तरकश का असरः मंत्री जी गरीबों को कैंसर क्यों…के बाद कंट्रोलर फूड एंड ड्रग का प्रभार IAS राजेंद्र कटारा को मिला, तरकश ने लगातार दो स्तंभ में मिलावट खोरी को किया था उजागर

Impact of ‘Tarkash’: रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने आज कंट्रोलर फूड एंड ड्रग आईएएस दीपक अग्रवाल की जगह पर आईएएस राजेंद्र कटारा को प्रभार दिया है। आज के आदेश में लिखा है…दीपक अग्रवाल जब तक अवकाश में रहेंगे, तब तक राजेंद्र कटारा फूड एंड ड्रग का काम देखेंगे। वहीं, दीपक अग्रवाल के अन्य दायित्वों को आईएएस इफ्फत आरा संभालेंगी।
बता दें, एनपीजी न्यूज के तरकश स्तंभ में लगातार इन दो शीर्षकों से…तुकाराम की जय और मंत्री जी, गरीबों को कैंसर क्यों? इस खबर को सरकार ने संज्ञान लिया और लंबे अवकाश पर चल रहे दीपक अग्रवाल का प्रभार फिलहाल बदल दिया है।
देखिए तरकश की दोनों खबरें..
1. जय तुकाराम
महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग कंट्रोलर तुकाराम मुंडे ने बता दिया है कि आईएएस अगर ट्रांसफर, पोस्टिंग की परवाह छोड़ दें तो कुछ भी कर सकता है। तुकाराम ने मुंबई के ऐसे स्टार रेस्टोरेंटों को निशाने पर लिया, जिन्हें कोई टच नहीं कर सकता था। अब बात छत्तीसगढ़ की। छत्तीसगढ़ में फूड एंड ड्रग कंट्रोलर कौन हैं? पीएससी के किस चर्चित बैच के हैं? और इस समय कहां हैं…? इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि इस समय इस डिपार्टमेंट को चला रहा, इंद्रावती भवन में बैठा क्लास थ्री का एक मुलाजिम। कुल मिलाकर फूड एंड ड्रग फिक्सिंग का डिपार्टमेंट बनकर रह गया है। लेब में किसका सेंपल पास और किसका फेल…यह सब मनीराम पर निर्भर करता है।
मनीराम मिल गया तो सेंपल पास, नहीं मिला तो फिर गए काम से। मुंबई वाले तुकाराम बड़े-बड़े लोगों को निबटा रहे तो छत्तीसगढ़ में…? आखिर, बड़े प्रतिष्ठानों पर एक्शन क्यों नहीं? पान मसालों में कई खतरनाक चीजें मिलाई जाती है, मगर उसका कभी सेंपल क्यों नहीं। आखिर मेडिकल स्टोर्स की कभी जांच क्यों नहीं होती? 40000 में दवा दुकान का लायसेंस बन जाता है, उसके बाद साल का दुकान की साइज से पांच से 25 हजार रुपए तय…इसके बाद कुछ भी बेचो, आपके मेडिकल शॉप में कोई झांकने नहीं आएगा।
बता दें, इस विभाग को जानमाल की सुरक्षा के लिए बनाया गया था। उद्देश्य बड़ा पवित्र था…मिलावटी खाद्य पदार्थों की जांच कर लोगों को गंभीर बीमारियों से बचाया जाए। मगर पिछले ढाई-तीन दशक से यह विभाग छत्तीसगढ़ में सिर्फ और सिर्फ डॉक्टरों और दवा दुकानों की संख्या बढ़ाने का काम कर रहा। मिलावटी चीजें से ही सूबे में कैंसर के केसेज तेजी से बढ़े हैं। आलम यह है कि पिछले एक दशक में सिर्फ रायपुर में कैंसर के आधा दर्जन अस्पताल खुल गए। यद्यपि, इंटरेस्टिंग यह है कि मुंबई वाले तुकाराम की वजह से छत्तीसगढ़ में फूड एंड ड्रग डिपार्टमेंट में आमदनी इतनी बढ़ गई है कि अब इस विभाग के उपर से लेकर नीचे तक के मुलाजिम बोल रहे…जय तुकाराम।
2. मंत्री जी, गरीबों को कैंसर क्यों?
एक समय था, जब कैंसर जैसी घातक बीमारी मीडिल या अपर मीडिल क्लास वालों को ज्यादा होती थी। मगर छत्तीसगढ़ के कैंसर अस्पतालों के ओपीडी और वार्डों का सीन देखेंगे तो आप हिल जाएंगे। उसके बाद आपको समझ में आएगा कि रायपुुर जैसी बी क्लास की सिटी में महीने भर के भीतर दो-दो कारपोरेट कैंसर अस्पताल कैसे खुल गए। बता दें, रायपुर में एक दशक पहले तक कैंसर का एक भी प्रायवेट हॉस्पिटल नहीं था, इस समय छह अस्पताल सिर्फ कैंसर के हैं। इस स्तंभकार को रायपुर के एक जाने-माने अंकोलॉजिस्ट ने बताया, वो चौंकाने वाला था…छत्तीसगढ़ में 85 परसेंट से अधिक कैंसर गरीबों को हो रहे। उसमें भी आधे से अधिक मुंह, गले या फेफड़े का कैंसर।
इसकी वजह है, पाउच-गुटखा बनाने वाली कंपनियां धड़ल्ले से उसमें जहरीला मैगनेशियम कार्बोनेट मिला रही। मैगनेशियम कार्बोनेट इसलिए मिलाया जाता है कि गुटखा की लाइफ बढ़े, आपस में चिपके मत और गले में ठंडक महसूस हो। अब इसमें आगे की खबर यह है कि इन गुटखा कंपनियां की जांच और सेंपल लेने का काम जिस ड्रग विभाग के पास है, पिछले तीन साल से किसी का भी सेंपल नहीं लिया है।
ड्रग विभाग के पास सेंपल लेने वाले 63 अधिकारियों का अमला है, मगर उन्हें सख्त हिदायत है कि गुटखा कंपनियों तरफ झांकना नहीं है। पिछले तरकश में इसका जिक्र करने पर पता चला है, दो दिन पहले एकाध छोटी कंपनियों पर दबिश दी गई है। बहरहाल, हेल्थ मिनिस्टर और हेल्थ सिकेट्री को इसकी जांच करानी चाहिए कि गरीबों को ही कैंसर क्यों? और फिर ड्र्रग विभाग भी इन्हीं के अंदर आता है। अगर पान मसालों पर जहरीला पदार्थ मिलाने से मंत्री और सिकेट्री रोक देंगे तो छत्तीसगढ़ की गरीब जनता का उन्हें बड़ा पुण्य मिलेगा।
देखें आदेश

