155 साल से चली आ रही परंपरा: CG में रामलला माता जानकी और हनुमान जी का ऐसा मंदिर जिसका पट साल में दशहरा के दिन कुछ घंटों के लिए खुलता है

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बिलासपुर। 20 अक्टूबर 2026| छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में एक ऐसा भी मंदिर है जो दशहरा के दिन साल में एक बार और वही पांच घंटे के लिए खुलता है। यह परंपरा बीते 155 वर्षों से चली आ रही है। इस परंपरा में इतने साल बाद बदलाव हो रहा है। शाम चार से रात 9 बजे तक खुलने वाला मंदिर का पट इस बार सुबह सात बजे से खुल गया है। शाम चार बजे तब भक्त रामलला के दर्शन कर सकेंगे।
साल में एक बार विजयादशमी पर्व पर खुलने वाला मंदिर के समय में 155 साल बाद अब जाकर बदलाव देखने को मिल रहा है। दशहरा के दिन शाम 4 से रात 9 बजे तक खुलने वाला मंदिर इस बार सुबह से ही खुल गया है। इस बार सुबह 7 से शाम 4 बजे तक भक्त भगवान के दर्शन कर पाएंगे।
इस साल एक और परंपरा पर विराम लग गया है। इस साल भक्त न तो मनोकामना नारियल बांध पाएंगे और न ही जिनकी मन्नतें पूरी हो गई हैं, वे नारियल खोल पाएंगे। नारियल, फूल और पत्ती चढ़ाने की भी अनुमति नहीं है।
इसलिए लेना पड़ा निर्णय
मंदिर परिवार ने यह निर्णय इसलिए लिया है, मंदिर की देखरेख करने वाली अमिता पांडे का करीब तीन महीने पहले निधन हो गया है। लिहाजा इस वर्ष धार्मिक परंपरा में बदलाव किया गया है। अब मंदिर की देखरेख और सेवा हरिश्चंद्र पांडेय और दिनेशचंद्र पांडेय करेंगे। वे ही मंदिर की आगे की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे।
दिल्ली, मुंबई से लेकर दूसरे प्रांत के आते हैं श्रद्धालु
छत्तीसगढ़ बिलासपुर के हटरी चौक स्थित श्रीराम-सीता-हनुमान मंदिर करीब 155 साल पुराना है। यहां भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमानजी की प्रतिमाएं विराजित हैं। मंदिर की सबसे खास बात यह है कि सालभर बंद रहने के बाद दशहरा पर्व पर एक दिन के लिए मंदिर का पट खुलता है। इस दिन बिलासपुर के अलावा मुंबई, दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर खुलने से करीब दो घंटे पहले ही एक किलोमीटर से अधिक लंबी कतार लग जाती है। दूर दराज से आने वाले श्रद्धालु एक दिन पहले बिलासपुर पहुंच जाते हैं। मंदिर परिवार के बुद्धेश्वर शर्मा (सीटू) ने बताया कि दशहरा से पहले ही कई श्रद्धालु बाहर से शहर पहुंच चुके हैं।
बुद्धेश्वर ने बताया कि पहले मंदिर शाम 4 से रात 7 बजे तक खुलता था। भक्तों की संख्या बढ़ती गई। दो साल तक घंटों लाइन में लगने के बाद भक्तों को दर्शन नहीं मिल पाया था। इसके बाद दो घंटे का समय बढ़ाया गया था। शाम 4 से रात 9 बजे तक कर दिया गया था। इस साल मंदिर का पट 9 घंटे खुलेगा। सुबह 7 से शाम 4 बजे तक खुलेगा।
मंदिर में बंधे हैं 800 मनोकामना नारियल
सेवादार सीटू ने बताया कि मंदिर में वर्तमान में करीब 800 मनोकामना नारियल बंधे हुए हैं। बीते वर्ष 260 लोगों की मन्त्रतें पूरी हुई थी। उन्होंने मंदिर पहुंचकर अपने मनोकामना नारियल खोले थे। 115 श्रद्धालुओं ने मनोकामना नारियल बांधे थे। इस साल श्रद्धालुओं को मनोकामना नारियल बांधने और मन्नत पूरी होने पर उन्हें खोलने का अवसर नहीं मिलेगा। फूल भी नहीं चढ़ा सकेंगे। अगले वर्ष पुरानी परंपराएं फिर शुरू की जा सकती हैं।
जानिए विजयादशमी के ही दिन क्यों खुलता है मंदिर का पट
पूर्वजों के अनुसार, पहले यहां नीम का एक पेड़ था, जो सूखकर अपने आप गिर गया। पेड़ के गिरते ही उसकी जड़ों से भगवान श्रीराम, माता जानकी और भाई लक्ष्मण की प्रतिमाएं निकली थीं। इसके बाद यहां विधि-विधान से मंदिर की स्थापना की गई। मान्यता है कि मंदिर खोलने और प्रभु की प्रतिमाओं को स्पर्श करने से कई अप्रिय घटनाएं हुई। इसी वजह से मंदिर को बंद रखा जाता है। मान्यता है कि दशहरे के दिन भगवान प्रसन्न रहते हैं और सभी की गलतियों को क्षमा कर देते हैं। इसलिए साल में एक बार दशहरे के दिन ही मंदिर के पट खोले जाते हैं। इस दौरान विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इसके अलावा, परिवार के सदस्य प्रतिदिन तीनों समय भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं।

