CG News: राजिम हिंसा, आगजनी और पुलिस पर हमले के आरोपी की जमानत अटकी, सुप्रीम कोर्ट में टली सुनवाई

CG News: राजिम हिंसा, आगजनी और पुलिस पर हमले के आरोपी की जमानत अटकी, सुप्रीम कोर्ट में टली सुनवाई

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बिलासपुर। 26 जून 2026| गरियाबंद जिले के राजिम थाना क्षेत्र में हुए बहुचर्चित हिंसा और आगजनी कांड के एक आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में SLP विशेष अनुमति याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस संजीव सचदेवा की डिवीजन बेंच में पियूष साहू उर्फ पिंटू की ओर से दायर याचिका की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से समय देने का अनुरोध किया गया, जिस पर अदालत ने मामले को आंशिक अवकाशकालीन कार्य अवधि समाप्त होने के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।

पढ़िए क्या है मामला?

मामला राजिम थाना क्षेत्र में फरवरी 2026 में हुई हिंसा से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार एक युवक द्वारा कथित रूप से शिवलिंग तोड़ने की घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया था। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने शिकायतकर्ता कासमुद्दीन कुरैशी उर्फ राजू खान और उसके परिजनों को घेर लिया। आरोप है कि भीड़ ने घरों में तोड़फोड़ की, मारपीट की और कई मकानों तथा वाहनों में आग लगा दी। एफआईआर के अनुसार हमलावरों ने लोहे की रॉड, चाकू और डंडों से हमला किया। घटना के दौरान शिकायतकर्ता, उसके परिजन और पड़ोसी घायल हुए। पुलिस द्वारा पीड़ितों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश के दौरान पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया गया, जिसमें पुलिस जवान घायल हुए थे।

घटना की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका

याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के सिंगल बेंच में हुई थी। याचिका की सुनवाई के बाद कोर्ट ने गुलशन कुमार साहू, नरेंद्र साहू, मनीष साहू और पियूष साहू उर्फ पिंटू की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, आरोपियों पर गैरकानूनी जमावड़े का हिस्सा बनने, शिकायतकर्ता और उसके परिवार पर हमला करने, पुलिसकर्मियों को चोट पहुंचाने तथा आगजनी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप हैं। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और अपराध किए जाने के तरीके को देखते हुए नियमित जमानत देने से इंकार कर दिया था। जमानत याचिका खारिज करने के साथ ही सिंगल बेंच ने ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई शीघ्र पूरी करने की स्वतंत्रता भी दी थी।

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