CG: नैनो उर्वरकों से खेती को मिल रही नई ताकत, मुख्यमंत्री विष्णुदेव की पहल से आधुनिक कृषि तकनीकों को मिल रहा बढ़ावा

रायपुर। देश के धान के कटोरे के रूप में पहचान रखने वाले छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है। राज्य की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और किसानों की समृद्धि को सरकार विकास का प्रमुख आधार मानकर कार्य कर रही है। बदलते समय के साथ खेती में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी और किफायती विकल्प बनकर उभरे हैं।
कम लागत में बेहतर उत्पादन, मिट्टी की उर्वरा शक्ति का संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा जैसे गुणों के कारण नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। कृषि विभाग के माध्यम से नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देकर खेती को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
कम लागत में अधिक उत्पादन का प्रभावी विकल्प
नैनो उर्वरक अत्यंत सूक्ष्म कणों से तैयार किए जाते हैं, जिन्हें पौधे सामान्य उर्वरकों की तुलना में अधिक तेजी और प्रभावी ढंग से अवशोषित करते हैं। इससे आवश्यक पोषक तत्व समय पर उपलब्ध होते हैं और फसलों का विकास बेहतर होता है। कम मात्रा में उपयोग होने के कारण किसानों की उर्वरक लागत घटती है, जबकि उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखने को मिलता है। छत्तीसगढ़ में धान, मक्का, चना, अरहर और विभिन्न सब्जी फसलों में नैनो यूरिया तथा नैनो डीएपी का उपयोग किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है। कई किसानों के अनुभव बताते हैं कि इन उर्वरकों के प्रयोग से फसल अधिक हरी-भरी रहती है, पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और पैदावार में भी वृद्धि होती है।
मिट्टी और पर्यावरण संरक्षण में भी उपयोगी
नैनो उर्वरकों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वे मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं। पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से जहां भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है, वहीं नैनो उर्वरक संतुलित पोषण उपलब्ध कराकर मिट्टी की उर्वरा शक्ति को सुरक्षित रखने में सहायक हैं। साथ ही इनसे रासायनिक तत्वों का जल स्रोतों में बहाव भी कम होता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। इनका परिवहन और भंडारण भी आसान है। भारी बोरियों के स्थान पर छोटी बोतलों में उपलब्ध नैनो उर्वरक किसानों के लिए ले जाने और उपयोग करने में सुविधाजनक हैं।
इससे समय, श्रम और परिवहन लागत में भी कमी आती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों से वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और नवीन तकनीकों को अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग कर किसान उत्पादन बढ़ा सकते हैं, लागत घटा सकते हैं और अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। बढ़ती कृषि लागत और सीमित संसाधनों के बीच नैनो उर्वरक भविष्य की टिकाऊ खेती का मजबूत आधार बनकर सामने आए हैं।
आधुनिक तकनीक आधारित यह पहल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ पर्यावरण संरक्षण और कृषि विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वैज्ञानिक और नवाचार आधारित खेती को बढ़ावा देकर कृषि क्षेत्र को अधिक समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है।
बेमेतरा में नैनो यूरिया से बदल रही खेती की तस्वीर
खेती में आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ राज्य के किसान लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं। इन्हीं किसानों में शामिल हैं बेमेतरा जिले के ग्राम बावाघठोली के कृषक संपद दास मानिकपुरी, जिन्होंने नैनो यूरिया के उपयोग से खेती में मिले सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं। उनका मानना है कि यह तकनीक न केवल फसल उत्पादन को बेहतर बनाने में सहायक है, बल्कि मिट्टी की सेहत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
संपद दास मानिकपुरी बताते हैं कि नैनो यूरिया के प्रयोग से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व समय पर और प्रभावी ढंग से मिलते हैं। इससे पोषक तत्वों का बेहतर प्रबंधन संभव होता है, जबकि मिट्टी की जैविक सक्रियता भी बनी रहती है। उनका कहना है कि संतुलित पोषण मिलने से खेती अधिक वैज्ञानिक, किफायती और टिकाऊ बन रही है।
वे बताते हैं कि कृषि विभाग के मार्गदर्शन में नैनो यूरिया का उपयोग करने के बाद उन्हें आधुनिक खेती की उपयोगिता का बेहतर अनुभव हुआ। उनके अनुसार, यह तकनीक भविष्य की कृषि के लिए एक उपयोगी विकल्प बनकर उभर रही है, जिससे किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का भी लाभ मिल सकता है।
संपद दास मानिकपुरी ने किसानों से भी अपील की है कि वे कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार नैनो उर्वरकों का उपयोग करें। उनका कहना है कि यदि किसान आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाएंगे तो न केवल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी।
कोंडागांव में किसान पुनम की खेती बनी लाभकारी
कोंडागांव जिले के ग्राम ग्राम दावड़ीबेड़ा (चिखलपुटी) के युवा किसान पुनम नेताम आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बना रहे हैं। उन्होंने नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग कर अपनी फसलों में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया है। पिछले दो वर्षों से वे धान, मक्का और सब्जियों की खेती में नैनो उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
पुनम नेताम ने बताया कि गत वर्ष उन्होंने 10 एकड़ भूमि में मक्का की खेती की थी। नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसल की वृद्धि अच्छी हुई और उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। उनका कहना है कि नैनो उर्वरक का छिड़काव सीधे पौधों की पत्तियों पर किया जाता है, जिससे पोषक तत्व शीघ्रता से पौधों तक पहुंचते हैं। इससे उर्वरक की उपयोग क्षमता बढ़ती है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। इसके विपरीत, पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से समय के साथ मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
पुनम ने बताया कि आधुनिक तकनीक को अपनाकर खेती की लागत कम हुई है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है। उन्होंने अन्य किसानों से भी वैज्ञानिक पद्धतियों और नैनो उर्वरकों के उपयोग को अपनाने की अपील की।
कोरबा में नैनो उर्वरकों से सुधरी फसल की गुणवत्ता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और नवाचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं। किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे आधुनिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। संतुलित पोषण, कम लागत और बेहतर कृषि उत्पादकता की दिशा में यह पहल किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है।
कोरबा जिले के ग्राम खैरभवना निवासी कृषक रमेश सिंह कंवर इसकी सफलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण हैं। लंबे समय से खेती-किसानी से जुड़े कंवर अपनी लगभग डेढ़ एकड़ कृषि भूमि में धान की खेती करते हैं। खरीफ सीजन की तैयारियों के तहत वे आज सहकारी समिति कनबेरी पहुंचे, जहां उन्होंने अन्य कृषि आदान सामग्री के साथ नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया भी प्राप्त किया।
कंवर बताते हैं कि वे पिछले दो वर्षों से नैनो उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं। प्रारंभ में उन्होंने परीक्षण के तौर पर इसका प्रयोग किया था, लेकिन सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद अब वे प्रत्येक वर्ष नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई है, हरियाली बढ़ी है तथा उत्पादन में भी सुधार देखने को मिला है। इसके साथ ही पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में कम मात्रा में अधिक प्रभाव मिलने से उनकी लागत में कमी आई है और आर्थिक लाभ भी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से पौधों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त होते हैं, जिससे फसल का समुचित विकास होता है।

