Bilaspur High Court: हाई कोर्ट बोला: महिलाओं का संवैधानिक अधिकार है मातृत्व अवकाश, मातृत्व कानून के तहत मिलने वाला अवकाश सामान्य छुट्टियों के खाते से अलग

Bilaspur High Court: हाई कोर्ट बोला: महिलाओं का संवैधानिक अधिकार है मातृत्व अवकाश, मातृत्व कानून के तहत मिलने वाला अवकाश सामान्य छुट्टियों के खाते से अलग

इमेज सोर्स- NPG News

बिलासपुर।25 मई 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने कामकाजी महिलाओं के मातृत्व अवकाश को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने कहा है, यदि किसी महिला कर्मचारी का गर्भपात हो जाता है और वह उसके बाद दोबारा गर्भवती होती है, तो पिछला अवकाश उसके नए मातृत्व अवकाश के रास्ते में बाधा नहीं बनेगा। महिला अपने दूसरे गर्भधारण के लिए कानूनन पूरी मातृत्व अवकाश की हकदार है। हाई कोर्ट ने महिला के वेतन से काटे गए 80 हजार 254 रुपए की रिकवरी को रद्द कर दिया है।

पढ़िए क्या है मामला?

भारतीय खाद्य निगम रायपुर में असिस्टेंट ग्रेड-2 के पद पर पदस्थ महिला कर्मचारी, वर्ष 2019 में गर्भवती हुई थी। उनका जुड़वां बच्चा होना था, गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं के चलते 25 अप्रैल 2019 को अस्पताल में उनका एक भ्रूण मिसकैरेज हो गया। डॉक्टरों की कड़ी निगरानी और बेड रेस्ट के बाद उन्होंने 3 सितंबर 2019 को एक प्री-मैच्योर बेटी को जन्म दिया। इसके बाद उन्होंने मातृत्व अवकाश और नियमों के अनुसार मेडिकल बिल के भुगतान के लिए आवेदन किया। विभाग ने उन्हें केवल 68 दिनों का असाधारण अवकाश बिना वेतन के मंजूर किया। इस बीच विभाग ने लीव बैलेंस नहीं होने का हवाला देते हुए उनके वेतन से 80 हजार 254 रुपए की कटौती कर ली गई। इस पर महिला ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई।

दस्तावेजों की जांच के बाद, मेडिकल बिल का करें भुगतान

हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता मातृत्व अवकाश और गर्भपात के नियमों के तहत कुल 90 दिनों की छुट्टी की हकदार है, जिसे विभाग कम नहीं कर सकता। लीव बैलेंस न होने के नाम पर महिला के वेतन से काटे गए 80254 की रिकवरी को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को रकम वापस करने का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता महिला कर्मचारी के बाकी बचे 3 लाख 76 हजार 773 रुपए के मेडिकल बिल के भुगतान के संबंध में राज्य शासन से कहा है, सभी दस्तावेजों की दोबारा जांच कर उचित आदेश जारी करें।

महिलाओं का वैधानिक अधिकार है मातृत्व अवकाश

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में मैटरनिटी बेनीफिट एक्ट, 1961 का हवाला देते हुए कहा है, मातृत्व अवकाश का अधिकार एक महिला का वैधानिक और संवैधानिक अधिकार है, यह उसके सम्मान, स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ा है। इसे महज इस आधार पर नहीं रोका या काटा जा सकता कि कर्मचारी के खाते में छुट्टियां खत्म हो चुकी हैं। मातृत्व कानून के तहत मिलने वाला अवकाश सामान्य छुट्टियों के खाते से पूरी तरह अलग है।

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