बड़ी कार्रवाईः संवाद में 25 साल तक प्रिंटिंग के होलसोल रहे अफसर बर्खास्त, तीन जिलों के जनसंपर्क अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस

रायपुर। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सीपीआर रजत बंसल ने संवाद के सिस्टमह को दुरूस्त करना प्रारंभ कर दिया है। सबसे पहले उन्होंने प्रिंटिंग और होर्डिंग्स माफियाओं की मनमानी पर अंकुश लगाया। इसके लिए उन्होंने 25 सालों से प्रिंटिंग का काम देख रहे सब्यसाची कर को हटाया। इसके बाद आज उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया। बताते हैं, सब्यसाची की नियुक्ति ही अवैध थी। 2011 में ही जांच कमेटी ने उनकी नियुक्ति को अवैधानिक ठहरा दिया था। मगर उसकी फाइल दबा दी गई।
विष्णुदेव साय जब मुख्यमंत्री बने तो उन तक संवाद में प्रिंटिंग और होर्डिैग्स माफियाओं की शिकायत पहुंची। उन्होंने जनसंपर्क आयुक्त को कार्रवाई करने कहा। इसके बाद सीपीआर ने शिकंजा कसना प्रारंभ किया। पहली बार उन्होंने घटिया पुस्तक छपाई पर प्रिंटरों के साढ़े तीन करोड़ रुपए काट लिए। इस पर काफी बवाल मचा। क्योंकि, इससे पहले तक संवाद में ये कोई देखने वाला नहीं था कि किताबें जितनी छपनी थी, उतनी छपी की नहीं। किताबों की साइज में भी बड़ा गोलमाल होता था। जानकारों का कहना है, इसमें करोड़ों का खेला होता था। यही स्थिति होर्डिंग्स की थी। होर्डिंग्स को कोई चेक नहीं करता था कि जितने दिन के लिए आर्डर दिया गया, उतने दिन लगा या नहींे। होर्डिंग्स वाले सरकारी को निकाल प्रायवेट लगा देते थे और बिल पुरे का पुटअप कर पैसा निकाल लेते थेे।
बताते हैं, जनसंपर्क आयुक्त ने तीन जिलों के जनसंपर्क अधिकारियों को काम में लापरवाही पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। खबर है कि जवाब अगर संतोषजनक नहीं मिला तो इनमें से एकाध को सस्पेंड भी किया जा सकता है।
ज्ञातव्य है, संवाद के प्रकाशन विभाग के अफसरों से मिलीभगत कर सरकारी पुस्तकों की छपाई में बरसों से बड़ा खेल चल रहा था। कार्यादेश के विपरीत किताबों की साइज कम करना, क्वालिटी डाउन, संख्या में डंडी मारना ये सामान्य बात थी। इसमें हर साल प्रिंटरों और संवाद के अफसरों द्वारा बड़े स्तर पर काला-पीला किया जाता था।
मगर संवाद के नए सीईओ ने इस रैकेट पर बड़ी चोट करते हुए संवाद के उस टेंडर को ही निरस्त कर दिया, जिसके लिए प्रिंटरों ने बड़ी तैयारी की थी। प्रिंटरों ने बड़ा चंदा कर एक होटल में रुम लेकर वहां ऑफिस बनाकर हफ्ते भर तक ऐसी व्यूहरचना की, ताकि संवाद का पूरा आर्डर उन्हें मिल जाए। मगर आपस में ही विवाद हो जाने से मामला फूट गया। मामला मुख्यमंत्री सचिवालय तक गया। बताते हैं, मुख्यमंत्री ने इसमें एक्शन लेने कहा था। इसके बाद संवाद के शीर्ष अधिकारी ने टेंडर निरस्त कर बड़ा झटका दे दिया।
33.74 करोड़ का घोटाला फूटा
मालूम होगा, प्रिंटरों ने पुराने टेंडर में भी बड़ा खेल कर दिया था। दरअसल, समग्र शिक्षा ने संवाद को पुस्तक छपाई के लिए एजेंसी बनाया था। संवाद ने इसका टेंडर किया। कुल 10 प्रकाशकों को 33.74 करोड़ रुपए का काम मिला। मगर जिस तरह प्रिंटर संवाद के कामों में खेल करते थे, उसकी पुनरावृत्ति कर दी। समग्र शिक्षा के किताबोें के लिए संवाद ने 6 फरवरी 2026 को वर्क आर्डर जारी किया किया था। ऐसा पता चला है, 10 में से आठ प्रिंटरों ने क्वालिटी में गोलमाल करते हुए पुस्तक का न केवल साइज कम कर दिया बल्कि कम जीएसएम का पेपर भी लगा दिया। जानकारों का कहना है, प्रिंटरों के इस कारनामे से सरकार को कम-से-कम 10 करोड़ा का नुकसान हुआ होगा। सूत्रों का कहना है कि संवाद के अफसरों और प्रिंटरों का ये खेल राज्य बनने के बाद से जारी था। पुस्तकों की साइज कम, कम जीएसएम को पेपर लगाना और निर्धारित संख्या से कम सप्लाई करने काम काम धड़ल्ले से चल रहा था। संवाद के अफसर ये कभी नही देखते थे कि प्रिंटरों ने कितनी पुस्तकें छापी। बिल पुटअप होने पर वे आंख मूंदकर पेमेंट कर देते थे। याने आधे से कम किताबंें छाप कर पूरा का भुगतान अंदर कर लिया जाता था।
ऐसे पकड़ाया घोटाला
संवाद के अफसरों ने प्रिंटरों के रैकेट और उनके काले कारनामों पर शिकंजा कसते हुए पहली बार गोपनीय सेंपलिंग करानी शुरू की। पहले होता ऐसा था कि सेंपल के लिए निर्धारित साइज की पुस्तकें छाप कर प्रिंटर समग्र शिक्षा और संवाद में जमा कर देता था और बाद में जिलों में भेजने वाली पुस्तकों में खेल कर देता था। मगर इस बार ट्रांसपोर्टिंग के दौरान संवाद ने कंफिडेंशियल सेंपलिंग की, उसमें 10 में से आठ प्रिंटर पकड़े गए, जिन्होंने किताबों की साइज कम किया ही, क्वालिटी भी डाउन कर दिया। दिलचस्प यह है कि इन प्रिंटरों ने पुस्तको का सेंपल संवाद में जमा किया था, वह निर्धारित साइज का था और सप्लाई वाले में कटौती कर दी।

