प्रशिक्षण संस्थानों में जुगाड़ में सालों से जमे 500 से अधिक शिक्षक स्कूल भेजे जाएंगे, मंत्री गजेंद्र यादव बोले…

रायपुर। 06 अक्टूबर 2026| प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बेहतर करने और विद्यार्थियों की पढ़ाई को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की तैयारी शुरू कर दी है। बुनियादी प्रशिक्षण संस्थान तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में लंबे समय से कार्यरत ऐसे शिक्षकों को उनकी मूल शालाओं अथवा ऐसे विद्यालयों में भेजने की तैयारी की जा रही है, जहां शिक्षकों की आवश्यकता है और जहां बच्चों एवं पालकों की ओर से भी शिक्षकों की मांग सामने आई है।
शिक्षा विभाग के स्तर पर प्रारंभिक रूप से सामने आए आंकड़ों के अनुसार प्रशिक्षण संस्थानों में 500 से अधिक शिक्षक ऐसे स्थानों पर कार्यरत हैं, जिन्हें आवश्यकता के अनुसार विद्यालयों में भेजे जाने से स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। इससे विशेष रूप से उन विद्यालयों को लाभ होगा, जहां विद्यार्थियों की संख्या अधिक है लेकिन विषयवार या आवश्यकतानुसार शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।
विभाग का उद्देश्य है कि जिन शिक्षकों की आवश्यकता फिलहाल प्रशिक्षण संस्थानों में नियमित रूप से नहीं पड़ती, उनकी सेवाओं का बेहतर उपयोग सीधे विद्यालयों में किया जाए। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की स्थिति को कम किया जा सकेगा और आवश्यकता वाले स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी।
प्रशिक्षण संस्थानों का काम प्रभावित नहीं होगा
शिक्षा विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट किया जा रहा है कि प्रशिक्षण संस्थानों से शिक्षकों को विद्यालयों में भेजे जाने का अर्थ यह नहीं है कि इन संस्थानों में शिक्षक प्रशिक्षण की व्यवस्था प्रभावित होगी। शिक्षक प्रशिक्षण नियमित रूप से प्रतिदिन संचालित होने वाली प्रक्रिया नहीं है। जब भी निर्धारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होंगे, उस समय आवश्यकता के अनुसार संबंधित विद्यालयों से अनुभवी शिक्षकों को प्रशिक्षण कार्य के लिए बुलाया जाएगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विषय विशेषज्ञों और अनुभवी शिक्षकों की सेवाएं लेकर प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखी जाएगी। इस व्यवस्था से एक ओर जहां प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण कार्य सुचारू रूप से चलता रहेगा, वहीं दूसरी ओर शेष समय में शिक्षकों की सेवाओं का उपयोग उन विद्यालयों में किया जा सकेगा जहां वास्तव में उनकी जरूरत है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि शिक्षकों की उपलब्धता का अधिकतम उपयोग विद्यार्थियों के हित में होना चाहिए। जिन स्कूलों में शिक्षक की जरूरत है, वहां शिक्षक उपलब्ध कराने से बच्चों की नियमित पढ़ाई, सीखने के स्तर और विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
विभाग द्वारा आवश्यकता, विद्यार्थियों की संख्या, शिक्षक-छात्र अनुपात तथा स्थानीय स्तर पर बच्चों और पालकों की मांग जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों के पदस्थापन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे प्रदेश के ऐसे विद्यालयों को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है, जहां लंबे समय से शिक्षकों की कमी महसूस की जा रही है।
शिक्षा विभाग का फोकस स्पष्ट है—जहां बच्चों को शिक्षक की सबसे अधिक जरूरत है, वहां शिक्षक उपलब्ध हों और किसी भी विद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

