CG के 3.80 लाख कर्मचारियों, शिक्षकों के कैशलेस इलाज का आदेश जारी, पढ़िए क़्या करना होगा…

CG के 3.80 लाख कर्मचारियों, शिक्षकों के कैशलेस इलाज का आदेश जारी, पढ़िए क़्या करना होगा…

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने कर्मचारियों-शिक्षकों के कैशलेस चिकित्सा सुविधा के क्रियान्वयन के लिए दिशा-निर्देश जारी किया गया है। नीचे देखें जारी दिशा-निर्देश…

1. प्रस्तावना 

छत्तीसगढ़ राज्य में शासकीय सेवकों एवं उनके परिवार के आश्रित सदस्यों को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम, 2013 के अंतर्गत चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति का लाभ प्रदान किया जाता है। वर्तमान व्यवस्था में शासकीय सेवकों को स्वयं व्यय वहन करना पड़ता है तथा बाद में प्रतिपूर्ति होती है, जो कि एक लंबी एवं जटिल प्रक्रिया है।

इन व्यावहारिक कठिनाइयों के निराकरण तथा तत्काल वित्तीय राहत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा मुख्य बजट 2026-27 में ‘कैशलेस चिकित्सा सुविधा’ लागू किए जाने हेतु स्वीकृति प्रदान की गई है। इसका शीर्षक “छत्तीसगढ़ राज्य के शासकीय सेवकों एवं उनके आश्रितों हेतु कैशलेस चिकित्सा सुविधा (संचालन एवं क्रियान्वयन) दिशा-निर्देश, 2026” होगा।

2. कैशलेस चिकित्सा सुविधा हेतु लाभार्थी की परिभाषा

‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (चिकितषा परिचर्या) नियम, 2013’ के नियम 2(1) में उल्लिखित शासकीय सेवक तथा नियम 3(घ) में परिभाषित उनके परिवार के आश्रित सदस्य इस योजना के अंतर्गत पात्र होंगे।

3. उपचार की दर

‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम 2013’ के नियम 8 अनुसार केंद्रीय शासन स्वास्थ्य सेवायें, नई दिल्ली के बी-1 श्रेणी के शहर हेतु समय-समय पर CGHS के निर्धारित पैकेज अथवा वास्तविक व्यय, जो भी कम हो, तक उपचार की सीमा निर्धारित होगी। इस सीमा से अतिरिक्त राशि का वहन कर्मचारी द्वारा स्वयं किया जावेगा तथा जहाँ दरें निर्धारित नहीं हैं, वहाँ राज्य शासन दरें निर्धारित कर सकेगा ।

4. सत्यापन/प्रमाणीकरण

इस व्यवस्था में उपचार प्रारंभ होने से पूर्व पूर्वानुमोदन (Pre-authorization) की व्यवस्था लागू रहेगी। किन्तु कैशलेस चिकित्सा सुविधा के अंतर्गत उपचार हेतु सत्यापन /प्रमाणीकरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम 2013 में निहित प्रावधान के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा Online माध्यम से निर्मित पोर्टल में आबंटित प्राधिकार क्षेत्रांतर्गत किया जावेगा, ताकि योजना का सफल क्रियान्वयन हो सके।

5. कैशलेस उपचार हेतु मान्यता प्राप्त निजी चिकित्सालय

मान्यता प्राप्त चिकित्सालय से अभिप्रेत है, जैसा कि ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम 2013’ के नियम-3 (च) में परिभाषित है। आवश्यकतानुसार नवीन पात्रता मानदंडों को पूर्ण करने वाले चिकित्सालयों का सूचीबद्धीकरण (Empanelment) किया जा सकेगा।

6. हितग्राही पात्रता सत्यापन एवं ई-हेल्थ कार्ड पंजीयन

पात्र हितग्राहियों का सत्यापन किए जाने के उपरांत ई-हेल्थ कार्ड (E-Health Card) जारी किया जाएगा:

शासकीय सेवकः पात्रता का सत्यापन Employee ID के आधार पर होगा।

आश्रित परिवार सदस्यः पात्रता का सत्यापन आधार संख्या एवं अन्य आवश्यक अभिलेखों के आधार पर संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) द्वारा किया जाएगा।

अनुमोदन दायित्वः ई-हेल्थ कार्ड हेतु पात्रता का परीक्षण एवं अनुमोदन संबंधित विभागाध्यक्ष कार्यालय का होगा।

IT प्लेटफॉर्म: इसके लिए Beneficiary Identification System (BIS) नामक प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से विकसित किया जाएगा।

अनिवार्यताः ई-हेल्थ कार्ड जारी होने के उपरांत ही कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ लिया जा सकेगा।

7. आई० टी० प्लेटफार्म

योजना के सुचारु एवं पारदर्शी संचालन हेतु आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा विकसित IT प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। इसके अंतर्गत निम्नलिखित मॉड्यूल होंगे:

