क्या छत्तीसगढ़ में भी इस बार कम बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने किया अलर्ट

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रायपुर।14 अप्रैल 2026|भारतीय मौसम विभाग अब मानसून की भविष्यवाणी के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल करने लगा है, इस कारण कई बार अनुमान सटीक निकलता है। फाइनल भविष्यवाणी के लिए हमें मई तक इंतजार करना होगा। तब तक जलवायु और परिस्थितियों में आए बदलाव की वजह से अनुमान बदल भी सकता है। फिलहाल चिंता इस बात की है कि क्या छत्तीसगढ़ भी उन राज्यों में शामिल है, जहां कम बारिश हो सकती है।
विभाग ने तीन श्रेणियों (सामान्य से ऊपर, सामान्य और सामान्य से नीचे) के लिए पूर्वानुमान जारी किया है। इसका अनुमानित नक्शा भी दिया गया है। इसमें भारत को पांच हिस्सों (उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत, दक्षिणी प्रायद्वीप और उत्तर-पूर्व भारत) और मानसून कोर ज़ोन (एमसीजेड) में रखा गया है। मानसून आने के बाद मासिक बारिश के हिसाब से जून, जुलाई और अगस्त के अंत में भी पूर्वानुमान दिया जाता है। पुराने अनुमानों के आधार पर माना जाता है कि देशभर में 92 प्रतिशत बारिश होती है।
इस बार 90 प्रतिशत का अनुमान
विभाग का मानना है कि इस बार सामान्य से कम और अपर्याप्त बारिश की संभावना कम है। देशभर की बारिश का औसत 90 से 95 प्रतिशत तक जा सकता है। सामान्य से अधिक, सामान्य और सामान्य से कम बारिश की संभावना वाले इलाकों को नक्शे के माध्यम से दिखाया गया है। सबसे चिंता की बात यह है कि अभी की स्थिति के अनुसार देश के पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीपीय के हिस्से को छोड़ कर बाकी सभी जगह सामान्य से कम मानसूनी बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। नक्शे में छत्तीसगढ़ का पूरा हिस्सा कम बारिश वाले इलाके के रूप में अंकित है।
क्यों बन रहे कम बारिश के हालात
मौसम विभाग का कहना है कि अभी भूमध्य रेखा प्रशांत क्षे9 में एक कमजोर ली नीना जैसी परिस्थिति बन रही है। यह हालात अप्रैल से जून 2026 तक बने रहने का अनुमान है, इस कारण बारिश प्रभावित हो सकती है। मानसून के अंत तक बारिश में सुधार हो सकता है, क्योंकि तब तक अल नीनो के हालात बदल जाएंगे। ज्ञात हो कि प्रशांत और हिंद महासागर में समुद्र के सतह के तापमान का पूरा असर भारत के मानसून पर पड़ता है। इस लिए मौसम विज्ञानी दोनों महासागर पर नजर रखते हैं।
