CG डीजीपी पोस्टिंग पर धर्मसंकटः UPSC ने छत्तीसगढ़ सरकार से पूछा…पेनल भेजने के बाद भी पोस्टिंग क्यों नहीं किया, पढ़िये अब क्या होगा?

CG DGP Posting News: रायपुर। संघ लोक सेवा आयोग ने उन राज्यों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया हे, जिन्होंने पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति नहीं की हैं। छत्तीसगढ़ के साथ दूसरी स्थिति है। यहां यूपीएससी से दो नामों को पेनल आने के बाद पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति की बजाए अरुणदेव गौतम को प्रभारी डीजीपी बनाया है। 4 फरवरी 2015 को अशोक जुनेजा के रिटायर होने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने अरुणदेव गौतम को प्रभारी डीजीपी बनाया था। याने प्रभारी के तौर पर गौतम ने एक साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। अगले हफ्ते उनका 13 महीना हो जाएगा।
पेनल में कितने नाम?
यूपीएससी द्वारा अनुमोदित पेनल में दो नाम हैं। पहला अरुणदेव गौतम और दूसरे नंबर पर हैं हिमांशु गुप्ता। हालांकि, यूपीएससी आमतौर पर तीन नामों का पेनल राज्य सरकार को भेजता है। मगर राज्य सरकार ने जो नाम भेजे थे, उसमें से यूपीएससी दो नाम पर ही सहमत हुई। राज्य सरकार ने यूपीएससी से पेनल आने के बाद गौतम को प्रभारी डीजीपी बना दिया।
यूपीएससी क्यों नाराज है?
यूपीएससी इसलिए खफा है कि लंबी प्रक्रिया के बाद छत्तीसगढ़ का पेनल बना था। राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में कई क्वेरियां निकाली गई। इसी दौरान हिमांशु गुप्ता से सीनियर जीपी सिंह के पक्ष में कैट का फैसला आ गया। इसलिए जीपी सिंह ने यूपीएससी के समक्ष डीजीपी के लिए प्रेजेंटेशन दिया। और यूपीएससी ने उनका नाम भी प्रस्ताव में शामिल किया। चूकि यूपीएससी ने बड़ी छानबीन के बाद पेनल फायनल किया था मगर 13 महीने होने जा रहे अभी तक प्रभारी डीजीपी के भरोसे ही छत्तीसगढ़ चल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया दो हफ्ते का टाईम
पता चला है पूर्णकालिक डीजीपी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस लगा हुआ है। उसकी सुनवाई में शीर्ष अदालत ने केंद्र और यूपीएससी को जवाब के लिए दो हफ्ते का टाईम दिया है। दो हफ्ते के भीतर केंद्र और यूपीएसससी को जवाब फाइल करनी होगी।
छत्तीसगढ़ में अब क्या होगा?
छत्तीसगढ़़ के पास यूपीएससी के सवाल का कोई जवाब नहीं होगा। क्योंकि, लंबी क्वेरियों के बाद यूपीएससी ने पेनल भेजा था। फिर दो नाम में से किसी एक को पूर्णकालिक डीजीपी अपाइंट करने में कोई दिक्कत नहीं जानी चाहिए। उपर से मामला सुप्रीम कोर्ट में भी है। इसलिए, ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार धर्मसंकट में फंस गई है। पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति नहीं होगी तो यूपीएससी और सुप्रीम कोर्ट नाराज होगा और करेंगे तो किसे? ये बड़ा सवाल है। वैसे, जानकारों का कहना है कि सरकार जल्द ही पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति कर देगी।
पूर्णकालिक डीजीपी क्यों नहीं?
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त न कर पाने के पीछे कुछ सिफारिशो की बातें सामने आ रही हैं। सरकार जिसको पूर्णकालिक डीजीपी बनाना चाहती है, उसके खिलाफ उपर कहीं से प्रेशर है कि फलां अफसर को बनाया जाए। इस चक्कर में सरकार फैसला नहीं ले पा रही।
पूर्णकालिक का कार्यकाल दो साल
पूर्णकालिक डीजीपी जिस डेट से अपाइंट होगा, उसका दो साल का कार्यकाल उस दिन से प्रारंभ होगा। अरुणदेव गौतम को सरकार अगर कंटीन्यू करती है तो उनका दो साल नियुक्ति की डेट से प्रारंभ होगा। याने उन्हें करीब 13 महीने का फायदा मिलेगा। गौतम का अगले साल जून में रिटायमेंट है। मगर पूर्णकालिक डीजीपी बनने के बाद वे मार्च 2028 में रिटायर होंगे। और हिमांशु गुप्ता अगर डीजीपी बनते हैं तो उनके सामने लंबा पीरियड होगा। दो साल का कार्यकाल तो रहेगा ही उनका रिटायरमेंट 2030 में है, सो सरकार चाहे तो दो साल से अधिक भी उन्हें कंटिन्यू कर सकती है।

