल तक जिस क्षेत्र में नक्सलियों की दहशत का बोलबाला था, वहां आज चारों ओर बुनियादी सुविधाओं और कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है। इस ऐतिहासिक बदलाव के केंद्र में हमारे वे वीर सुरक्षा बल हैं, जिन्होंने अपनी अदम्य वीरता से बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ा है। इन्हीं जवानों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दीपावली मना रहे हैं।
जवानों के त्याग और समर्पण को नमन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा उन जांबाज जवानों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जो दुर्गम जंगलों और कठिन परिस्थितियों में देश की सीमा और नागरिकों की रक्षा कर रहे हैं। जवानों के अद्वितीय बलिदान, निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा के कारण ही बस्तर में शांति और सुशासन का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
दीप पर्व पर बस्तर में नई रोशनी
दीपावली के पावन और शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री स्वयं बस्तर की पावन धरा पर पहुंचकर जवानों का मनोबल बढ़ा रहे हैं। कभी गोलियों और विस्फोटों की गूंज से थर्राने वाले इस अंचल में आज विकास की बहार बह रही है। वीर जवानों के तप, त्याग और सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए बस्तर के इस नए स्वरूप के साथ पूरा देश अपनी दीपावली का उत्सव मना रहा है।
जानिए PM मोदी ने ट्वीट पर क्या लिखा था
“बस्तर की ओर बढ़ते हुए हमारे वीर सुरक्षा बलों के साथ दीपावली मनाने जा रहा हूं।
यह वह क्षेत्र है जहां कभी नक्सलवाद का बोलबाला था और अब, विकास फल-फूल रहा है।
मैं अपने वीर सुरक्षा कर्मियों को उनके बलिदान, निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण के लिए सलाम करने जा रहा हूं।
दीपावली के पावन अवसर पर बस्तर जा रहा हूं।
कल तक जहां नक्सलियों का कहर था वहां आज विकास की बहार है।
वीर जवानों, उनके बलिदान, त्याग और तपस्या को नमन करने जा रहा हूं।”
जहां गोलियों की गूंज होती थी, अब वहां उत्सव के पटाखे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह बस्तर दौरा सिर्फ एक रस्म अदायगी नहीं है। सालों तक जिस बस्तर की पहचान सिर्फ बारूद और खौफ से होती थी, वहां पीएम का पहुंचकर दिवाली मनाना एक बड़ा सियासी और सामाजिक संदेश देता है। यह इस बात का सीधा सबूत है कि केंद्र और राज्य की साझा कोशिशों के चलते अब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और बस्तर लाल आतंक के अंधेरे से बाहर निकल आया है।
जवानों के हौसले को सलाम
पीएम मोदी हर साल जवानों के साथ ही दिवाली मनाते हैं, लेकिन इस बार बस्तर के बीहड़ों को चुनना सुरक्षा बलों के लिए बहुत मायने रखता है। घने जंगलों में अपनी जान हथेली पर रखकर काम कर रहे जवानों के बीच जब देश का प्रधानमंत्री खड़े होते हैं, तो उनका मनोबल आसमान छूने लगता है। यह कदम देश के रक्षकों के त्याग को सीधे तौर पर एक बड़ा सम्मान देने जैसा है। नक्सली तो बस्तर में खत्म हो चुके हैं, मगर जवानों का तलाशी अभियान जारी है और वे खतरनाक विस्फोटकों, हथियारों की बरामदगी के साथ सुरंग बमों को हटा रहे हैं।
बंदूक छोड़कर अब विकास की राह
कुछ समय पहले तक जहां सिर्फ गोलियों की आवाजें सुनाई देती थीं, आज वहां सड़कें, स्कूल और अस्पताल बन रहे हैं। पीएम मोदी का यह दौरा दिखाता है कि बस्तर को देश की मुख्यधारा से जोड़ने की रणनीति पूरी तरह रंग ला रही है। अब यहां के लोग गोलियों के खौफ में नहीं, बल्कि विकास के उजाले में जी रहे हैं।
आदिवासी अंचल से सीधा जुड़ाव
छत्तीसगढ़ में सरकार और सुरक्षा बलों की सख्त नीति के कारण नक्सली बैकफुट पर हैं। ऐसे समय में पीएम का अचानक यहां पहुंचना स्थानीय लोगों और आदिवासियों के दिलों को सीधे छूता है। यह दौरा न केवल सरकार के काम पर भरोसा मजबूत करता है, बल्कि पूरे अंचल में एक बेहद मजबूत सियासी पकड़ और सकारात्मक माहौल भी तैयार करता है।

