CG Teacher News: पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय से कराएं बीएड ब्रिज कोर्स, एक वर्ष की अधिकतम समय सीमा में दें बीएड की डिग्री

CG Teacher News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने शिक्षा सचिव, संचालक डीपीआई एवं एस सी ई आर टी को पत्र देकर सेवारत शिक्षकों के लिए पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से बीएड ब्रिज कोर्स कराने का मांग की है। ज्ञात हो शिक्षा सचिव डॉ कमलप्रीत सिंह व डीपीआई ऋतुराज रघुवंशी से चर्चा के बाद एससीईआरटी में अपर संचालक जे पी रथ ने बैठक बुलाई थी, जिसमे एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, योगेश सिंह ठाकुर ने बैठक में पक्ष रखा।
प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा है कि पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ शासन के अधीन संचालित राज्य का एकमात्र मुक्त विश्वविद्यालय है जो पत्राचार बीएड की डिग्री देने हेतु पूर्णतः सक्षम एवं अधिकृत है। प्रदेश के हजारों शिक्षकों एवं अन्य अभ्यर्थियों के पास आज भी इसी विश्वविद्यालय से प्राप्त पत्राचार बीएड की डिग्री है, जो भर्ती एवं पदोन्नति में 100% मान्य एवं उपयोगी है। बिलासपुर जिला में 3400 एवं बिलासपुर संभाग में 17600 शिक्षकों को सेवा करते हुए बीएड ब्रिज कोर्स करने की आवश्यकता होगी।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान, वाजिद खान, प्रदेश उपाध्यक्ष देवनाथ साहू, प्रवीण श्रीवास्तव, शैलेन्द्र यदु, कोमल वैष्णव, मुकेश मुदलियार, प्रदेश सचिव मनोज सनाढ्य, प्रदेश कोषाध्यक्ष शैलेन्द्र परिक, प्रदेश पदाधिकारी योगेश सिंह ठाकुर ने कहा है कि सबसे सुविधाजनक एवं व्यवहारिक विकल्प यही होगा कि छत्तीसगढ़ राज्य के सेवारत शिक्षकों को B.Ed. ब्रिज कोर्स भी पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से ही कराया जाए। राज्य के भीतर संचालित होने के कारण इसमें किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी और प्रदेश के आवश्यकता-धारी सहायक शिक्षक, शिक्षक एवं व्याख्याता सुगमता से बीएड की उपाधि प्राप्त कर सकेंगे।
वर्तमान स्थिति एवं आवश्यकता
वर्तमान में विश्वविद्यालय में बीएड की सीटें अत्यंत सीमित हैं। प्रवेश परीक्षा के माध्यम से शासकीय, अशासकीय एवं अन्य अभ्यर्थी प्रवेश लेकर 2 वर्षीय बीएड डिग्री प्राप्त कर सकते हैं। किन्तु सेवारत शिक्षकों के लिए समय की कमी एक बड़ी बाधा है। शासकीय शालाओं में कार्यरत शिक्षकों को 2 वर्ष का अवकाश देकर बीएड कराना संभव नहीं है। अतः उन्हें कम समय में डिग्री देने हेतु B.Ed. ब्रिज कोर्स कराना आवश्यक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सुचारू क्रियान्वयन एवं दक्ष/सक्षम शिक्षक उपलब्ध कराने की दृष्टि से यह कार्य किया जाना चाहिए।
B.Ed. ब्रिज कोर्स का उद्देश्य
1. प्राथमिक शाला में कार्यरत बीएड धारी सहायक शिक्षकों को उच्च पदों पर पदोन्नति हेतु बीएड योग्यता प्रदान करना।
2. मिडिल स्कूल में कार्यरत शिक्षकों को व्याख्याता पद पर पदोन्नति हेतु बीएड योग्यता प्रदान करना।
3. व्याख्याताओं को सेवा में बने रहने एवं पदोन्नति हेतु अनिवार्य बीएड योग्यता पूर्ण कराना।
वर्तमान में प्रदेश में लगभग 74,000 सहायक शिक्षक, शिक्षक एवं व्याख्याता इस ब्रिज कोर्स का लाभ ले सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या के लिए प्रदेश में अन्यत्र पर्याप्त अध्ययन केंद्र उपलब्ध नहीं हैं।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने दिया ये सुझाव
अध्ययन केंद्र: प्रदेश के 146 विकासखण्डों में से प्रत्येक में 5 सुविधा-युक्त हायर सेकेण्डरी शालाओं का चयन कर “अध्ययन एवं सुविधा केंद्र” स्थापित किए जाएं, प्रत्येक सुविधा केंद्र में लगभग 100 शिक्षक को नामांकित किया जावे।
प्रवेश प्रक्रिया: प्रवेश वरिष्ठता के आधार पर किया जाए। सभी सेवारत शिक्षकों को प्रवेश का अवसर मिले।
अध्ययन सामग्री: ब्रिज कोर्स की पुस्तकें विश्वविद्यालय द्वारा निःशुल्क अथवा न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध कराई जाएं।
संपर्क कक्षाएं: प्रत्येक वर्ष अवकाश के दिनों में 20 दिवसीय अनिवार्य संपर्क कक्षाएं निर्धारित की जाएं।
शिक्षक व्यवस्था: अध्ययन केंद्रों में बीएड प्रशिक्षित व्याख्याताओं/शिक्षकों को अंशकालिक शिक्षक के रूप में सेवा देने हेतु नियुक्त किया जाए।
प्रैक्टिकल एवं दक्षत: शिक्षण अभ्यास एवं प्रैक्टिकल हेतु आवश्यक सामग्री विकसित कर शिक्षकों की दक्षता का विकास किया जाए।
ऑनलाइन सुविधा: आवश्यकता अनुसार ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था भी की जाए।
परीक्षा केंद्र: प्रत्येक सुविधा केंद्र को ही परीक्षा केंद्र बनाया जाए ताकि शिक्षकों को दूर न जाना पड़े।
शुल्क: बीएड ब्रिज कोर्स की अनुमानित कुल लागत तय कर शिक्षकों से शुल्क लिया जाए।
बीएड डिग्री एक वर्ष की अधिकतम समय सीमा में विश्वविद्यालय द्वारा बीएड ब्रिज कोर्स की डिग्री प्रदान किया जावे।
नई शिक्षा नीति 2020 के तहत सक्षम व योग्य शिक्षक कम समय में बनाने के लिए बीएड ब्रिज कोर्स कराए जाने की नितांत आवश्यकता है और यह उक्त विधि से सुसंगत तरीके से शीघ्र कराया जा सकता है।

