CG भाजपा में हड़कंप: स्मृति ईरानी के बंगले के एक फोन से उड़ी मंत्री, विधायकों की नींद…पढ़िए क़्या है मामला

रायपुर। 19 अक्टूबर 2026| दिल्ली से आए इस एक फोन कॉल ने रायपुर से लेकर बस्तर और सरगुजा तक राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। प्रदेश संगठन के जरिए साय सरकार के सभी मंत्रियों, विधायकों और संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए हैं। छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रभारी स्मृति ईरानी ने दिल्ली से रवानगी से पहले ही अपनी कार्य शैली को स्पष्ट कर दिया है।
पार्टी के उच्च सूत्रों ने बताया कि स्मृति के बंगले से आए फोन में स्पष्ट आदेश दिया गया है मंत्री, विधायक और प्रदेश भाजपा के पदाधिकारी अपने सोशल मीडिया पर सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार का पूरा लेखा-जोखा तुरंत प्रस्तुत करें। निर्देश में साफ कहा गया है कि अब तक राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कितनी पोस्ट की गई हैं, इसका विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाए। इस आदेश के बाद प्रदेश भाजपा की आईटी टीम इसका लेखा- जोखा एकत्रित करने में जुट गई है और एक- दो दिन में रिपोर्ट दिल्ली भेज दी जाएगी। जिनका रिपोर्ट कार्ड कमजोर रहेगा, माना जा रहा है कि उन्हें स्मृति के कड़े तेवर का सामना करना पड़ सकता है।
केवल योजनाओं का हिसाब
इस फोन कॉल में सबसे महत्वपूर्ण और सख्त हिदायत यह दी गई है कि रिपोर्ट में केवल और केवल सरकारी योजनाओं व नीतियों से जुड़ी पोस्ट को ही शामिल किया जाएगा। किसी मंदिर दर्शन, धार्मिक आयोजन, किसी के जन्मदिन की बधाई, शोक संवेदना या शादी-विवाह समारोह में शामिल होने जैसी पोस्ट की रिपोर्ट बिल्कुल नहीं भेजनी है। यानी निहायत ही व्यक्तिगत और सामाजिक पोस्ट को इस रिपोर्ट कार्ड में शून्य माना जाएगा। इस स्पष्ट निर्देश के बाद से ही भाजपा नेताओं के पसीने छूट रहे हैं, क्योंकि ज्यादातर मंत्री, विधायक और पदाधिकारी सोशल मीडिया का उपयोग अपनी व्यक्तिगत गतिविधियों, बधाई संदेशों और क्षेत्रीय भ्रमण तक ही सीमित रखते आए हैं। कुछ दिन पहले शादी पार्टियों की फोटो डालने की होड़ मच गईं थी.
सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और उपलब्धियों से जुड़े पोस्ट बहुत कम ही देखने को मिलते हैं। आम तौर पर केवल राज्य सरकार के बजट, किसी बड़ी विशेष घोषणा या केंद्रीय मंत्रियों के दौरों के समय ही ये नेता सोशल मीडिया पर सक्रिय नजर आते हैं।
डिजिटल मोर्चे पर कसावट की रणनीति
छत्तीसगढ़ भाजपा के नए प्रभारी के रूप में स्मृति ईरानी की यह रणनीति साफ दर्शाती है कि वे केवल पारंपरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहने वाली हैं। आज के दौर में सोशल मीडिया जनता से सीधे जुड़ने और सरकार की उपलब्धियों को हर घर तक पहुंचाने का सबसे मजबूत माध्यम है। स्मृति ईरानी संगठन और सरकार के हर प्रतिनिधि को उनकी डिजिटल उपस्थिति और कार्यशैली के आधार पर परखना चाहती हैं। वे साय सरकार की ‘महतारी वंदन योजना’, ‘किसान उन्नति योजना’ और ‘आवास योजना’ जैसी प्रमुख नीतियों का सोशल मीडिया पर व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करना चाहती हैं। इस कदम से जनप्रतिनिधियों को केवल पद तक सीमित न रखकर उन्हें सरकार के विजन को जनता के बीच ले जाने के लिए सीधा जवाबदेह बनाया जा रहा है।
