निलंबित ब्रेकिंग: युक्तियुक्तकरण व पदोन्नति घोटाले में नए DEO का बड़ा एक्शन: खटराल क्लर्क सस्पेंड, महकमे में हड़कंप

बिलासपुर| 30 सितंबर 2026| बिलासपुर स्कूल शिक्षा विभाग में बहुचर्चित युक्तियुक्तकरण और पदोन्नति घोटाले को लेकर नए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) संदीप पाण्डेय ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। महीनों से फाइलों में दबे इस महाघोटाले में आखिरकार विभागीय चाबुक चल ही गया है। नए डीईओ ने अपने अधिकार क्षेत्र का सख्त इस्तेमाल करते हुए गड़बड़ी के मुख्य कर्ताधर्ता माने जा रहे न्यायालयीन शाखा के क्लर्क सुनील यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। डीईओ के इस साहसिक और कड़े कदम से शिक्षा विभाग के भ्रष्ट सिंडिकेट और महकमे में हड़कंप मच गया है।
डीईओ कार्यालय से भेजी गई थी रिपोर्ट, ऊपरी स्तर पर अटकी थी फाइल
उल्लेखनीय है कि इस पूरे फर्जीवाड़े की जांच के लिए त्रि-सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था। जांच टीम द्वारा तैयार की गई पुख्ता व विस्तृत रिपोर्ट को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से विधिवत कार्रवाई हेतु संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को प्रेषित किया गया था। जांच रिपोर्ट जमा हुए एक माह से अधिक का समय बीत चुका था, लेकिन उच्च कार्यालय स्तर से दोषियों पर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं हो पा रही थी।
अपर स्तर से देरी, तो डीईओ ने खुद उठाया कदम
जब उच्च कार्यालय से कार्रवाई में लगातार हीलाहवाली और देरी देखी गई, तो नए जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले को ठंडे बस्ते में जाने देने के बजाय खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि भ्रष्टाचार के मामलों में कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। चूंकि क्लर्क (बाबू) डीईओ के प्रशासनिक व अनुशासनात्मक अधिकार क्षेत्र के तहत आता है, इसलिए उन्होंने बिना वक्त गंवाए न्यायालयीन शाखा के लिपिक सुनील यादव के निलंबन का आदेश जारी कर दिया।
क्लर्क सुनील यादव पर ये थे गंभीर आरोप
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ था कि पदोन्नति और युक्तियुक्तकरण में नियमों की धज्जियां उड़ाने में न्यायालयीन शाखा की मुख्य भूमिका रही है:
कलेक्टर-कमिश्नर के आदेशों की अनदेखी: सक्षम समिति व कलेक्टर द्वारा खारिज किए गए युक्तियुक्तकरण के प्रकरणों में मिलीभगत कर बैकडोर से मनमाने आदेश तैयार कराए गए।
स्वतः निरस्त आदेशों को बैकडोर से जिंदा करना: पदोन्नति की तय शर्तों के तहत समयसीमा में कार्यभार ग्रहण न करने पर जो पदस्थापना स्वतः निरस्त हो चुकी थी, उन्हें सांठगांठ कर महीनों बाद संशोधित किया गया और चहेतों को उपकृत किया गया।
वरिष्ठों की उपेक्षा व कनिष्ठों को लाभ: पुरानी व निष्प्रभावी प्रतीक्षा सूची से नियमों को ताक पर रखकर बिना डीपीसी व काउंसलिंग के सीधे कनिष्ठों को लाभ पहुंचाने की फाइलें तैयार की गईं।
कोर्ट के नाम पर भ्रामक आदेश: अवैध आदेशों को सही ठहराने के लिए माननीय उच्च न्यायालय के ऐसे निर्देशों का हवाला नस्ती में जोड़ा गया, जो न्यायालय द्वारा कभी दिए ही नहीं गए थे।
अब बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई का इंतजार
शिक्षा विभाग में आम तौर पर यह धारणा बन चुकी थी कि कार्रवाई की गाज केवल शिक्षकों पर गिरती है और दफ्तर के बाबू व बड़े अफसर बच निकलते हैं। लेकिन नए डीईओ के इस एक्शन ने साबित कर दिया है कि गड़बड़ी करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे। क्लर्क सुनील यादव के निलंबन के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या लोक शिक्षण संचालनालय और शासन स्तर से इस घोटाले में शामिल तत्कालीन डीईओ विजय टांडे पर भी इसी तरह की सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी क्योंकि सारे आदेश उन्हीं के हस्ताक्षर से जारी हुए है ।

