No होर्डिंग्स: UP और MP का फार्मूला छत्तीसगढ़ में: स्मृति ईरानी के आगमन से पहले स्वागत की होड़ पर चला संगठन का डंडा

No होर्डिंग्स: UP और MP का फार्मूला छत्तीसगढ़ में: स्मृति ईरानी के आगमन से पहले स्वागत की होड़ पर चला संगठन का डंडा

रायपुर। 18 अक्टूबर 2026| छत्तीसगढ़ में नए प्रभारी के रूप में पहली बार कदम रखने जा रहीं स्मृति ईरानी के भव्य और बहुप्रतीक्षित स्वागत की तैयारियों के बीच पार्टी आलाकमान ने स्थानीय नेताओं की ‘स्वागत होड़’ और खुद को चमकाने की होड़ पर पूरी तरह से नकेल कस दी है। 25 अक्टूबर को रायपुर पहुँच रहीं प्रदेश प्रभारी के अभिनंदन के लिए शहर की दीवारों, चौराहों और बिजली के खंभों पर व्यक्तिगत बैनर, पोस्टर, कटआउट या होर्डिंग्स टांगने पर पूरी तरह पाबंदी आयद कर दी गई है। प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि स्वागत के लिए केवल और केवल पार्टी के अधिकृत झंडों और आधिकारिक बैनरों का उपयोग किया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस अभूतपूर्व निर्देश के पीछे भाजपा की गहरी राजनीतिक और रणनीतिक दूरदर्शिता छिपी हुई है। छत्तीसगढ़ में अमूमन किसी भी राष्ट्रीय या केंद्रीय स्तर के बड़े नेता के आगमन पर स्थानीय क्षत्रपों, विधायकों और टिकट के दावेदारों के बीच अपना शक्ति-प्रदर्शन करने की होड़ मच जाती थी। चौराहों पर लगे विशालकाय होर्डिंग्स में स्थानीय नेताओं के चेहरे केंद्रीय प्रभारियों से भी बड़े नजर आते थे, जिससे पार्टी के भीतर गुटबाजी और गुटगत राजनीति को अनायास ही बढ़ावा मिलता था। यूपी और एमपी में जिस तरह से पार्टी ने व्यक्ति-पूजा और चाटुकारिता पर कड़ाई से अंकुश लगाया है, ठीक उसी मॉडल को अब छत्तीसगढ़ में भी लागू कर यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि भाजपा में संस्था और संगठन हमेशा व्यक्ति विशेष से ऊपर हैं।

गुटबाजी पर लगाम और ‘वन पार्टी, वन सिंबल’ का संदेश

स्मृति ईरानी के आगमन से पहले जारी इस फरमान के पीछे सबसे प्रमुख उद्देश्य पार्टी के भीतर छिपी आंतरिक कलह और गुटबाजी को जड़ से समाप्त करना है। व्यक्तिगत होर्डिंग्स और कटआउट्स के जरिए स्थानीय नेता अपनी अलग ताकत दिखाने की कोशिश करते हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाता है। पार्टी हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि स्वागत किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि पद और संगठन का होना चाहिए, इसीलिए ‘वन पार्टी, वन सिंबल’ की नीति के तहत केवल पार्टी के आधिकारिक झंडों को ही प्राथमिकता दी गई है ताकि सामूहिक नेतृत्व की संस्कृति को बढ़ावा मिल सके।

क्या दूसरे राज्यों और भाजपा के इतिहास में भी ऐसा हुआ है?

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में पहले से ही केंद्रीय प्रभारियों के दौरों पर व्यक्तिगत प्रचार की बजाए अनुशासित स्वागत का मॉडल अपनाया जाता रहा है। भाजपा के केंद्रीय संगठन की यह पुरानी परिपाटी रही है कि जब भी कोई राष्ट्रीय अध्यक्ष या वरिष्ठ प्रभारी किसी राज्य के दौरे पर जाते हैं, तो अनावश्यक होर्डिंग्स, स्वागत द्वारों और भारी-भरकम खर्च से बचने की सख्त हिदायत दी जाती है। छत्तीसगढ़ में इस बार इसे पूरी कड़ाई से लागू करना इस बात का सुबूत है कि पार्टी अब व्यक्तिगत प्रचार की संस्कृति से पूरी तरह किनारा करना चाहती है।

स्मृति ईरानी की आक्रामक छवि और कार्यकर्ताओं में भारी उत्सुकता

स्मृति ईरानी की गिनती भाजपा की सबसे मुखर, ऊर्जावान और आक्रामक नेत्रियों में होती है। उनके पास देश भर में संगठन चलाने और चुनावों का लंबा प्रशासनिक अनुभव है। उनके इस पहले रायपुर प्रवास को लेकर कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों में जबरदस्त कौतूहल और उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी कैडर यह देखने को उत्सुक है कि उनकी कार्यशैली राज्य के राजनीतिक समीकरणों और संगठन-सरकार के बीच तालमेल को किस प्रकार नई दिशा और मजबूती देती है। बीते कुछ माह में संगठन में सरकार से समन्वय को लेकर चिंताएं की गई थीं और इस पर दिग्गज नेताओं की बैठक में मंथन भी किया गया था, इस कारण भी नए प्रदेश प्रभारी का इंतजार किया जा रहा है।

कभी प्रियंका के लिए कांग्रेस ने बिछाए थे गुलाब फूल की पंखुडि़यां

छत्तीसगढ़ में नेताओं के स्वागत और शक्ति-प्रदर्शन का इतिहास काफी विरोधाभासी रहा है। जहां एक ओर भाजपा अनुशासन और कड़े नियमों का पाठ पढ़ा रही है, वहीं राज्य ने स्वागत की वह भव्यता भी देखी है जब फरवरी 2023 के राष्ट्रीय महाधिवेशन के दौरान कांग्रेस नेता व तत्कालीन मेयर एजाज ढेबर ने अपनी राष्ट्रीय नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के स्वागत में रायपुर एयरपोर्ट के बाहर सड़क पर लगभग 2 किलोमीटर तक ताजे गुलाब के फूलों की कालीन बिछा दी थी। क्विंटल भर गुलाब की पंखुड़ियों से सजी उस सड़क की तस्वीरें देश भर में चर्चा का केंद्र बनी थीं। हालांकि, उसी कांग्रेस के भीतर स्वागत पोस्टरों से तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम की तस्वीर गायब होने पर ऐसा राजनीतिक बवाल मचा था कि बाद में रातों-रात पोस्टर ढंकने पड़े थे।

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