छत्तीसगढ़ में AI क्रांति की शुरुआत: CM विष्णुदेव की पहल से 500 करोड़ के AI मिशन से 6 लाख छात्रों और 1.5 लाख कर्मचारियों को मिलेगी ट्रेनिंग…

छत्तीसगढ़ में AI क्रांति की शुरुआत: CM विष्णुदेव की पहल से 500 करोड़ के AI मिशन से 6 लाख छात्रों और 1.5 लाख कर्मचारियों को मिलेगी ट्रेनिंग…

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में 1 जुलाई को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक हुई। बैठक में राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास एवं विस्तार, मोबाइल नेटवर्क सुदृढ़ीकरण, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सेवा सेतु, ई-प्रगति पारस (प्रोजेक्ट असेसमेंट रिव्यू एवं एनालिसिस सिस्टम), सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स तथा विभिन्न डिजिटल नवाचार परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। इसके साथ ही युवाओं के लिए कौशल विकास, रोजगार सृजन, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने तथा तकनीक आधारित सुशासन को नई गति देने के विभिन्न आयामों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और राज्य इस क्षेत्र में देश का अग्रणी प्रदेश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि एआई केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता, दक्षता और जनसेवा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रभावी माध्यम है। एआई के प्रभावी उपयोग से शासन-प्रशासन को अधिक सक्षम, पारदर्शी, त्वरित एवं नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल नई तकनीक को अपनाना नहीं है, बल्कि प्रदेश के लोगों को एआई के लिए तैयार करना, व्यवसायों की उत्पादकता बढ़ाना, नागरिकों की आय में वृद्धि करना तथा बेहतर सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कौशल विकास और दैनिक प्रशासनिक कार्यों में एआई के व्यापक उपयोग से आम नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इसके लिए राज्य में मजबूत एआई इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा तथा सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार एआई के उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

एआई के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य

बैठक में प्रस्तुत विजन दस्तावेज में बताया गया कि राज्य का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को एआई के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है, जहां प्रत्येक नागरिक अपनी भाषा में एआई सीख सके, सरकार तकनीक आधारित भरोसेमंद सेवाएं प्रदान करे और उद्योगों तथा व्यवसायों को नई गति मिले। इस मिशन के अंतर्गत पांच प्रमुख स्तंभों – एआई कौशल विकास, नवाचार एवं स्टार्टअप, जागरूकता एवं आउटरीच, सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई तथा शासन में एआई के उपयोग-पर कार्य किया जाएगा। प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में विद्यार्थियों तथा सरकारी कर्मचारियों को एआई का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत स्कूलों में एआई जागरूकता कार्यक्रम, एआई एवं रोबोटिक्स क्लब तथा हैकाथॉन आयोजित किए जाएंगे। महाविद्यालयों में एआई सर्टिफिकेशन कार्यक्रम, छात्र परियोजनाओं के लिए अनुदान, आईटीआई में एआई लैब तथा विश्वविद्यालयों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। राज्य में नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एआई डेटा लैब्स, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, एआई आधारित स्टार्टअप, डेटा सेट तथा अनुसंधान परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त क्लाउड कंप्यूटिंग सुविधा, सीड फंडिंग तथा उद्योगों एवं शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से अत्याधुनिक एआई आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने की भी कार्ययोजना प्रस्तुत की गई।

विभिन्न विभागों में एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणाली

बैठक में सुरक्षित व जिम्मेदार एआई उपयोग को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तर पर एआई नीति तैयार की जाएगी, जिसमें डेटा सुरक्षा, नागरिकों की निजता का संरक्षण, नियमित तकनीकी ऑडिट तथा केंद्र सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) कानून के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। शासन में एआई के प्रभावी उपयोग के लिए विभिन्न विभागों में एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणाली विकसित की जाएगी, प्रत्येक विभाग का अलग रोडमैप तैयार होगा, एआई नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इसके साथ ही सरकारी एआई पायलट परियोजनाएं प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भाषिणी प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे सरकारी सेवाएं अधिक सरल, सुलभ और समावेशी बन सकें।

AI मिशन’ को मंजूरी

छत्तीसगढ़ में 5 अगस्त 2026 को मंत्रिपरिषद ने ’छत्तीसगढ़ राज्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन’ को मंजूरी दी। इस मिशन का उद्देश्य राज्य में सुशासन, नई तकनीक, कौशल विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। यह मिशन 5 वर्षों के लिए होगा, जिस पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

इस मिशन के तहत 100 AI डेटा लैब बनाई जाएंगी, 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, 300 से अधिक AI स्टार्टअप्स को सहायता दी जाएगी, 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को AI का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शासन के कार्यों को आसान और तेज़ बनाने के लिए 50 से अधिक AI आधारित सेवाएं विकसित की जाएंगी।

यह मिशन भारत सरकार के IndiaAI Mission के अनुरूप छत्तीसगढ़ को उत्तरदायी, नवाचार-आधारित और भविष्य उन्मुख डिजिटल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

AI तकनीक से होगा पीएमजीएसवाई सड़कों का निरीक्षण

हर महीने वीडियो से होगी सड़कों की जांचनई तकनीक के तहत अब राज्य की प्रत्येक पीएमजीएसवाई सड़क का हर महीने वीडियो आधारित निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए विशेष एआई आधारित ऐप और डैशबोर्ड भी तैयार कर लिया गया है। एआई तकनीक सड़कों पर मौजूद गड्ढों (पॉटहोल्स), दरारों और अन्य क्षतियों की अपने आप पहचान कर उनका विश्लेषण करेगी। इससे सड़कों की श्रियल टाइमश् (वास्तविक स्थिति) की सटीक जानकारी मिलेगी और किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी से बचा जा सकेगा।

एआई तकनीक से वन और वन्यजीवों की होगी चौबीसों घंटे निगरानी

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम सामान्य सीसीटीवी कैमरों की तुलना में कहीं अधिक उन्नत और सक्रिय सुरक्षा समाधान हैं। यह कंप्यूटर विज़न (Computer Vision) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) तकनीकों का उपयोग करते हैं, जो वीडियो फुटेज का वास्तविक समय (रियल-टाइम) में विश्लेषण करके संभावित खतरों की पहचान करते हैं और तुरंत अलर्ट भेजते हैं लउदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और वन सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ट्रायल शुरू किया गया है। यह पहल वन्यजीवों की सुरक्षा, मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम तथा अवैध शिकार, लकड़ी तस्करी और अतिक्रमण जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

संवेदनशील क्षेत्रों में शुरू हुआ ट्रायल

परियोजना का प्रारंभिक ट्रायल ओडिशा सीमा से लगे कुल्हाडीघाट, इंदागांव, रिसगांव, दक्षिण उदंती और पायलीखण्ड उत्तर उदंती रेंज में किया जा रहा है। ये क्षेत्र हाथियों और अन्य वन्यजीवों के प्रमुख आवागमन गलियारे हैं तथा अवैध वन्यजीव व्यापार, सागौन तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी और अतिक्रमण की दृष्टि से भी संवेदनशील माने जाते हैं।

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