BIS (Beneficiary Identification System): हितग्राहियों की पहचान और E-Health Card

पंजीयन हेतु।

HEM 2.0 (Hospital Empanelment Module): चिकित्सालयों के पंजीयन एवं सूचीबद्धीकरण

हेतु।

TMS 2.0 (Transaction Management System): Pre-Authorization, क्लेम प्रोसेसिंग और

भुगतान प्रक्रिया हेतु।

8. उपचार प्राप्त करने की प्रक्रिया

पात्र लाभार्थी सूचीबद्ध अस्पताल में E-Health Card के माध्यम से कैशलेस उपचार प्राप्त कर सकेंगे, अस्पताल में किसी प्रकार के भुगतान की आवश्यकता नहीं होगी।

निर्धारित CGHS पैकेज के अतिरिक्त अधिक सुविधा का लाभ लेने पर अतिरिक्त व्यय कर्मचारियों को स्वयं वहन करना होगा।

इस योजनांतर्गत अंतः रोगी (IPD) उपचार सम्मिलित होगा।

बाह्य रोगी (OPD) उपचार का लाभ पूर्व की भांति छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम, 2013 के तहत प्रतिपूर्ति से की प्राप्त की जावेगी।

उपचार उपरांत अस्पताल द्वारा TMS में दस्तावेज अपलोड कर क्लेम प्रस्तुत किया जाएगा, जिसका भुगतान TPA/चिकित्सकों के परीक्षण उपरांत किया जाएगा।

9. शिकायत निवारण प्रणाली

इसके लिए 24×7 टोल-फ्री कॉल सेंटर एवं ऑनलाइन पोर्टल स्थापित किया जाएगा। निवारण व्यवस्था निम्नलिखित दो भागों में होगी:

1. लाभार्थियों से संबंधित शिकायतें: ई-हेल्थ कार्ड, इलाज की उपलब्धता या अस्पताल स्तर पर आ रही समस्याओं का निवारण।

2. सूचीबद्ध चिकित्सालयों से संबंधित शिकायतें: पंजीयन (Empanelment), प्री-ऑथराइजेशन, दावा प्रस्तुतिकरण और भुगतान संबंधी तकनीकी समस्याओं का निवारण।

10. योजनांतर्गत अनियमितताओं के संबंध में दण्डात्मक कार्यवाही

चिकित्सालयों द्वारा अनियमितताः दोषी पाए जाने पर प्रचलित नियमों एवं योजना के प्रावधानों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

शासकीय सेवकों द्वारा अनियमितताः गलत जानकारी देने या दुरुपयोग करने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के अंतर्गत कार्यवाही की जाएगी।

11. नोडल विभाग एवं योजना प्रबंधन हेतु पृथक प्रकोष्ठ का गठन

नोडल विभागः लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग।

योजना प्रबंधन प्रकोष्ठ (Cell): संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं के अधीन एक पृथक सेल का गठन किया जाएगा।

थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA): दावों के परीक्षण, Pre-Authorization सत्यापन और Claim Processing के लिए TPA की सेवाएँ ली जा सकेंगी।

12- वित्तीय व्यवस्था

चिकित्सा सेवाओं के देयकों का भुगतान राज्य बजट में चिकित्सा प्रतिपूर्ति मद के अंतर्गत उपलब्ध प्रावधानों से किया जाएगा।

13. योजना के क्रियान्वयन हेतु समयबद्ध कार्य योजनाः योजना के क्रियान्वयन हेतु समयबद्ध कार्ययोजना पृथक से जारी किया जाएगा।

14. समस्त प्रशासकीय विभाग एवं उनके अधीनस्थ विभागाध्यक्ष/कार्यालयों का दायित्व:-

लाभार्थी शासकीय कर्मचारी द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने कार्यालय प्रमुख को आवश्यक सूचना प्रदान की जाएगी। उक्त सूचना प्राप्त होने के उपरांत संबंधित कर्मचारी के अवकाश लेखे के संधारण, निगरानी एवं सत्यापन संबंधी समस्त कार्यवाही छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2010 के नियम 17 के प्रावधानों के अनुरूप की जाएगी। इस संबंध में नोडल विभाग (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग) के अंतर्गत गठित सेल को पृथक से अनिवार्यतः सूचित किया जाएगा।

15. संशोधन करने की शक्ति

सामान्य प्रशासन विभाग एवं वित्त विभाग की सहमति / परामर्श से, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा आवश्यकतानुसार समय-समय पर संशोधन, परिवर्धन अथवा परिवर्तन किया जा सकेगा।

16. निर्वचन

दिशा-निर्देश से संबंधित यदि कोई प्रश्न उद्भूत होता है तो उसे राज्य शासन को निर्दिष्ट किया जाएगा, जिस पर उसका विनिश्चय अंतिम होगा।

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