समीक्षा के पीछे का रणनीतिक गणित
सोशल मीडिया अकाउंट्स की रिपोर्ट मांगने के पीछे संगठन का मुख्य उद्देश्य यह आकलन करना है कि कौन सा नेता सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। आज के समय में विपक्ष के नैरेटिव का जवाब देने और अपनी उपलब्धियां गिनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म सबसे कारगर हथियार हैं। यदि मंत्री और विधायक ही योजनाओं का प्रचार नहीं करेंगे, तो जनता तक सरकार की छवि सकारात्मक रूप से नहीं पहुंच पाएगी। इसीलिए स्मृति ईरानी जमीनी सच्चाई और डिजिटल रियलिटी दोनों को एक साथ परख रही हैं ताकि संगठन को हर स्तर पर मजबूत किया जा सके।
साय सरकार के मंत्रियों का मौजूदा रुझान
यदि वर्तमान में साय सरकार के मंत्रियों और विधायकों के सोशल मीडिया प्रोफाइल पर नजर डालें, तो वहां ज्यादातर सामग्री व्यक्तिगत और औपचारिक गतिविधियों से भरी पड़ी है। मंत्री और विधायक फेसबुक व एक्स पर अपने दौरों की तस्वीरें, समर्थकों के साथ मुलाकात, त्योहारों की शुभकामनाएं और व्यक्तिगत आयोजनों की फोटो अपलोड करने में सबसे आगे हैं। इसके उलट, सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं के लाभ, लाभार्थियों की कहानियां और आंकड़ों से जुड़े पोस्ट बहुत कम ही देखने को मिलते हैं। अमूमन बजट या किसी प्रशासनिक निर्णय के दिन ही एकाध पोस्ट की जाती है, जिसके बाद स्थिति फिर से जस की तस हो जाती है।
दिल्ली से तैयार रिपोर्ट कार्ड और कड़ा संदेश
रायपुर आने से पहले ही स्मृति ईरानी के इस सख्त कदम से यह साफ जाहिर हो रहा है कि वे दिल्ली में बैठकर पूरा होमवर्क कर रही हैं। वे छत्तीसगढ़ के राजनीतिक परिदृश्य का जमीनी फीडबैक और नेताओं का पूरा रिकॉर्ड लेकर ही 25 अक्टूबर को रायपुर कदम रखेंगी। इससे यह स्पष्ट संकेत भी मिल रहा है कि स्मृति ईरानी रायपुर पहुंचकर केवल औपचारिकता पूरी करने या औपचारिक बैठकें लेने नहीं आ रही हैं, बल्कि वे हर एक मंत्री, विधायक और पदाधिकारी के रिपोर्ट कार्ड की विस्तृत समीक्षा करेंगी, कमजोर कड़ियों को चिह्नित करेंगी और भविष्य के लिए कड़े दिशा-निर्देश तय करेंगी।
आडंबर पर पाबंदी और सादगी का संदेश
स्मृति ईरानी की कार्यशैली और अनुशासन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके स्वागत-सत्कार के लिए भी एक विशेष निर्देश जारी हुआ है। प्रदेश कार्यकर्ताओं और नेताओं को स्पष्ट तौर पर मना कर दिया गया है कि उनके स्वागत में किसी भी तरह के बड़े-बड़े होर्डिंग्स, फ्लेक्स या कटआउट नहीं लगाए जाएंगे। उनका स्वागत केवल और केवल भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक झंडों से ही किया जाएगा। आडंबर और व्यक्तिगत प्रदर्शन से दूर रहने का यह निर्देश भाजपा नेताओं को स्पष्ट संदेश देता है कि उनका पूरा ध्यान केवल संगठन की मजबूती और सरकार के काम को जनता तक पहुंचाने पर होना चाहिए।

