CG News: सेंट्रल यूनिवर्सिटी के वीसी आलोक चक्रवाल को मिला एक्सटेंशन, 23 तक था कार्यकाल

बिलासपुर। गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक चक्रवाल को शिक्षा मंत्रालय से सेवावृद्धि का आदेश जारी कर दिया है। जारी आदेश में एक साल की सेवावृद्धि दी गई है।
शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में लिखा है, केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारत की राष्ट्रपति गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर की विजिटर के रूप में अपनी सामर्थ्य से प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल का कार्यकाल, जो 23.जुलाई 2026 को समाप्त हो रहा है, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कुलपति के रूप में एक वर्ष से अधिक की अवधि के लिए या नए कुलपति की नियुक्ति तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, तक सेवावृद्धि दी गई है।
प्रोफेसर चक्रवाल के कार्यकाल में विवि को मिली उच्च रैंकिंग
प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल को जुलाई 2021 में बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया था। उनके कार्यकाल को शिक्षा और विश्वविद्यालय के समग्र विकास में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए विस्तार दिया गया है।
ये रही प्रमुख उपलब्धि
- उच्च रैंकिंग: प्रोफेसर चक्रवाल के नेतृत्व में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में जगह बनाई और भारत के शीर्ष 50 विश्वविद्यालयों में शामिल हुआ। नैक रैकिंग में विश्वविद्यालय को ए प्लस,प्लस रैकिंग मिली।
- इंडिया’ के स्थान पर ‘भारत’: उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मार्कशीट, डिग्री और आधिकारिक संचार में ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ शब्द को अंगीकृत किया।
- राष्ट्रीय सम्मान: विश्वविद्यालय में शैक्षणिक विकास और सामाजिक पहलुओं को बढ़ावा देने के लिए उन्हें अहमदाबाद में ‘विशिष्ट सम्मान’ और ‘भारत नाम गौरव सम्मान’ से भी नवाजा गया है।
जानिए प्रो.चक्रवाल को
गुजरात के राजकोट में स्थापित सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के कामर्स एंड एडमिस्ट्रेशन विभाग में डा.अलोक कुमार चक्रवाल प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रहे। उनके पास 25 वर्षों से अधिक का अकादमिक-प्रशासनिक कार्य समेत शैक्षणिक अनुभव है। इनके पिता का नाम मन्नूलाल माता का नाम राजकुमारी देवी है। प्रबंधन, वाणिज्य, वित्त, विपणन, अनुसंधान में विशेष योग्यता है। यूएसए, यूके, थाईलैंड, नेपाल जैसे देशों में जा चुके हैं। तीन गोल्ड व चार बेस्ट रिसर्च पेपर के साथ 100 से अधिक शोधार्थियों को आगे बढ़ा चुके हैं।

