Supreme Court News: CG के पूर्व प्रमुख सचिव की SLP सुप्रीम कोर्ट से खारिज, पढ़िए पेंशन को लेकर पूर्व PS ने क्या की थी मांग, हाई कोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती

Supreme Court News: CG के पूर्व प्रमुख सचिव की SLP सुप्रीम कोर्ट से खारिज, पढ़िए पेंशन को लेकर पूर्व PS ने क्या की थी मांग, हाई कोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती

Supreme Court News: बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग CGPSC के पूर्व अध्यक्ष आरएस विश्वकर्मा को बढ़ी हुई पेंशन का लाभ देने की मांग से जुड़े मामले में दायर विशेष अनुमति याचिका SLP खारिज कर दी है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस चंद्रशेखर की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया।

आरएस विश्वकर्मा ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के 15 मई 2026 के फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट के जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की डिवीजन बेंच ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

प्रमुख सचिव पद से रिटायर होने के बाद बने थे आयोग के अध्यक्ष

आरएस विश्वकर्मा 31 जनवरी 2015 को राज्य सरकार के प्रमुख सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद उन्हें छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। आयोग के अध्यक्ष के पद से वे 16 जनवरी 2017 को सेवानिवृत्त हुए।

राज्य सरकार ने उनकी सेवानिवृत्ति के समय पेंशन 11,59,800 रुपये वार्षिक निर्धारित की थी। विवाद, राज्य लोक सेवा आयोग अध्यक्ष के रूप में अतिरिक्त पेंशन के लाभ को लेकर था।

पुराने नियम में 4.80 लाख रुपये की अधिकतम सीमा

मामले के अनुसार, वर्ष 2001 के सेवा नियमों के विनियमन 8(3) में शासकीय सेवा और आयोग की सेवा को मिलाकर कुल पेंशन की अधिकतम सीमा 4,80,000 रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित थी। विश्वकर्मा की शासकीय सेवा से मिलने वाली पेंशन ही इस सीमा से अधिक थी। इसलिए आयोग अध्यक्ष के रूप में उनकी सेवा के लिए अतिरिक्त पेंशन का लाभ नहीं दिया गया।

2020 में बढ़ी पेंशन सीमा, 2018 से किया गया लागू

राज्य सरकार ने 5 दिसंबर 2020 को नियमों में संशोधन कर अधिकतम पेंशन सीमा 13,50,000 रुपये वार्षिक कर दी। हालांकि संशोधित व्यवस्था को 1 अप्रैल 2018 से प्रभावी किया गया। विश्वकर्मा की मांग थी कि संशोधन को 1 जनवरी 2016 से प्रभावी माना जाए, जिससे उन्हें भी बढ़ी हुई सीमा का लाभ मिल सके।

हाई कोर्ट ने कहा था- तिथि तय करने का निर्देश नहीं दे सकती अदालत

हाई कोर्ट ने कहा था कि पेंशन से जुड़े ऐसे नीतिगत और वित्तीय मामलों में अदालत नियम बनाने वाले प्राधिकारी को किसी विशेष तिथि से संशोधन लागू करने का निर्देश नहीं दे सकती। अदालत ने यह भी माना कि विश्वकर्मा द्वारा समानता के आधार पर दिए गए एमएस पैकरा के उदाहरण से उन्हें लाभ नहीं मिल सकता, क्योंकि पैकरा की कुल पेंशन उस समय लागू अधिकतम सीमा के भीतर था।

हाई कोर्ट के इसी फैसले को पूर्व प्रमुख सचिव व आयोग के पूर्व अध्यक्ष आरएस विश्वकर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद एसएलपी खारिज कर दी।

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