स्मृति का हंटर: नेताओं को छोड़ना पड़ा भाजपा दफ्तर, भाजपाइयों के दौरों की रिपोर्ट दिल्ली से लेकर आयी, खोल दी सबकी पोल

स्मृति का हंटर: नेताओं को छोड़ना पड़ा भाजपा दफ्तर, भाजपाइयों के दौरों की रिपोर्ट दिल्ली से लेकर आयी, खोल दी सबकी पोल

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई भाजपा प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के आगमन के साथ ही सख्त कार्यशैली की झलक देखने को मिल गई है। आमतौर पर किसी भी बड़े राष्ट्रीय नेता के आगमन पर माना विमानतल पर शक्ति प्रदर्शन और स्वागत के लिए नेताओं का तांता लग जाता है, लेकिन इस बार नजारा बिल्कुल बदला हुआ था। पहले से ही स्पष्ट निर्देश थे कि एयरपोर्ट पर स्वागत की कोई होड़ नहीं होगी और न ही कोई अनावश्यक भीड़ जुटाई जाएगी। इसी कड़ी में पार्टी की ओर से पहले से प्रस्तावित स्वागत वाली बाइक रैली को भी पूरी तरह से स्थगित कर दिया गया था। पार्टी अनुशासन और सादगी के इस संदेश ने पहले ही दिन स्पष्ट कर दिया कि नई प्रभारी के कार्यकाल में कार्यसंस्कृति पूरी तरह से बदली हुई नजर आएगी।

दफ्तर पहुंचते ही सुनाया फरमान, पांच मिनट में खाली हुआ परिसर

माना एयरपोर्ट से सीधे भाजपा प्रदेश मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर पहुंचने पर वहां स्वागत की संक्षिप्त औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके तुरंत बाद स्मृति ईरानी ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट फरमान सुना दिया कि जिन नेताओं की वास्तव में बैठक के लिए जरूरत है, केवल वही लोग यहां रुकें और बाकी सभी तुरंत रवाना हो जाएं। उन्होंने दो टूक कहा कि जब भी किसी को जरूरत होगी, उन्हें खुद बुलवा लिया जाएगा। इस कड़े निर्देश का असर यह हुआ कि महज पांच मिनट के भीतर ही पार्टी मुख्यालय में गिनती के नेता ही बचे और बाकी सभी को बाहर जाना पड़ा। दिलचस्प बात यह रही कि परिसर में सुरक्षा के लिए तैनात भारी-भरकम पुलिस बल को भी स्मृति ने यह कहते हुए वापस जाने को कह दिया कि उन्हें इसकी कोई आवश्यकता नहीं है।

परिचय कराने की कोशिश पड़ी भारी, दो टूक बोलीं-इसकी जरुरत नहीं

प्रदेश मुख्यालय में जब स्मृति ईरानी के स्वागत और मेल-मिलाप का दौर चल रहा था, तब एक प्रदेश पदाधिकारी ने आगे बढ़कर दूसरे भाजपा नेता का परिचय कराने का प्रयास किया। लेकिन पदाधिकारी का यह प्रयास उल्टा पड़ गया और उन्हें तुरंत मुंह की खानी पड़ी। स्मृति ईरानी ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है, वे सभी को अच्छी तरह जानती हैं और खुद ही सबका परिचय पा लेंगी। उनके इस स्पष्टवादी और बेबाक रवैए ने वहां मौजूद सभी नेताओं को यह अहसास करा दिया कि वे किसी भी तरह की चापलूसी या औपचारिकता के मूड में नहीं हैं, बल्कि उनका पूरा फोकस सिर्फ और सिर्फ जमीनी कामकाज और अनुशासन पर है।

मन की बात’ से हुई बैठकों की शुरुआत, खुद भी दफ्तर में बैठकर सुना कार्यक्रम

बैठकों के आधिकारिक दौर की शुरुआत करने से पहले स्मृति ईरानी ने एक कड़ा और वैचारिक संदेश दिया। उन्होंने निर्देश जारी किया कि तमाम नेता अपने-अपने बूथ स्तर तक जाएं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को सुनें। इस निर्देश का पालन खुद प्रभारी ने भी किया और उन्होंने रायपुर स्थित प्रदेश मुख्यालय में ही बैठकर इस कार्यक्रम को सुना। उनके साथ-साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव ने भी अपने कक्ष में बैठकर ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सहभागिता की। पार्टी का यह रुख साफ दर्शाता है कि संगठन के शीर्ष नेतृत्व से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक वैचारिक जुड़ाव और संवाद को सबसे प्राथमिकता दी जा रही है।

दिल्ली से पूरा होमवर्क लेकर पहुंचीं प्रभारी, बैठकों में खोली दौर न करने वालों की पोल

पार्टी बैठकों के दौरान उस वक्त भारी खलबली मच गई, जब स्मृति ईरानी ने उन प्रदेश भाजपा नेताओं की पोल खोलनी शुरू कर दी जिन्होंने अपेक्षित दौरे नहीं किए थे। उन्होंने एक-एक करके उन नेताओं के नाम लिए जो मैदानी इलाकों में सक्रिय नहीं रहे और पूरी रिपोर्ट सबके सामने रख दी। इसके साथ ही उन नेताओं की भी सराहना की और नाम लिए जिन्होंने अपने तयशुदा दौरे मुस्तैदी से पूरे किए थे। साफ था कि स्मृति ईरानी दिल्ली से ही पूरा होमवर्क और जमीनी फीडबैक तैयार करके रायपुर पहुंची थीं। उनके इस खुलासे से उन नेताओं की सांसें अटक गईं जो अब तक कागजी रिपोर्ट के सहारे अपनी जिम्मेदारियों से बचते आ रहे थे।

 सुस्त जिला अध्यक्षों पर नजर, पदाधिकारियों को मिला काम में तेजी लाने का जिम्मा

प्रदेश भाजपा प्रभारी स्मृति ईरानी ने दिनभर चली मैराथन बैठकों में बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया कि संगठन के निचले स्तर तक कामकाज में अब पूरी गति दिखनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि सभी नेता बूथ स्तर तक पहुंचे और अपनी सक्रियता जमीन पर साबित करें। समीक्षा बैठकों के दौरान यह बात सामने आई कि कुछ जिलों के अध्यक्षों का कामकाज अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। हालांकि ऐसे अध्यक्षों पर तत्काल कोई बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के बजाय, उन्हें सुधार का मौका देते हुए पूरी तेजी से काम करने के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी प्रदेश पदाधिकारियों को सौंपी गई है।

 प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री से पेड़ के नीचे अलग से हुई मंत्रणा

दिनभर की बैठकों और बैठकों के बीच भोजन के वक्त भी राजनीतिक सरगर्मी पूरी तरह से बनी रही। इस दौरान स्मृति ईरानी ने प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव और प्रदेश महामंत्री (संगठन) कर्मवीर सिंह से ज्यादा से ज्यादा फीडबैक लेने के लिए अलग से चर्चा की। खास बात यह रही कि भोजन के समय इन दोनों शीर्ष नेताओं के साथ उन्होंने प्रदेश कार्यालय परिसर में एक पेड़ के नीचे खड़े होकर अलग से लंबी बातचीत की। आलाकमान की इस गुप्त और अनौपचारिक मंत्रणा को लेकर पार्टी के अन्य नेताओं में खासी उत्सुकता और अंदरखाने बैचेनी का माहौल साफ तौर पर देखा गया।

 

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