CG Bilaspur High court: हाई काेर्ट ने कहा: किसी ऐसे संगठन के अनुरोध पर जो मुकदमे का पक्षकार ही नहीं है, पूरे दिन की सुनवाई टालना उचित नहीं….

CG Bilaspur High court: हाई काेर्ट ने कहा: किसी ऐसे संगठन के अनुरोध पर जो मुकदमे का पक्षकार ही नहीं है, पूरे दिन की सुनवाई टालना उचित नहीं….

बिलासपुर। 01 अगस्त 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के सिंगल बेंच ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा, बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित शोकसभा के आधार पर पूरे दिन के लिए अदालती मामलों की सुनवाई स्थगित नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि दिवंगत अधिवक्ता या ज्यूडिशियल अफसर को श्रद्धांजलि देना एक सम्मानजनक परंपरा है, लेकिन इस परंपरा के चलते, पूरे दिन न्यायिक काम रोकना न्याय व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित करता है। जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल 72 वर्षीय एक वृद्ध मकान मालिक की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

पढ़िए क्या है मामला?

छत्तीसगढ़ रायपुर के एक 72 वर्षीय बुजुर्ग ने छत्तीसगढ़ किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत रायपुर के किराया नियंत्रक के 2 फरवरी 2026 के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। उनकी याचिका पर सुनवाई चल रही है। जिला बार एसोसिएशन की शोकसभा के कारण पूरे दिन का न्यायिक कार्य स्थगित कर सभी मामलों की अगली तारीख तय कर दी गई थी।

याचिका में बताया कि शोकसभा, प्रशासनिक कार्य या पीठासीन अधिकारी की अनुपलब्धता जैसे कारणों से बार-बार मामलों को टाल दिया जाता है। इससे कानून के तहत त्वरित न्याय का मूल उद्देश्य ही खत्म हो रहा है।

शोकसभा के नाम पर भी काम रोकना सही नहीं

हाई कोर्ट ने याचिका पर दिए फैसले में कहा है कि न्याय तक निर्बाध पहुंच संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का अभिन्न हिस्सा है। हर पक्षकार को यह उम्मीद रहती है, तय तारीख पर उसके मामले की सुनवाई होगी। कोर्ट ने कहा कि वकीलों की हड़ताल और कार्य बहिष्कार पहले ही अवैध घोषित हैं। केवल वकील उपलब्ध नहीं हैं, इस आधार पर कोर्ट काम स्थगित नहीं कर सकते। शोकसभा के नाम पर भी काम रोकना सही नहीं है। हाई कोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए किराया नियंत्रक द्वारा 2 फरवरी 2026 को जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके जरिए शोकसभा के कारण याचिकाकर्ता के केस की सुनवाई टाल दी गई थी।

पूरे दिन की सुनवाई टालना न्यायिक विवेक नहीं

किसी अधिकरण या अदालत में सूचीबद्ध सभी मुकदमों को बिना यह देखे कि कौन सा मामला कितना जरूरी है, एक साथ स्थगित कर देना न्याय प्रशासन पर बुरा असर डालता है। मामलों को टालने का अधिकार जज के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है। लेकिन किसी ऐसे संगठन के अनुरोध पर जो मुकदमे का पक्षकार ही नहीं है, पूरे दिन की सुनवाई टालना न्यायिक विवेक का सही इस्तेमाल नहीं है। किराया नियंत्रण अधिनियम का मकसद विवादों का जल्द निपटारा करना है। बार-बार काम रुकने से इस कानून का मकसद ही विफल हो जाता है।

छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में इस तरह की व्यवस्था

छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में किसी वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता या महत्वपूर्ण न्यायिक हस्ती के निधन पर फुल कोर्ट रेफरेंस का आयोजन किया जाता है। शोक सभा दोपहर 3:30 बजे या 3:45 बजे आयोजित की जाती है, ताकि दिनभर का मुख्य न्यायिक कामकाज प्रभावित न हो। इस दौरान बेहद संक्षिप्त आयोजन होते हैं, जिसमें चीफ जस्टिस, महाधिवक्ता, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के शोक संदेश पढ़े जाते हैं।

admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *