Bilaspur High Court: कर्मचारी के बार-बार तबादले पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक, राज्य शासन को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

बिलासपुर। 21 जून 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बार-बार किए जा रहे तबादले पर कड़ा रुख अपनाते हुए राहत प्रदान की है। जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित के मुख्यालय, नवा रायपुर में पदस्थ वाहन चालक के रायगढ़ ट्रांसफर आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने माना कि महज 15 महीने के भीतर एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को दोबारा स्थानांतरित करना प्रथम दृष्टया न्यायसंगत नहीं है।
पढ़िए क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता वैभव शुक्ला छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के नवा रायपुर स्थित मुख्यालय में वाहन चालक (चतुर्थ श्रेणी) के पद पर कार्यरत हैं। विभाग ने 8 जून 2026 को एक आदेश जारी कर उनका तबादला जिला लघु वनोपज संघ, रायगढ़ कर दिया था। विभाग के इस फैसले के खिलाफ उन्होंने अधिवक्ता पी. आचार्य के माध्यम से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने लगाए ये आरोप
याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इससे पहले 19 फरवरी 2025 को एक ट्रांसफर आदेश के जरिए वैभव शुक्ला को धरमजयगढ़ से रायपुर भेजा गया था, जहां उन्होंने 6 मार्च 2025 को अपनी जॉइनिंग दी थी। रायपुर मुख्यालय में जॉइन किए अभी महज 15 महीने ही हुए थे कि विभाग ने उन्हें फिर से रायगढ़ भेज दिया।
याचिका में पक्षपात का आरोप लगाते हुए यह भी कहा गया कि रायपुर मुख्यालय में कई ऐसे वाहन चालक पदस्थ हैं, जो लंबे समय से जमे हुए हैं। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को महज 15 महीने में दोबारा हटाना बार-बार तबादला की श्रेणी में आता है, जो स्थापित स्थानांतरण नीति के खिलाफ है।
प्रशासनिक जरुरतों के चलते किया है तबादला
लघु वनोपज संघ की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता त्रिविक्रम नायक ने कहा, यह तबादला किसी दुर्भावना से नहीं, बल्कि पूर्णतः प्रशासनिक आवश्यकता के चलते किया गया है। इसमें किसी भी प्रकार की विधिक अवैधता नहीं है।
हाईकोर्ट का फैसला: चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को बार-बार परेशान करना ठीक नहीं, हाई कोर्ट ने स्थानांतरण आदेश पर लगाई रोक
कोर्ट ने अंतरिम राहत के आवेदन को स्वीकार करते हुए 8 जून 2026 को जारी स्थानांतरण आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 24 जुलाई 2026 की तिथि तय कर दी है।

